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Lakhimpur Kheri News: स्कूलों की बदहाली... टाट-पट्टी पर बैठकर पढ़ रहे बच्चे

Sun, 07 Apr 2024 01:45 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 07 Apr 2024 01:45 AM IST
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Poor condition of schools...children studying sitting on sackcloth
गोला के स्कूल में जमीन पर बैठकर ​शिक्षा ग्रहण करते बच्चे-संवाद
लखीमपुर खीरी। स्कूलों की दशा सुधारने के लिए शासन से करोड़ों रुपये जारी हो रहे हैं मगर बच्चों को अब भी टाट-पट्टी पर ही बैठना पड़ा रहा है। स्कूलों में न फर्नीचर है और न पीने का पानी। कई जगह टायलेट के लिए बच्चों को खेतों में जाना पड़ता है। शनिवार को अमर उजाला ने स्कूलों की पड़ताल कराई तो ज्यादातर स्कूलों में तमाम अव्यवस्थाएं मिलीं।
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जिले में 3106 परिषदीय स्कूल संचालित हैं। बेहजम के पूर्व माध्यमिक विद्यालय रुकनापुर में छात्र-छात्राओं के बैठने के लिए डेस्क बेंच की कोई व्यवस्था नहीं है। पसगवां ब्लॉक मुख्यालय स्थित प्राथमिक विद्यालय में भी बच्चों को बेंच और डेस्क नसीब नहीं हुई है। प्रधानाध्यापक नरेंद्र श्रीवास्तव का कहना है कि विद्यालय में 160 बच्चे पंजीकृत हैं। बेंच-डेस्क न होने से जमीन पर बैठना पड़ता है। मितौली ब्लॉक के 150 प्राथमिक विद्यालयों में फर्नीचर नहीं है। लगभग 20 प्राथमिक विद्यालयों में डेस्क है लेकिन कुर्सी नहीं।
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रमियाबेहड़ ब्लॉक क्षेत्र में संचालित 183 विद्यालयों में प्राथमिक विद्यालय 106, उच्च प्राथमिक विद्यालय 22 और संविलियन विद्यालय 55 हैं। कुछ उच्च प्राथमिक विद्यालयों में डेस्क-बेंच की व्यवस्था है लेकिन प्राथमिक विद्यालय में बच्चे टाट-पट्टी पर ही बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। स्कूलों में पेयजल की व्यवस्था तक नहीं है।
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तीन कमराें में दो स्कूलों के बच्चे बैठ रहे
गोला गोकर्णनाथ। नगर में बेसिक शिक्षा विभाग के प्राथमिक विद्यालयों का संचालन तीन अध्यापकों और पांच शिक्षामित्रों के कंधों पर टिका है। मोहल्ला तीर्थ स्थित जवाहर प्राथमिक विद्यालय खंडहर में तब्दील हो गया है। इसे पास के लोने सिंह संविलियन विद्यालय के कमरे में शिफ्ट किया है। लोने सिंह विद्यालय के पांच कमरों में दो कमरे जर्जर हैं, जिन्हें बंद कर दिया है। शेष तीन कमरों में एक में जवाहर प्राथमिक के बच्चे और दो कमरों में लोने सिंह विद्यालय के बच्चे बैठ रहे हैं। संवाद

जमीन पर टाट बिछाकर बैठते हैं बच्चे, कक्ष भी जर्जर
बिजुआ। प्राथमिक विद्यालय तिखड़ा में बच्चों के बैठने के लिए बेंच डेस्क की सुविधा उपलब्ध नहीं है। बच्चे जमीन पर टाट बिछाकर बैठते हैं। दो कक्ष जर्जर हालत में हैं, जो किसी भी समय गिर सकते हैं। शौचालय के पीछे की दीवार ग्रामीणों ने तोड़ डाली है। पेयजल का सहारा हैंडपंप ही है। यहां 167 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। प्राथमिक विद्यालय मुड़िया हेमसिंह में चार कक्ष जर्जर हालत में है, लिंटर चटक गया है। संवाद
यहां व्यवस्थाएं दुरुस्त मिलीं
मोहम्मदी। मियांपुर कॉलोनी संविलियन विद्यालय में बच्चों के फर्नीचर पर बैठने की व्यवस्था है। यहां दिव्यांग बच्चों के लिए अलग से शौचालय की व्यवस्था है। स्कूल में पेयजल के लिए सबमर्सिबल की व्यवस्था है। पलिया संविलयन विद्यालय के टीचर सुखदेव मिश्रा ने बताया कि सभी बच्चे फर्नीचर पर बैठते हैं।

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जहां-जहां भी बच्चों के बैठने के लिए फर्नीचर नहीं है, शासन को डिमांड भेजी गई है। जल्द ही फर्नीचर उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अलावा पेयजल व शौचालय की दिक्कतों को भी दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रवीण कुमार तिवारी, बीएसए

गोला के स्कूल में जमीन पर बैठकर शिक्षा ग्रहण करते बच्चे-संवाद

गोला के स्कूल में जमीन पर बैठकर शिक्षा ग्रहण करते बच्चे-संवाद

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