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Lakhimpur Kheri News: अब नदियों में नालों का गंदा पानी नहीं, साफ पानी गिरेगा
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लखीमपुर खीरी। नगर पालिका नालों का पानी साफ करके नदी में छोड़ने की तैयारी में है। इससे पहले नालों के गंदे पानी से नदी का जल दूषित हो रहा था। बायो रेमिडिएशन के तहत गंदे पानी को ट्रीट किया जाएगा। इससे नदी साफ सुधरी होगी और जलनिकासी का रास्ता भी सुगम हो जाएगा।
शहर में नगर पालिका के छोटे-बड़े और मझोले मिलाकर करीब 52 नाले-नालियां हैं। शहर की सरकार बनने के बाद नगर पालिका चेयरमैन ने शहर को जलभराव से मुक्ति दिलाने के साथ ही सभी नालों को एक साथ जोड़ने की बात कही थी। माना जा रहा है कि नालों को एक साथ जोड़ने के बाद शहर का सारा पानी नदी में गिराया जाएगा। अभी तक पूरे शहर का पानी उल्ल नदी में गिराया जा रहा था।
लोगों का मानना था कि यदि पानी गिराना ही है तो साफ पानी गिराया जाए। जिससे नदी साफ सुथरी रहने के साथ ही लोग इस जल का विभिन्न कार्यो के लिए उपयोग भी कर सकें। इन्हीं तमाम बातों पर ध्यान देते हुए नगर पालिका की अध्यक्ष डॉ. इरा श्रीवास्तव ने बायो रेमिडिएशन तकनीक का इस्तेमाल करते हुए गंदे पानी को साफ कराकर नदी में गिराया जाएगा। इससे लोगों को भी राहत मिलेगी साथ ही नदी साफ सुथरी बनी रहेगी।
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ये है बायो रेमिडिएशन तकनीक
इस तकनीक के माध्यम से नालों के सिल्ट में एंजाइम की डोजिंग कर रिएक्शन कराया जाता है। नालों में सिल्ट को रोकने के लिए छोटे-छोटे हिस्से बनाए जाते हैं। लिक्विड फॉर्म में मौजूद एंजाइम डाले जाएंगे। रिएक्शन से सिल्ट में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ेगी। नाले में जो भी गंदगी होगी, वह लिक्विड फॉर्म में तब्दील होकर निकाल दी जाएगी।
65 लाख रुपयों से होगा कार्य
बता दें कि बायो रेमिडिएशन तकनीक का इस्तेमाल और गंदे पानी को साफ करने के लिए जिन-जिन उपकरणों का उपयोग किया जाएगा। इसको लेकर करीब 65 लाख रुपयों का खर्च आएगा। नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. इरा श्रीवास्तव ने बताया कि बायो रेमिडिएशन को लेकर टेंडर किया गया है। पहले चरण में ट्रायल किया जाएगा। माना जा रहा है कि ट्रायल शत प्रतिशत सफल होगा, जिसके बाद योजना को जमीनी स्तर पर लागू करते हुए कार्य पूरा कराया जाएगा।
अभी तक शहर का सारा गंदे पानी के साथ ही तमाम तरह का कचरा नदी में गिराया जा रहा था, जिससे नदी प्रदूषित हो रही थी। बायो रेमिडिएशन के जरिये नदी में साफ जल गिराया जाएगा। नालों को एक साथ जोड़ने और उक्त कार्य पूरा हो जाने के बाद शहर को जलभराव की स्थित से भी लोगों को निजात मिल जाएगी।
- डॉ. इरा श्रीवास्तव, नगर पालिका अध्यक्ष लखीमपुर
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शहर में नगर पालिका के छोटे-बड़े और मझोले मिलाकर करीब 52 नाले-नालियां हैं। शहर की सरकार बनने के बाद नगर पालिका चेयरमैन ने शहर को जलभराव से मुक्ति दिलाने के साथ ही सभी नालों को एक साथ जोड़ने की बात कही थी। माना जा रहा है कि नालों को एक साथ जोड़ने के बाद शहर का सारा पानी नदी में गिराया जाएगा। अभी तक पूरे शहर का पानी उल्ल नदी में गिराया जा रहा था।
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लोगों का मानना था कि यदि पानी गिराना ही है तो साफ पानी गिराया जाए। जिससे नदी साफ सुथरी रहने के साथ ही लोग इस जल का विभिन्न कार्यो के लिए उपयोग भी कर सकें। इन्हीं तमाम बातों पर ध्यान देते हुए नगर पालिका की अध्यक्ष डॉ. इरा श्रीवास्तव ने बायो रेमिडिएशन तकनीक का इस्तेमाल करते हुए गंदे पानी को साफ कराकर नदी में गिराया जाएगा। इससे लोगों को भी राहत मिलेगी साथ ही नदी साफ सुथरी बनी रहेगी।
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ये है बायो रेमिडिएशन तकनीक
इस तकनीक के माध्यम से नालों के सिल्ट में एंजाइम की डोजिंग कर रिएक्शन कराया जाता है। नालों में सिल्ट को रोकने के लिए छोटे-छोटे हिस्से बनाए जाते हैं। लिक्विड फॉर्म में मौजूद एंजाइम डाले जाएंगे। रिएक्शन से सिल्ट में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ेगी। नाले में जो भी गंदगी होगी, वह लिक्विड फॉर्म में तब्दील होकर निकाल दी जाएगी।
65 लाख रुपयों से होगा कार्य
बता दें कि बायो रेमिडिएशन तकनीक का इस्तेमाल और गंदे पानी को साफ करने के लिए जिन-जिन उपकरणों का उपयोग किया जाएगा। इसको लेकर करीब 65 लाख रुपयों का खर्च आएगा। नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. इरा श्रीवास्तव ने बताया कि बायो रेमिडिएशन को लेकर टेंडर किया गया है। पहले चरण में ट्रायल किया जाएगा। माना जा रहा है कि ट्रायल शत प्रतिशत सफल होगा, जिसके बाद योजना को जमीनी स्तर पर लागू करते हुए कार्य पूरा कराया जाएगा।
अभी तक शहर का सारा गंदे पानी के साथ ही तमाम तरह का कचरा नदी में गिराया जा रहा था, जिससे नदी प्रदूषित हो रही थी। बायो रेमिडिएशन के जरिये नदी में साफ जल गिराया जाएगा। नालों को एक साथ जोड़ने और उक्त कार्य पूरा हो जाने के बाद शहर को जलभराव की स्थित से भी लोगों को निजात मिल जाएगी।
- डॉ. इरा श्रीवास्तव, नगर पालिका अध्यक्ष लखीमपुर