{"_id":"680bdfd2da2bfa0f040afbfa","slug":"non-vegetarians-are-at-higher-risk-of-cancer-dr-ishwar-lakhimpur-news-c-120-1-lkh1011-144374-2025-04-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"मांसाहारी लोगों में कैंसर का खतरा अधिक : डॉ. ईश्वर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मांसाहारी लोगों में कैंसर का खतरा अधिक : डॉ. ईश्वर
विज्ञापन
प्रोफेसर डॉ. ईश्वर चन्द प्रेम सागर का स्वागत करतीं मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. वाणी गुप्ता। स
लखीमपुर खीरी। स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में मेटाबोलॉमिक्स विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन के तीसरे दिन देश के प्रमुख न्यूरो और स्पाइनल सर्जन डॉ. ईश्वर चंद प्रेम सागर ने आधुनिक ब्रेन ट्यूमर सर्जरी, स्पाइनल सर्जरी, एंडोस्कोपिक ब्रेन सर्जरी, इमेज गाइडेड न्यूरो सर्जरी, न्यूरो नैविगेशन जैसी आधुनिक तकनीक पर किए गए कार्य के अपने अनुभव और विचार साझा किए।
मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. ईश्वर चंद प्रेम सागर ने गिटार बजाते हुए मरीज की ब्रेन सर्जरी कर के भी चिकित्सा क्षेत्र में देश का नाम रोशन किया है। आधुनिक चिकित्सा व तकनीक को गीता के उपदेशों के माध्यम से समझाया। डॉ. ईश्वर चन्द प्रेम सागर गाना सुनते हुए इंसान के दिमाग की सर्जरी कर चुके हैं।
रीवा से आई एक डेलीगेट ने एडवांस सर्जरी करने पर सवाल किया तो उन्होंने बताया कि खोपड़ी खोलने के बाद दिमाग के टिशु में दर्द नहीं होता है व इंटरवेंशनल फिजियोलॉजिस्ट यह देखते रहते हैं कि ब्रेन का कौन सा हिस्सा काम कर रहा है।
विज्ञापन
स्वास्थ्य जागरूकता को लेकर उन्होंने बताया कि अत्यधित टाइट कपडे़ पहनने से पेट के निचले हिस्से की नसों पर दबाव पड़ सकता है। इससे सुन्नता और जलन जैसी समस्या हो सकती है। सम्मेलन के शीर्षक मेटाबोलॉमिक्स स्वस्थ जीवन शैली पर कहा कि हमें अपने मन को स्वस्थ रखना चाहिए, जिससे तन भी स्वस्थ रहता है। कैंसर को लेकर बताया कि वैसे तो इसके होने के कई कारण हैं, लेकिन मांसाहारी लोगों में ऐसा होने की अधिक आशंका पाई गई है।
आधुनिक चिकित्सा विधियों में इसका आज काफी हद तक उपचार संभव है, लेकिन सही मायने में इसे होने से कैसे रोका जा सके। इसका कोई खास जवाब मौजूद नहीं है। हालांकि हमारे प्राचीन ग्रन्थों में इसका जवाब मौजूद है, जो कि हमारी आज के इस सम्मेलन की थीम जैसा ही है। प्रोफेसर डॉ. वाणी गुप्ता ने बताया कि इस सम्मेलन की थीम जीवन शैली को रखने के पीछे का एक खास उद्देश्य भी है, जिससे लाखों लोगों की जिंदगी को निरोगी बनाया जा सकता है।
उन्होंने अनुवांशिकी आणविक फिजियोलॉजी मेटाबोलिक्स सिंड्रोम को लेकर रिसर्च किया है। 2001 से लेकर वर्तमान समय तक अपनी चिकित्सकीय सेवाओं के दौरान करीब 24 वर्षों को एक बहुआयामी अनुभव प्राप्त हुआ है, जो आज किसी न किसी रूप में हमारे देश व आम जनमानस सहित विदेश के काम आ रहा है। सम्मेलन के तीसरे दिन मुख्य वक्ताओं के रूप में केजीएमयू लखनऊ से डाॅ. निशा मनी व आकाक्षा पाण्डेय, रिटायर्ड सीएमओ आगरा डॉ. बीआर गौतम, रिवा मेडिकल कालेज से डाॅ. अरुणा सहित योगा आचार्य सिद्वार्थ मौजूद रहे।
विज्ञापन
मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. ईश्वर चंद प्रेम सागर ने गिटार बजाते हुए मरीज की ब्रेन सर्जरी कर के भी चिकित्सा क्षेत्र में देश का नाम रोशन किया है। आधुनिक चिकित्सा व तकनीक को गीता के उपदेशों के माध्यम से समझाया। डॉ. ईश्वर चन्द प्रेम सागर गाना सुनते हुए इंसान के दिमाग की सर्जरी कर चुके हैं।
विज्ञापन
रीवा से आई एक डेलीगेट ने एडवांस सर्जरी करने पर सवाल किया तो उन्होंने बताया कि खोपड़ी खोलने के बाद दिमाग के टिशु में दर्द नहीं होता है व इंटरवेंशनल फिजियोलॉजिस्ट यह देखते रहते हैं कि ब्रेन का कौन सा हिस्सा काम कर रहा है।
विज्ञापन
स्वास्थ्य जागरूकता को लेकर उन्होंने बताया कि अत्यधित टाइट कपडे़ पहनने से पेट के निचले हिस्से की नसों पर दबाव पड़ सकता है। इससे सुन्नता और जलन जैसी समस्या हो सकती है। सम्मेलन के शीर्षक मेटाबोलॉमिक्स स्वस्थ जीवन शैली पर कहा कि हमें अपने मन को स्वस्थ रखना चाहिए, जिससे तन भी स्वस्थ रहता है। कैंसर को लेकर बताया कि वैसे तो इसके होने के कई कारण हैं, लेकिन मांसाहारी लोगों में ऐसा होने की अधिक आशंका पाई गई है।
आधुनिक चिकित्सा विधियों में इसका आज काफी हद तक उपचार संभव है, लेकिन सही मायने में इसे होने से कैसे रोका जा सके। इसका कोई खास जवाब मौजूद नहीं है। हालांकि हमारे प्राचीन ग्रन्थों में इसका जवाब मौजूद है, जो कि हमारी आज के इस सम्मेलन की थीम जैसा ही है। प्रोफेसर डॉ. वाणी गुप्ता ने बताया कि इस सम्मेलन की थीम जीवन शैली को रखने के पीछे का एक खास उद्देश्य भी है, जिससे लाखों लोगों की जिंदगी को निरोगी बनाया जा सकता है।
उन्होंने अनुवांशिकी आणविक फिजियोलॉजी मेटाबोलिक्स सिंड्रोम को लेकर रिसर्च किया है। 2001 से लेकर वर्तमान समय तक अपनी चिकित्सकीय सेवाओं के दौरान करीब 24 वर्षों को एक बहुआयामी अनुभव प्राप्त हुआ है, जो आज किसी न किसी रूप में हमारे देश व आम जनमानस सहित विदेश के काम आ रहा है। सम्मेलन के तीसरे दिन मुख्य वक्ताओं के रूप में केजीएमयू लखनऊ से डाॅ. निशा मनी व आकाक्षा पाण्डेय, रिटायर्ड सीएमओ आगरा डॉ. बीआर गौतम, रिवा मेडिकल कालेज से डाॅ. अरुणा सहित योगा आचार्य सिद्वार्थ मौजूद रहे।