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आलू ने तोड़ दी किसानों की कमर
अमर उजाला ब्यूरो बांकेगंज।
Updated Sat, 14 Jan 2017 10:26 PM IST
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potato
- फोटो : amar ujala
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प्रति एकड़ 10 से 20 हजार रुपये का हो रहा घाटा, लागत भी न निकलने से परेशान
इस साल आलू की फसल ने किसानों की कमर तोड़ दी है। हालत यह है कि किसानों की लागत लौटना तो दूर प्रति एकड़ 10 से 20 हजार रुपये का घाटा हो रहा है। ऐसे में कर्ज बढ़ने की चिंता में किसानों की आंखों से नींद गायब हो रही है।
बांकेगंज इलाके में पिछले साल अनेक किसानों ने आलू की खेती की थी। इस साल नोटबंदी के बाद मार्केट में आई मंदी के चलते आलू के रेट में भारी गिरावट आई है। आलू की खेती में प्रति एकड़ 30 से 35 हजार की लागत आई है। जबकि मार्केट में रेट कम होने के कारण प्रति एकड़ आलू की बिक्री से 20 से 25 हजार रुपये ही हाथ आ रहे है। इस पर भी थोक व्यापारी आलू की बिक्री बाजार में होने के बाद रुपये देने की बात कह कर उन्हें बैंरग कर रहे है। नकद रुपये नहीं मिलने से किसान बेहद परेशान हैं। फसल के लिए कर्ज लेने से हालत ज्यादा खराब है।
क्या कहते है आलू उत्पादक किसान
अंजू सिंह का कहना है कि किसान हर तरफ से मारा जा रहा है। कोई भी सरकार रहे किसानों के कल्याण के लिए उचित कदम नहीं उठाती। उनके कल्याण की बातें चुनावों और कागजों तक सिमट कर रह जाती है। किसानों को हो रहे भारी घाटे पर ध्यान देने की जरूरत है।
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विपिन शर्मा का कहना है किसान के कल्याण की बात कौन सोचता है। नेता संसद और विधान सभा में अपने वेतन, भत्ते बढ़ाने पर तुरंत एकजुट हो जाते है। बैंकों में फसल बीमा के नाम पर जबरिया रुपये काटे जा रहे हैं, लेकिन फसल खराब होने पर बीमा लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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इस साल आलू की फसल ने किसानों की कमर तोड़ दी है। हालत यह है कि किसानों की लागत लौटना तो दूर प्रति एकड़ 10 से 20 हजार रुपये का घाटा हो रहा है। ऐसे में कर्ज बढ़ने की चिंता में किसानों की आंखों से नींद गायब हो रही है।
बांकेगंज इलाके में पिछले साल अनेक किसानों ने आलू की खेती की थी। इस साल नोटबंदी के बाद मार्केट में आई मंदी के चलते आलू के रेट में भारी गिरावट आई है। आलू की खेती में प्रति एकड़ 30 से 35 हजार की लागत आई है। जबकि मार्केट में रेट कम होने के कारण प्रति एकड़ आलू की बिक्री से 20 से 25 हजार रुपये ही हाथ आ रहे है। इस पर भी थोक व्यापारी आलू की बिक्री बाजार में होने के बाद रुपये देने की बात कह कर उन्हें बैंरग कर रहे है। नकद रुपये नहीं मिलने से किसान बेहद परेशान हैं। फसल के लिए कर्ज लेने से हालत ज्यादा खराब है।
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क्या कहते है आलू उत्पादक किसान
अंजू सिंह का कहना है कि किसान हर तरफ से मारा जा रहा है। कोई भी सरकार रहे किसानों के कल्याण के लिए उचित कदम नहीं उठाती। उनके कल्याण की बातें चुनावों और कागजों तक सिमट कर रह जाती है। किसानों को हो रहे भारी घाटे पर ध्यान देने की जरूरत है।
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विपिन शर्मा का कहना है किसान के कल्याण की बात कौन सोचता है। नेता संसद और विधान सभा में अपने वेतन, भत्ते बढ़ाने पर तुरंत एकजुट हो जाते है। बैंकों में फसल बीमा के नाम पर जबरिया रुपये काटे जा रहे हैं, लेकिन फसल खराब होने पर बीमा लाभ नहीं मिल पा रहा है।