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Lakhimpur Kheri News: 22 साल पुराने मामले में पूर्व विधायक सहित राजनीतिक हस्तियां बरी

Fri, 24 Mar 2023 12:49 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Updated Fri, 24 Mar 2023 12:49 AM IST
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Political personalities including ex-MLA acquitted in 22-year-old case
लखीमपुर खीरी। धरना-प्रदर्शन से लौटते हुए भाजपा कार्यकर्ता को गोली मारने के 22 साल पुराने मामले में एडीजे रामेंद्र कुमार ने पूर्व विधायक समेत अन्य आरोपियों को बरी कर दिया है। दूसरी ओर से दर्ज कराए गए नो इंजरी क्रॉस केस मामले में भी आरोपियों को बरी किया गया है।
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9 अगस्त 2001 को समाजवादी पार्टी की ओर से विधायक अरविंद गिरि गोला कस्बे में आयोजित धरना प्रदर्शन के बाद अपने समर्थकों के साथ लौट रहे थे। तभी किसी ने जानकारी दी कि वर्मा मार्केट के पास कुछ दंगाई प्रदर्शनकारियों की गाड़ी से झंडे नोच रहे हैं। जब अरविंद गिरि अपने साथियों के साथ मौके पर पहुंचे तो फायरिंग शुरू हो गई। इसमें भाजपा कार्यकर्ता वीरेंद्र गुप्त को गोली लगी थी।
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दूसरे पक्ष की ओर से अरविंद गिरि ने भाजपा से जुड़े रामअवतार वर्मा, विनय तिवारी, मनोज श्रीवास्तव, अरुण अवस्थी और वीरेंद्र गुप्त के खिलाफ क्रॉस केस दर्ज कराया था, जबकि वीरेंद्र गुप्ता की ओर से दर्ज कराई गई जानलेवा हमले की रिपोर्ट में अजय गिरी, धर्मेंद्र गिरी मोंटी, विश्वनाथ सिंह, विनय सिंह और अरविंद गिरी के भतीजे कन्हैया गिरी को आरोपी बनाया गया था।
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पुलिस ने जांच के बाद अजय गिरि सहित पांचों आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। घायल वीरेंद्र गुप्त के बयान के आधार पर अरविंद गिरि को भी जानलेवा हमले का अभियुक्त पाते हुए अदालत ने समन जारी किया था लेकिन जमानत प्रक्रिया से पहले ही इसी दौरान अरविंद गिरि की मृत्यु हो गई थी। क्रॉस केस दर्ज कराने वाले आरोपी राम अवतार वर्मा की भी मौत हो चुकी है, जबकि वीरेंद्र गुप्ता के खिलाफ लंबित मामले पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी।
अदालती सुनवाई के दौरान धर्मेंद्र गिरि, अजय गिरि, जनार्दन गिरि तो अपने बयानों पर कायम रहे लेकिन विनय सिंह को अभियोजन ने पक्षद्रोही घोषित किया था। चोटिल वीरेंद्र गुप्त ने विधायक अरविंद गिरि सहित सभी हमलावरों को दोषी बताते हुए बयान दर्ज कराए थे। अन्य गवाहों ने पुलिस को दिए गए बयानों से अदालत में पल्ला झाड़ लिया था। दोनों ओर से दर्ज कराए गए क्रॉस केस मामले में 22 साल तक चले मुकदमे के बाद गुरुवार को एडीजे अदालत ने दोनों पक्षों के आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का फैसला सुनाया है।


22 साल बाद बदली शतरंज की बिसात
9 अगस्त 2001 के धरना-प्रदर्शन के दौरान सूबे में भाजपा की सरकार थी तो अरविंद गिरी समाजवादी पार्टी से हैदराबाद के विधायक थे। वही दूसरे पक्ष के विनय तिवारी, अरुण अवस्थी, वीरेंद्र गुप्ता, रामअवतार वर्मा वरिष्ठ भाजपा कार्यकर्ता थे। यही कारण था कि घायल वीरेंद्र गुप्त को देखने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह भी मेडिकल कॉलेज गए थे और पूरे इलाज की देखरेख भी की गई थी। 22 साल के लंबे अंतराल के बाद आज की तस्वीर ठीक उलट गई है। विनय तिवारी समाजवादी पार्टी के झंडे तले हैं, तो दूसरे पक्ष ने भाजपा की बागडोर थाम रखी है।
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