Lakhimpur Kheri: जिला अस्पताल में स्ट्रेचर नहीं... मरीजों को गोद में उठाकर ले जाने को मजबूर तीमारदार
जिले में मेडिकल कॉलेज का निर्माण चल रहा है। ऐसे में जिला अस्पताल को मोतीपुर स्थित 200 बेड की एमसीएच विंग में शिफ्ट कर दिया गया है, लेकिन यहां भी सुविधाओं का अभाव है।
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लखीमपुर खीरी के मोतीपुर स्थित एमसीएच विंग में संचालित जिला अस्पताल की बदहाल व्यवस्थाएं मरीजों की तकलीफ बढ़ा रही हैं। आलम यह है कि अस्पताल में आने वाले मरीजों को स्ट्रेचर एवं व्हीलचेयर तक नसीब नहीं हो पा रही है। ऐसे में तीमारदार मरीज को गोद में उठाकर वार्ड या ओपीडी में ले जा रहे हैं।
जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या दिन पर दिन बढ़ रही है। बेहतर सुविधाएं और इलाज की आस लेकर पहुंचने वाले मरीज अस्पताल में अव्यवस्थाओं के कारण परेशान हो रहे हैं। मरीज से लेकर तीमारदारों को मुसीबत उठानी पड़ती है। इसका कारण जिला अस्पताल में संसाधनों का अभाव है।
एमसीएच विंग में शिफ्ट किया गया है जिला अस्पताल
जिले में मेडिकल कॉलेज का निर्माण चल रहा है। ऐसे में जिला अस्पताल को मोतीपुर स्थित 200 बेड की एमसीएच विंग में शिफ्ट कर दिया गया है। करोड़ों की लागत से बने इस भवन में अस्पताल शिफ्ट होने से लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद जागी थी, लेकिन जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते मरीजों को मूलभूत सुविधाएं तो दूर उन्हें पर्याप्त संख्या में स्ट्रेचर तक नहीं मिल पा रहे हैं।
स्ट्रेचर न मिलने के कारण गोद में ही लेकर बनवाया पर्चा
80 वर्षीय मुन्नी को सांस लेने में दिक्कत होने पर घर के लोग अस्पताल लेकर पहुंचे। जैसे तैसे अंदर ले जाकर ओपीडी में दिखाया। दवा दिलाने के बाद काफी देर तक स्ट्रेचर तलाशते रहे, जब वह नहीं मिली तो घर के लोग उन्हें गोद में उठाकर बाहर लाए। वहीं 65 वर्षीय जैदेई के कमर में दिक्क्त होने पर घरवाले जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। स्ट्रेचर के अभाव में पुत्र और पोता गोद में उठाकर बाहर लेकर आए और फिर घर गए।रोजाना आते हैं 60 से 70 गंभीर मरीज
जिला अस्पताल में जिलेभर के अलावा सीतापुर तक के मरीज आते हैं। ऐसे में जिला अस्पताल में सामान्य दिन में करीब 15000 नए पर्चे बनते हैं। इसमें करीब 60 से 70 मरीज 70 साल से अधिक उम्र के होते हैं। इनके लिए अस्पताल में स्ट्रेचर की कमी का होना एक बड़ी समस्या बना हुआ है।
हेल्प डेस्क पर एक व्हीलचेयर मरीजों के लिए नाकाफी
जिला अस्पताल में हेल्प डेस्क है। इसमें दो कर्मचारी तैनात हैं। अस्पताल प्रशासन की ओर से हेल्प डेस्क को एक व्हीलचेयर दी गई है। जो मरीजों की संख्या को देखते हुए नाकाफी है, क्योंकि जिला अस्पताल में रोजाना 60 से 70 बुजुर्ग मरीज आते हैं।
यदि एक तीमारदार व्हीलचेयर लेकर चला जाए तो दूसरे को कम से कम एक घंटे तक इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में बुजुर्ग को लेकर अस्पताल पहुंचे अन्य तीमारदारों के सामने बुजुर्ग को गोद में ही लेकर जाने का विकल्प रहता है। ऐसी ही स्थिति वार्डों की भी है। हेल्प डेस्क से लेकर वार्डों में मौजूद एक स्ट्रेचर मरीजों के लिए नाकाफी रहती है।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. हर्षवर्धन ने बताया कि हेल्प डेस्क में व्हीलचेयर मौजूद है। इसके अलावा इमरजेंसी ओपीडी से लेकर प्रत्येक वार्ड में व्हीलचेयर एवं स्ट्रेचर मौजूद हैं। तीमारदारों को हेल्प डेस्क पर जाकर व्हीलचेयर की मांग करनी चाहिए। मरीजों को बेहतर सुविधा दिलाने के लिए इनकी संख्या बढ़ाई जाएगी।