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अब पानी के लिए जंगल से बाहर नहीं भटकेंगे जानवर
अमर उजाला ब्यूरो बाकेगंज।
Updated Sat, 18 Feb 2017 11:05 PM IST
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दुधवा टाइगर रिजर्व
- फोटो : अमर उजाला
दुधवा टाइगर रिजर्व ने कुलाबे खोदकर जंगल के अंदर दूर-दूर तक पहुंचाया नहर का पानी
वन विभाग ने सिंचाई विभाग का लिया सहयोग, जंगलों की बढ़ेगी हरियाली
दुधवा टाइगर रिजर्व के किशनपुर सेंक्चुरी और इसके बफर जोन में जंगली जानवरों को अब पीने के पानी के संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा। वन विभाग ने सिंचाई विभाग के सहयोग से किशनपुर सेंक्चुरी और दुधवा टाइगर रिजर्व के बफर जोन में शामिल मैलानी, भीरा रेंज समेत मड़हा बीट के जंगल से गुजरी खीरी ब्रांच नहर से कुलाबे खोद कर नहर का पानी जंगल में दूर-दूर तक पहुंचाने का इंतजाम किया है। इससे जंगलों की हरियाली भी बढ़ेगी।
आमतौर से गर्मियों के दिनों में जंगल के अंदर स्थित तालाबों और दूसरे वेटलैंड के सूख जाने से वन्यजीवों के लिए पानी का संकट पैदा हो जाता हैं। पानी की तलाश में अक्सर जंगली जानवर जंगल से निकलकर आबादी के निकट तक आ जाते है। इससे इंसानों और हिंसक जानवरों के बीच संघर्ष की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। खीरी जिले के मैलानी रेंज के छेदीपुर गांव और हाल ही में पीलीभीत जिले में बाघों के जंगल से बाहर आने और इंसानों को अपना शिकार बनाने की घटनाओं ने वन विभाग को हिला कर रख दिया है। बाघों के हमले में दोनों जिलों में दर्जनों लोगों की जानें जा चुकी हैं। पिछले दो साल के अंदर ही करीब तीन दर्जन लोग बाघ के हमले में घायल हुए।
जंगल से बाघों, तेंदुओं और अन्य हिंसक जानवरों के बाहर निकलने से पैदा होने वाली समस्या पर दुधवा टाइगर रिजर्व के अधिकारियों समेत वनाधिकारियों और वन्यजीव विशेषज्ञों ने गंभीर मंथन किया। इस मंथन में जंगली जानवरों के जंगल से बाहर निकलने की घटनाओं के पीछे जंगल में पानी की कमी भी एक समस्या सामने आई है। इसे दूर करने के लिए अधिकारियों ने सिंचाई विभाग की मदद ली है।
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सिंचाईं विभाग ने खीरी ब्रांच नहर से मैलानी और भीरा रेंज जंगल के बीच निकली 12 किलोमीटर लंबी अलीगंज माइनर का सौंदर्यीकरण कराया। इसमें जमा सिल्ट की जेसीबी मशीनों से सफाई के बाद माइनर की चौड़ाई बढ़ाकर नौ मीटर कराई। इसके साथ ही माइनर से चार कुलाबे खोदकर जंगल के अंदर दूर-दूर तक पानी पहुंचा दिया है। इससे पूरे साल जंगली जानवरों के सामने पानी की समस्या नहीं रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि पानी का संकट दूर होने से जंगली जानवरों को जंगल से बाहर निकलने की जरूरत नहीं होगी। इससे मानव और हिंसक जानवरों से आए दिन होने वाले टकराव से निजात मिलेगी।
उधर क्षेत्रीय वनाधिकारी दुधवा टाइगर रिजर्व मैलानी रेंज वीसी तिवारी ने बताया कि अलीगंज माइनर से जंगल के अंदर निकले कुलाबों में मड़हा आदि बीट के हरे-भरे और घने जंगलों में पानी की कमी दूर हो गई है। अब वन्यजीवों को गर्मियों में प्यास बुझाने के लिए उनके प्राकृतिक आवास में ही पानी उपलब्ध हो सकेगा। साथ ही जंगलों की हरियाली में और इजाफा होगा।
