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बजट खपाने की कवायद में जुटे रहे अधिकारी व कर्मचारी
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बैंक में काम निबटाते कर्मचारी।
वरिष्ठ कोषाधिकारी बोले, रात 12 बजे तक चला है लेन-देन होगा, आज पता चलेगी फाइनल स्थिति
लखीमपुर खीरी। वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन बृहस्पतिवार यानी 31 मार्च को सभी विभागों में बजट को ठिकाने लगाने के लिए अधिकारी व कर्मचारी सिर खपाते दिखे। कुछ विभागों को 24 घंटे पहले बजट मिला, जिसे कुछ घंटे के अंदर ही खर्च करने की रणनीति बनाने में अधिकारी जुटे रहे। हालांकि विधानसभा चुनाव के चलते आखिरी तिमाही में विभागों को बजट नहीं मिलने से विभागों के पास ज्यादा अवशेष धनराशि नहीं बची थी।
जिला योजना से 2021-22 में जनपद में कुल 591.82 करोड़ रुपये परिव्यय निर्धारित था, जिसके सापेक्ष फरवरी तक 22 विभागों को 378.94 करोड़ रुपये मिले थे। मार्च में चुनाव व नई सरकार के गठन के चलते विभागों को बजट नहीं मिल पाया था। इससे विभागों के पास मार्च में कुल प्राप्त बजट के सापेक्ष एक प्रतिशत बजट ही अवशेष था, जिसे खपाने के लिए सीडीओ ने एक सप्ताह पहले ही विभागों को निर्देश जारी किए थे।
डीएसटीओ राजेश सिंह ने बताया कि वित्त वर्ष में स्वीकृत कुल परिव्यय के सापेक्ष कृषि विभाग को 13.03 लाख, गन्ना विभाग को 480.95 लाख, पशुपालन विभाग को 114.48 लाख, दुग्ध विकास को 105.32 लाख, वन विभाग को 542.72 लाख, रोजगार कार्यक्रम (ग्राम्य विकास) को 20954.25 लाख, पंचायती राज को 52.38 लाख, लघु सिंचाई विभाग को 381.28 लाख, राजकीय लघु सिंचाई को 31.48 लाख, खादी एवं ग्रामोद्योग को 4.94 लाख, सड़क एवं पुल निर्माण के लिए 236.82 लाख, पर्यावरण के लिए 1.11 लाख, माध्यमिक शिक्षा के लिए 721.87 लाख, प्रादेशिक विकास दल को 4.10 लाख, ग्रामीण आवास के लिए 13055.60 लाख, अनुसूचित जाति कल्याण के लिए 579.60 लाख, पिछड़ी जाति कल्याण के लिए 280 लाख, अल्पसंख्यक कल्याण के लिए 141.38 लाख, सेवा योजना के लिए 1.21 लाख, शिल्पकार प्रशिक्षण के लिए 99.28 लाख, समाज कल्याण विभाग को 20 लाख, दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग को 91.80 लाख रुपये मिले थे, जबकि 24 विभागों को बजट नहीं मिला था। वहीं समस्त कार्यदाई संस्थाओं को भी 31 मार्च तक समस्त शेष धनराशि का आहरण करने के निर्देश दिए गए थे।
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मार्च क्लोजिंग के चलते कुछ विभागों को शासन से बजट जारी किया गया, जिसमें बृहस्पतिवार को बेसिक शिक्षा विभाग को 10 लाख रुपये स्कूलों में बर्तन खरीदने के लिए मिले हैं। वहीं पंचायती राज विभाग को 5.50 लाख रुपये चिकित्सा प्रतिपूर्ति के लिए मिले हैं। उधर, वरिष्ठ कोषाधिकारी आनंद कुमार ने बताया कि रात 12 बजे तक लेन देन होगा, जिससे शुक्रवार को ही बजट के बारे में फाइनल स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
बैंक, बीमा कर्मी दिन भर उलझे रहे हिसाब किताब में
लखीमपुर खीरी। वित्तीय वर्ष के अतिम दिन 31 मार्च को बैंकों, बीमा कार्यालयों और डाकघरों में कर्मचारी पूरे दिन माथा पच्ची करते दिखे। बैंकों में बृहस्पतिवार को आमतौर से धन की जमा निकासी बंद रही, लेकिन सरकारी विभागों के लेन-देन जारी रहे। खासकर स्टेट बैंक की मुख्य शाखा में भीड़-भाड़ रोज की अपेक्षा काफी कम दिखी, लेकिन सभी कर्मचारी व्यस्त दिखाई दिए। भारतीय जीवन बीमा कार्यालय पर रोज से ज्यादा भीड़ दिखी।
