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रेल बजट में लखीमपुर के लोग निराश

Thu, 25 Feb 2016 08:09 PM IST
लखीमपुर खीरी।
लखीमपुर खीरी। Updated Thu, 25 Feb 2016 08:09 PM IST
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People disappointed in budget Lakhimpur
वर्ष 2016 के रेल बजट से जिले के आम आदमी से लेकर व्यापारियों तक को तमाम उम्मीदें थीं। जिले की मौजूदा स्थितियों को देखते हुए जिले में कई जगहों पर छोटी लाइन के अमान परिवर्तन और ऐशबाग-पीलीभीत के बीच हो रहे ब्राडगेज का कार्य जल्द पूरा होने संबंधी किसी घोषणा का इंतजार था, लेकिन रेलमंत्री के बजट में पूर्व से संचालित योजनाओं के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया है। खासकर जिले को कुछ खास न मिलने पर व्यापारी वर्ग काफी निराश है। व्यापारियों का कहना है कि आम जनता और व्यापारी जनप्रतिनिधियों तक अपनी मांग पहुंचाते रहते हैं, ये जनप्रतिनिधियों पर निर्भर करता है कि वह हमारी बातों को उचित जगह पर पहुंचाते हैं या नहीं। जिले में चार सांसद हैं, लेकिन रेल बजट देखने के बाद व्यापारियों को निराशा ही हुई है। क्योंकि रेल बजट में उनकी एक भी उम्मीदे पूरी नहीं हुई है।
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मालगोदाम का न बनना व्यापार चौपट करने जैसा
लखीमपुर में मालगोदाम की स्थापना न होना एक तरह से व्यापार को चौपट करने जैसा है। व्यापारियों को उम्मीद थी कि यहां मालगोदाम बनवाया जाएगा। वहीं बड़ी लाइन के निर्माण का कार्य वर्ष 2016 में पूरा करने का लक्ष्य था, लेकिन अब इसे भी वर्ष 2017 तक पूरा करने की बात कही जा रही है।
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-प्रेमशंकर अग्रवाल, व्यापारी/समाजसेवी

हम अभी भी मुख्य धारा से कोसों दूर  
हमारी सबसे पहली जरूरत बड़ी रेल लाइन के निर्माण की रफ्तार बढ़ाने की थी, इसके बाद ही हम मुख्य धारा से जुड़ सकते थे, लेकिन रेल बजट में पूर्व में शुरू हुए काम की रफ्तार बढ़ाने संबंधी कोई जिक्र नहीं किया गया है। यात्री किराया और माल भाड़ा पहले से ही बढ़ा था। रेल बजट में किराया न बढ़ने से थोड़ी राहत मिली है।
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-अशोक गुप्ता, जिला महामंत्री व्यापार मंडल कंछल गुट

रेल बजट में छोटे शहरों की हुई अनदेखी  
रेल बजट में जो भी घोषणाएं हुई हैं, वह बड़े शहरों के लिए है। छोटे शहरों के रेलवे स्टेशनों को विकसित करने या सुविधाएं बढ़ाने जैसी कोई विशेष घोषणा नहीं की गई है। रेल बजट से व्यापार को बढ़ावा देने वाली बातें गायब हैं। यहां ब्राडगेज का निर्माण कार्य धीमी गति से चल रहा है। उसे भी तेज करने की जरूरत थी।
-श्रवण अग्रवाल, दाल व्यापारी

जिले के लोगों के साथ हुआ धोखा
रेल बजट में जिले के आम लोगों और व्यापारियों की उम्मीदों की अनदेखी हुई है। हमारे जनप्रतिनिधियों की यह जिम्मेदारी होती है कि वह लोगों की समस्याओं को उठाएं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और जिलेवासी रेल बजट से होने वाले लाभ से वंचित रह गए।
-राकेश मिश्रा, जिलाध्यक्ष व्यापार मंडल मिश्रा गुट

रेल बजट पर क्या कहते हैं प्रबुद्ध लोग और युवा
किसी के लिए हितकर नहीं है बजट
गोला गोकर्णनाथ के युवा अरुण अवस्थी कहते हैं कि रेल बजट में लखीमपुर को कुछ खास नहीं मिला। बजट किसान, व्यापारी, छात्र, बुजुर्गों के लिए हितकर नहीं है। आदर्श रेलवे स्टेशन जैसे उम्मीदें हर बार धरी रह जाती हैं। यात्री अभी भी ट्रेन में धक्के खाने को मजबूर हैं।

ब्राडगेज निर्माण को गति मिलने की धरी रह गई उम्मीद
समाजसेवी वरुण अग्रवाल का कहना है कि रेल बजट से ब्राडगेज निर्माण के कार्य को गति मिलने की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया है। बजट को लोकलुभावना बनाने की कोशिश मात्र की है। इससे यात्रियों को भला होने वाला नहीं है। बजट में जिले को कुछ न मिलने से निराश होना पड़ा है।

अर्थव्यवस्था सुधारने के लिए किया गया प्रयास
युवा विजय शुक्ला रिंकू कहते हैं कि ट्रेनों में सफर करना असुरक्षित है। इस बार के बजट में इसका ख्याल रखा गया है। साथ ही अर्थव्यवस्था सुधारने के लिए भी बजट में प्रयास है। इससे रेलवे में सुधार होगा और यात्रियों को लाभ मिलेगा।

जनप्रतिनिधियों ने बताया बाजीगरी का नमूना
लखीमपुर खीरी। अपने जिले को रेल बजट में कुछ खास न मिलने पर जनप्रतिनिधियों ने बजट को बाजीगरी का नमूना और बेहद निराशाजनक बताया है। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि रेल बजट से जिले वासियों की उम्मीदों को ठेस पहुंची है।

