{"_id":"e415f085640b1562c8c6d107621b3afd","slug":"possible-to-prevent-the-aids-awareness-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जागरूकता से ही एड्स से बचाव संभव ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जागरूकता से ही एड्स से बचाव संभव
लखीमपुर खीरी।
Updated Mon, 30 Nov 2015 05:10 PM IST
विज्ञापन
भगवानदीन आर्यकन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय में रेड रिबन क्लब और स्वास्थ्य समिति की ओर से एड्स जन जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसका केंद्रीय विषय था वर्तमान समय में युवा वर्ग में एड्स जागरूकता की अनिवार्यता।
मुख्य वक्ता नोडल अधिकारी एड्स डॉ. वीबी राम ने अपने संबोधन में कहा कि हमारा प्रयास निरंतर एड्स मृत्यु दर को कम करना और जागरूकता से एड्स मृत्यु दर को कम करना और जागरूकता के माध्यम से एड्स बचाव की प्रेरणा देना है।
उन्होंने कहा कि सभी यौन संक्रामक रोग एड्स नहीं है लेकिन यौन संक्रमण एड्स का एक प्रधान कारण है। इसके अलावा संक्रमित रक्त, संक्रमित सुई तथा संक्रमित माता से शिशु को हो सकता है। इसलिए सभी सरकारी अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं का एचआईवी टेस्ट अनिवार्य कर दिया गया है। उन्होंने एड्स के लक्षण बताते हुए युवा वर्ग को सावधान, जागरूक रहने और समाज को जागरूक करने का आह्वान किया।
विज्ञापन
विशिष्ट वक्ता वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. राकेश माथुर ने एड्स से बचाव के लिए सयंमित जीवन शैली, अपनाने और भ्रांतियों से बचने का संदेश देते हुए कहा कि जानकारी ही बचाव है। इसलिए बुरी आदतों ड्रग्स और कुसंगित से बचें। बाजार से रक्त लेने के स्थान पर स्वयं रक्तदान द्वारा परिष्कृत रक्त चढ़वाने का सुझाव दिया। डॉ. एससी मिश्र ने एड्स को अनेक रोगों का समूह बताते बताते हुए स्वयं जागरूक रहने होने और सावधान रहने पर बल दिया।
प्राचार्या डॉ. निरुपमा अशोक ने छात्राओं को मीडिया संक्रमण से बचने और शिक्षा के सदुपयोग द्वारा सामाजिक और वैचारिक रूप से सदा नवीन जानकारी के लिए जागरूक रहने का संदेश दिया। आज समय है कि विवाह के लिए कुंडली नहीं रक्त कुंडली मिलाएं।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. पुष्पा मलिक ने किया। डॉ. रेखा पांडेय ने प्रश्नमंच का आयोजन किया। इस मौके पर डॉ. अन्नपूर्णा गुप्ता, डॉ. वीना रानी गुप्ता, डॉ. शशि प्रभा बाजपेयी, डॉ. सुशीला सिंह, डॉ. रेखा पांडेय, अर्चना सिंह, रीता सिंह और एनसीसी कैडेट्स के अलावा बड़ी संख्या में छात्राएं मौजूद रहीं।
विज्ञापन
मुख्य वक्ता नोडल अधिकारी एड्स डॉ. वीबी राम ने अपने संबोधन में कहा कि हमारा प्रयास निरंतर एड्स मृत्यु दर को कम करना और जागरूकता से एड्स मृत्यु दर को कम करना और जागरूकता के माध्यम से एड्स बचाव की प्रेरणा देना है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि सभी यौन संक्रामक रोग एड्स नहीं है लेकिन यौन संक्रमण एड्स का एक प्रधान कारण है। इसके अलावा संक्रमित रक्त, संक्रमित सुई तथा संक्रमित माता से शिशु को हो सकता है। इसलिए सभी सरकारी अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं का एचआईवी टेस्ट अनिवार्य कर दिया गया है। उन्होंने एड्स के लक्षण बताते हुए युवा वर्ग को सावधान, जागरूक रहने और समाज को जागरूक करने का आह्वान किया।
विज्ञापन
विशिष्ट वक्ता वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. राकेश माथुर ने एड्स से बचाव के लिए सयंमित जीवन शैली, अपनाने और भ्रांतियों से बचने का संदेश देते हुए कहा कि जानकारी ही बचाव है। इसलिए बुरी आदतों ड्रग्स और कुसंगित से बचें। बाजार से रक्त लेने के स्थान पर स्वयं रक्तदान द्वारा परिष्कृत रक्त चढ़वाने का सुझाव दिया। डॉ. एससी मिश्र ने एड्स को अनेक रोगों का समूह बताते बताते हुए स्वयं जागरूक रहने होने और सावधान रहने पर बल दिया।
प्राचार्या डॉ. निरुपमा अशोक ने छात्राओं को मीडिया संक्रमण से बचने और शिक्षा के सदुपयोग द्वारा सामाजिक और वैचारिक रूप से सदा नवीन जानकारी के लिए जागरूक रहने का संदेश दिया। आज समय है कि विवाह के लिए कुंडली नहीं रक्त कुंडली मिलाएं।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. पुष्पा मलिक ने किया। डॉ. रेखा पांडेय ने प्रश्नमंच का आयोजन किया। इस मौके पर डॉ. अन्नपूर्णा गुप्ता, डॉ. वीना रानी गुप्ता, डॉ. शशि प्रभा बाजपेयी, डॉ. सुशीला सिंह, डॉ. रेखा पांडेय, अर्चना सिंह, रीता सिंह और एनसीसी कैडेट्स के अलावा बड़ी संख्या में छात्राएं मौजूद रहीं।