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Lakhimpur Kheri News: अब मोबाइल फोन पर मिलेगी गांव की पानी व्यवस्था की पूरी जानकारी
Thu, 27 Aug 2026 11:02 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Thu, 27 Aug 2026 11:02 PM IST
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लखीमपुर खीरी। गांव में पानी की टंकी बनी है, लेकिन पानी कब आता है और उसकी गुणवत्ता कैसी है, इसकी जानकारी अब मोबाइल फोन पर मिल सकेगी। जल सारथी एप के जरिए ग्रामीण पेयजल व्यवस्था से जुड़ी जानकारी घर बैठे देख सकेंगे। इसके लिए मोबाइल में एप डाउनलोड करना होगा।
एप पर पानी की टंकी के निर्माण से लेकर वर्तमान पेयजलापूर्ति तक की जानकारी मिलेगी। इसमें योजना की लागत, निर्माण शुरू होने की तिथि, काम पूरा होने की स्थिति, निर्माण करने वाली संस्था और जांच संबंधी जानकारी देखी जा सकती है। गांव में रोज कितने घंटे पानी आता है और जांच से जुड़े कर्मचारियों की जानकारी भी मिलेगी।
पेयजलापूर्ति बंद होने, पानी का दबाव कम होने या अन्य तकनीकी समस्या की शिकायत भी एप के माध्यम से दर्ज की जा सकेगी। जिले में 1127 गांवों में पेयजलापूर्ति की जा रही है। इनमें 634 गांवों में ओवरहेड टैंक से पानी पहुंचाया जा रहा है। अन्य गांवों में डायरेक्ट सप्लाई की व्यवस्था है। ओवरहेड टैंक निर्माण, पाइपलाइन बिछाने और पेयजलापूर्ति की जिम्मेदारी बीटीएल और एनसीसी संस्थाओं को दी गई है।
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एप के लिए ग्रामीणों को किया जा रहा प्रेरित
जल निगम ग्रामीण की ओर से गांव-गांव में जल अर्पण और जन चौपाल का आयोजन कराया जा रहा है। ग्रामीणों को जल सारथी एप की जानकारी दी जा रही है, ताकि पानी से संबंधित जानकारी घर बैठे मिल सके। ग्रामीणों से एक-एक बूंद पानी बचाने की अपील भी की जा रही है।
जल निगम के अधिशासी अभियंता मनोज मौर्य ने शुद्ध पेयजल का दुरुपयोग न करने की अपील की। उन्होंने कहा कि इससे वाहनों की धुलाई न करें और न ही पशुओं को नहलाने में इस्तेमाल करें। पानी की टंकियों और नलों को खुला न छोड़ें। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों की पानी से जुड़ी समस्याएं भी सुनी जा रही हैं। उन्हें जेई और एई के नंबर भी दिए जा रहे हैं।
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एप पर पानी की टंकी के निर्माण से लेकर वर्तमान पेयजलापूर्ति तक की जानकारी मिलेगी। इसमें योजना की लागत, निर्माण शुरू होने की तिथि, काम पूरा होने की स्थिति, निर्माण करने वाली संस्था और जांच संबंधी जानकारी देखी जा सकती है। गांव में रोज कितने घंटे पानी आता है और जांच से जुड़े कर्मचारियों की जानकारी भी मिलेगी।
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पेयजलापूर्ति बंद होने, पानी का दबाव कम होने या अन्य तकनीकी समस्या की शिकायत भी एप के माध्यम से दर्ज की जा सकेगी। जिले में 1127 गांवों में पेयजलापूर्ति की जा रही है। इनमें 634 गांवों में ओवरहेड टैंक से पानी पहुंचाया जा रहा है। अन्य गांवों में डायरेक्ट सप्लाई की व्यवस्था है। ओवरहेड टैंक निर्माण, पाइपलाइन बिछाने और पेयजलापूर्ति की जिम्मेदारी बीटीएल और एनसीसी संस्थाओं को दी गई है।
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एप के लिए ग्रामीणों को किया जा रहा प्रेरित
जल निगम ग्रामीण की ओर से गांव-गांव में जल अर्पण और जन चौपाल का आयोजन कराया जा रहा है। ग्रामीणों को जल सारथी एप की जानकारी दी जा रही है, ताकि पानी से संबंधित जानकारी घर बैठे मिल सके। ग्रामीणों से एक-एक बूंद पानी बचाने की अपील भी की जा रही है।
जल निगम के अधिशासी अभियंता मनोज मौर्य ने शुद्ध पेयजल का दुरुपयोग न करने की अपील की। उन्होंने कहा कि इससे वाहनों की धुलाई न करें और न ही पशुओं को नहलाने में इस्तेमाल करें। पानी की टंकियों और नलों को खुला न छोड़ें। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों की पानी से जुड़ी समस्याएं भी सुनी जा रही हैं। उन्हें जेई और एई के नंबर भी दिए जा रहे हैं।