लखीमपुर को मिली निराशा
रेल बजट पूरी तरह निराशाजनक है। लखीमपुर को रेल बजट में कुछ खास नहीं दिया गया है। एक साल पहले हुईं घोषणाएं भी पूरी नहीं हुई हैं। रेल बजट से लोगों की उम्मीदों को ठेस लगी है।
-उत्कर्ष वर्मा, विधायक-सदर

छात्र, किसान विरोधी है बजट
रेल बजट पूरी तरह से छात्र और किसान विरोधी है। ब्राडगेज के निर्माण में भी कोई तेजी आने वाली नहीं है। इसके अलावा कम बोगियां, असुरक्षा, सुविधाओं को बढ़ाने के नाम पर भी जिले को कुछ नहीं मिला है। रेल बजट ने सबकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
-विनय तिवारी, विधायक-गोला गोकर्णनाथ।

सुरक्षा की दृष्टि से कुछ खास नहीं
दुधवा नेशनल पार्क और गोला के शिव मंदिर के कारण अपना जिला पर्यटन की दृष्टि से भी खास है। ऐसे में बजट में जिले को कुछ भी न मिलने से महत्वपूर्ण जिले की उपेक्षा की गई है, जो अत्यंत निराशाजनक है। सुरक्षा की दृष्टि से भी कुछ खास नहीं हुआ, जो यात्रियों के साथ धोखा है।
-रोमी साहनी, विधायक-पलियाकलां।

क्या कहते हैं राजनीतिक दलों के अध्यक्ष

जिले और प्रदेश के लिए निराशाजनक बजट
रेल बजट में न तो प्रदेश को और न ही जिले को कुछ खास मिला है। चूंकि अगले वर्ष प्रदेश में चुनाव है, फिरभी उत्तर प्रदेश को कुछ खास न दिया जाना जिला और प्रदेश वासियों के लिए निराशाजनक है। इससे हर वर्ग निराश हुआ है। बजट में किसी भी वर्ग के लिए कोई खास चीज नहीं है।
-अनुराग पटेल, जिलाध्यक्ष-सपा

जिले के विकास पर जारी रहेगा दुष्प्रभाव
रेल मंत्री ने बजट में जो व्यवस्थाएं की हैं, उससे देश की 80 प्रतिशत से अधिक गरीब जनता को कोई लाभ नहीं होगा। अपने जिले को रेल बजट में कुछ नहीं मिलना निराशाजनक है। इससे जिले के विकास पर पड़ रहा दुष्प्रभाव जारी रहेगा।
-राघवेन्द्र बहादुर सिंह, जिलाध्यक्ष-कांग्रेस

रेल बजट से पूरी नहीं हुई आस
रेल बजट से प्रतीत होता है कि केन्द्र सरकार ने उत्तर प्रदेश के लिए कुछ नहीं सोंचा। जिले के लोगों की आस भी कुछ खास पूरी नहीं हुई। इससे किसी भी प्रकार से यह बजट किसी भी वर्ग के लिए हितकर नहीं है।
-अजय चौधरी, जिलाध्यक्ष-बसपा

इससे बेहतर बजट हो ही नहीं सकता
रेल बजट बहुत बेहतर तरीके से तैयार किया गया है। 2012 तक के रेल बजट को देखा जाए तो इस बार यात्रियों की सुख सुविधाओं और उनकी जेब का पूरा ख्याल रखा गया है। किराए में वृद्धि न होने से आम आदमी खुश हुआ है। इससे बेहतर बजट हो ही नहीं सकता।
-शरद वाजपेयी, जिलाध्यक्ष- भाजपा
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क्या कहती हैं गृहणियां
बजट में महिलाओं का कुछ ध्यान रखा
वैसे तो हर रेल बजट में सभी के लिए कुछ न कुछ होता है। लेकिन इस बार महिलाओं को लेकर खास फोकस किया गया है। हर श्रेणी में 30 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का रेलमंत्री का निर्णय सराहनीय है।
-पूनम मिश्रा, गृहणी

महिलाओं की सुरक्षा पर ध्यान दिया
इस बार रेल बजट में महिलाओं की सुरक्षा पर ध्यान दिया गया है। 182 नंबर की नई हेल्पलाइन महिलाओं के लिए 24 घंटे की सेवा प्रदान की गई है, जो काफी सराहनीय पहल है। इससे ट्रेनों में होने वाली घटनाओं पर रोक लगेगी।
-मंजू त्यागी, गृहणी

ट्रेनों में महिला सुरक्षाकर्मी का प्रावधान नहीं
रेल बजट में महिलाओं के लिए कोई खास घोषणा नहीं की गई है। जिस तरह से घटनाएं बढ़ रही हैं, इसके मद्देनजर ट्रेनों में महिला सुरक्षाकर्मियों को भी तैनात किया जाना चाहिए था। लेकिन ऐसा न होने से सुरक्षा को लेकर सवाल बना हुआ है।

-निमिषा अग्रवाल, गृहणी

महिलाओं को सीटें आरक्षित करना सराहनीय कदम
ट्रेनों में अक्सर भीड़ होने के कारण महिलाओं को खड़े होकर सफर करना पड़ता था, लेकिन हर श्रेणी की ट्रेन में 30 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का निर्णय सराहनीय कदम है। महिलाओं के लिए अभी और सुविधाएं देने की जरूरत है।
-प्रियंका गुप्ता, गृहणी
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