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वन विभाग ने सिंचाई विभाग का लिया सहयोग, जंगलों की बढ़ेगी हरियाली
दुधवा टाइगर रिजर्व के किशनपुर सेंक्चुरी और इसके बफर जोन में जंगली जानवरों को अब पीने के पानी के संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा। वन विभाग ने सिंचाई विभाग के सहयोग से किशनपुर सेंक्चुरी और दुधवा टाइगर रिजर्व के बफर जोन में शामिल मैलानी, भीरा रेंज समेत मड़हा बीट के जंगल से गुजरी खीरी ब्रांच नहर से कुलाबे खोद कर नहर का पानी जंगल में दूर-दूर तक पहुंचाने का इंतजाम किया है। इससे जंगलों की हरियाली भी बढ़ेगी।
आमतौर से गर्मियों के दिनों में जंगल के अंदर स्थित तालाबों और दूसरे वेटलैंड के सूख जाने से वन्यजीवों के लिए पानी का संकट पैदा हो जाता हैं। पानी की तलाश में अक्सर जंगली जानवर जंगल से निकलकर आबादी के निकट तक आ जाते है। इससे इंसानों और हिंसक जानवरों के बीच संघर्ष की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। खीरी जिले के मैलानी रेंज के छेदीपुर गांव और हाल ही में पीलीभीत जिले में बाघों के जंगल से बाहर आने और इंसानों को अपना शिकार बनाने की घटनाओं ने वन विभाग को हिला कर रख दिया है। बाघों के हमले में दोनों जिलों में दर्जनों लोगों की जानें जा चुकी हैं। पिछले दो साल के अंदर ही करीब तीन दर्जन लोग बाघ के हमले में घायल हुए।
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जंगल से बाघों, तेंदुओं और अन्य हिंसक जानवरों के बाहर निकलने से पैदा होने वाली समस्या पर दुधवा टाइगर रिजर्व के अधिकारियों समेत वनाधिकारियों और वन्यजीव विशेषज्ञों ने गंभीर मंथन किया। इस मंथन में जंगली जानवरों के जंगल से बाहर निकलने की घटनाओं के पीछे जंगल में पानी की कमी भी एक समस्या सामने आई है। इसे दूर करने के लिए अधिकारियों ने सिंचाई विभाग की मदद ली है।
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सिंचाईं विभाग ने खीरी ब्रांच नहर से मैलानी और भीरा रेंज जंगल के बीच निकली 12 किलोमीटर लंबी अलीगंज माइनर का सौंदर्यीकरण कराया। इसमें जमा सिल्ट की जेसीबी मशीनों से सफाई के बाद माइनर की चौड़ाई बढ़ाकर नौ मीटर कराई। इसके साथ ही माइनर से चार कुलाबे खोदकर जंगल के अंदर दूर-दूर तक पानी पहुंचा दिया है। इससे पूरे साल जंगली जानवरों के सामने पानी की समस्या नहीं रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि पानी का संकट दूर होने से जंगली जानवरों को जंगल से बाहर निकलने की जरूरत नहीं होगी। इससे मानव और हिंसक जानवरों से आए दिन होने वाले टकराव से निजात मिलेगी।
उधर क्षेत्रीय वनाधिकारी दुधवा टाइगर रिजर्व मैलानी रेंज वीसी तिवारी ने बताया कि अलीगंज माइनर से जंगल के अंदर निकले कुलाबों में मड़हा आदि बीट के हरे-भरे और घने जंगलों में पानी की कमी दूर हो गई है। अब वन्यजीवों को गर्मियों में प्यास बुझाने के लिए उनके प्राकृतिक आवास में ही पानी उपलब्ध हो सकेगा। साथ ही जंगलों की हरियाली में और इजाफा होगा।