{"_id":"614b7dcf8ebc3efcb27519c9","slug":"pathology-machine-bad-liver-kidney-patient-wandering-lakhimpur-news-bly460446087","type":"story","status":"publish","title_hn":"पैथालॉजी की मशीन खराब, भटक रहे लिवर-किडनी की मरीज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पैथालॉजी की मशीन खराब, भटक रहे लिवर-किडनी की मरीज
विज्ञापन
अस्पताल में लगी मरीजों की लाइन।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
लखीमपुर खीरी। संक्रामक बीमारियों के पांव पसारने के बीच जिला अस्पताल की पैथालॉजी की स्पेक्ट्रा (फुली ऑटोमेटिक बॉयोकेमेस्ट्री एनालाइजर) मशीन खराब हो गई है, जिससे तमाम जरूरी जांचें नहीं हो पा रही हैं। मरीजों की मुश्किलें बढ़ने लगी हैं।
जिला अस्पताल की पैथालॉजी में करीब तीन साल पहले निजी कंपनी साइरेक्स की ओर से जांच मशीनें लगवाई गई थीं। खराब होने पर संस्था को ही बनवाने का अनुबंध था। मशीनें पुराने होने पर अक्सर खराब रहने लगी है। मगर, संस्था के लोग इसे बनवाने पर ध्यान नहीं दे रहे हैं, जिस कारण पिछले करीब एक सप्ताह से किडनी, हार्ट एवं लिवर आदि की जांच नहीं हो पा रही हैं, जबकि रोजाना 40 से 50 जांचें होती थीं। मशीन खराब होने के कारण अन्य जांचों में भी समय लग रहा है। इससे पैथालॉजी से तीमारदारों को समय से जांच रिपोर्ट तक नहीं मिल रही है। इससे मरीजों के तीमारदार परेशान हो रहे हैं।
पैथालॉजी के लोगों ने बताया कि मशीनें अक्सर खराब रहने लगी हैं। कुछ दिन पहले भी एक मशीन खराब होने से मरीजों को मुसीबत उठानी पड़ी थी। अस्पताल के लोगों का कहना है कि मशीन खराब होने पर 24 घंटे में बननी चाहिए, लेकिन कंपनी के लोगों की उदासीनता की वजह से कई- कई दिन बनने में लग जाते हैं। इससे मरीजों को दिक्कत होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
जिला अस्पताल की पैथालॉजी में करीब तीन साल पहले निजी कंपनी साइरेक्स की ओर से जांच मशीनें लगवाई गई थीं। खराब होने पर संस्था को ही बनवाने का अनुबंध था। मशीनें पुराने होने पर अक्सर खराब रहने लगी है। मगर, संस्था के लोग इसे बनवाने पर ध्यान नहीं दे रहे हैं, जिस कारण पिछले करीब एक सप्ताह से किडनी, हार्ट एवं लिवर आदि की जांच नहीं हो पा रही हैं, जबकि रोजाना 40 से 50 जांचें होती थीं। मशीन खराब होने के कारण अन्य जांचों में भी समय लग रहा है। इससे पैथालॉजी से तीमारदारों को समय से जांच रिपोर्ट तक नहीं मिल रही है। इससे मरीजों के तीमारदार परेशान हो रहे हैं।
विज्ञापन
पैथालॉजी के लोगों ने बताया कि मशीनें अक्सर खराब रहने लगी हैं। कुछ दिन पहले भी एक मशीन खराब होने से मरीजों को मुसीबत उठानी पड़ी थी। अस्पताल के लोगों का कहना है कि मशीन खराब होने पर 24 घंटे में बननी चाहिए, लेकिन कंपनी के लोगों की उदासीनता की वजह से कई- कई दिन बनने में लग जाते हैं। इससे मरीजों को दिक्कत होती है।
विज्ञापन
कंपनी के लोगों को मशीन खराब होने की जानकारी दे दी गई है। एक दो दिन में एक्सपर्ट भेजकर बनाने की बात कही है। यदि अगले एक दो दिन में मशीन नहीं बनी तो उच्चाधिकारियों का अवगत कराया जाएगा। - डॉ. सीएस सिंह, प्रभारी सीएमएस, जिला अस्प्ताल