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लखीमपुर खीरी। वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन बृहस्पतिवार यानी 31 मार्च को सभी विभागों में बजट को ठिकाने लगाने के लिए अधिकारी व कर्मचारी सिर खपाते दिखे। कुछ विभागों को 24 घंटे पहले बजट मिला, जिसे कुछ घंटे के अंदर ही खर्च करने की रणनीति बनाने में अधिकारी जुटे रहे। हालांकि विधानसभा चुनाव के चलते आखिरी तिमाही में विभागों को बजट नहीं मिलने से विभागों के पास ज्यादा अवशेष धनराशि नहीं बची थी।
जिला योजना से 2021-22 में जनपद में कुल 591.82 करोड़ रुपये परिव्यय निर्धारित था, जिसके सापेक्ष फरवरी तक 22 विभागों को 378.94 करोड़ रुपये मिले थे। मार्च में चुनाव व नई सरकार के गठन के चलते विभागों को बजट नहीं मिल पाया था। इससे विभागों के पास मार्च में कुल प्राप्त बजट के सापेक्ष एक प्रतिशत बजट ही अवशेष था, जिसे खपाने के लिए सीडीओ ने एक सप्ताह पहले ही विभागों को निर्देश जारी किए थे।
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डीएसटीओ राजेश सिंह ने बताया कि वित्त वर्ष में स्वीकृत कुल परिव्यय के सापेक्ष कृषि विभाग को 13.03 लाख, गन्ना विभाग को 480.95 लाख, पशुपालन विभाग को 114.48 लाख, दुग्ध विकास को 105.32 लाख, वन विभाग को 542.72 लाख, रोजगार कार्यक्रम (ग्राम्य विकास) को 20954.25 लाख, पंचायती राज को 52.38 लाख, लघु सिंचाई विभाग को 381.28 लाख, राजकीय लघु सिंचाई को 31.48 लाख, खादी एवं ग्रामोद्योग को 4.94 लाख, सड़क एवं पुल निर्माण के लिए 236.82 लाख, पर्यावरण के लिए 1.11 लाख, माध्यमिक शिक्षा के लिए 721.87 लाख, प्रादेशिक विकास दल को 4.10 लाख, ग्रामीण आवास के लिए 13055.60 लाख, अनुसूचित जाति कल्याण के लिए 579.60 लाख, पिछड़ी जाति कल्याण के लिए 280 लाख, अल्पसंख्यक कल्याण के लिए 141.38 लाख, सेवा योजना के लिए 1.21 लाख, शिल्पकार प्रशिक्षण के लिए 99.28 लाख, समाज कल्याण विभाग को 20 लाख, दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग को 91.80 लाख रुपये मिले थे, जबकि 24 विभागों को बजट नहीं मिला था। वहीं समस्त कार्यदाई संस्थाओं को भी 31 मार्च तक समस्त शेष धनराशि का आहरण करने के निर्देश दिए गए थे।
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मार्च क्लोजिंग के चलते कुछ विभागों को शासन से बजट जारी किया गया, जिसमें बृहस्पतिवार को बेसिक शिक्षा विभाग को 10 लाख रुपये स्कूलों में बर्तन खरीदने के लिए मिले हैं। वहीं पंचायती राज विभाग को 5.50 लाख रुपये चिकित्सा प्रतिपूर्ति के लिए मिले हैं। उधर, वरिष्ठ कोषाधिकारी आनंद कुमार ने बताया कि रात 12 बजे तक लेन देन होगा, जिससे शुक्रवार को ही बजट के बारे में फाइनल स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
बैंक, बीमा कर्मी दिन भर उलझे रहे हिसाब किताब में
लखीमपुर खीरी। वित्तीय वर्ष के अतिम दिन 31 मार्च को बैंकों, बीमा कार्यालयों और डाकघरों में कर्मचारी पूरे दिन माथा पच्ची करते दिखे। बैंकों में बृहस्पतिवार को आमतौर से धन की जमा निकासी बंद रही, लेकिन सरकारी विभागों के लेन-देन जारी रहे। खासकर स्टेट बैंक की मुख्य शाखा में भीड़-भाड़ रोज की अपेक्षा काफी कम दिखी, लेकिन सभी कर्मचारी व्यस्त दिखाई दिए। भारतीय जीवन बीमा कार्यालय पर रोज से ज्यादा भीड़ दिखी।