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Lakhimpur Kheri News: खुले नालों पर न रेलिंग, न स्लैब... सिर्फ खतरा
Wed, 05 Aug 2026 12:08 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Wed, 05 Aug 2026 12:08 AM IST
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भिड़ौरी गांव में सत्यकिशोर के घर के सामने खुला पड़ा नाला।संवाद
लखीमपुर खीरी। जिले में खुले पड़े गहरे नालों पर न रेलिंग है, न स्लैब और न ही कोई चेतावनी बोर्ड। बरसात में पानी भरने के बाद इनकी गहराई का अंदाजा लगाना और मुश्किल हो जाता है।
निघासन के भेड़ौरी गांव में दो वर्षीय मासूम शुभ की खुले नाले में डूबने से मौत हुए दो दिन बीत चुके हैं, लेकिन जिले के अन्य खतरनाक नालों की तस्वीर नहीं बदली। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक कई स्थानों पर खुले नाले अब भी लोगों की जान पर खतरा बने हुए हैं, जबकि जिम्मेदार विभागों की ओर से स्थायी सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई है।
शहर के डीसी रोड पर स्थित बड़ा और गहरा नाला लंबे समय से खुला पड़ा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, यहां कई राहगीर, बाइक सवार और बच्चे हादसों का शिकार हो चुके हैं। बरसात में नाले का किनारा और पानी का बहाव दिखाई नहीं देता, जिससे दुर्घटना की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। इसके बावजूद नाले को ढकने या सुरक्षा रेलिंग लगाने का काम अब तक नहीं कराया गया।
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शहर की नहर पटरी भी दुर्घटनाओं का संवेदनशील क्षेत्र बनी हुई है। डॉन बॉस्को स्कूल के पास मोड़, गुरु नानक स्कूल के आगे और पटेल नगर के आसपास कई बार लोग नहर में गिर चुके हैं। स्थानीय नागरिक वर्षों से इन स्थानों पर मजबूत रेलिंग या सुरक्षा बैरियर लगाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी मांग पूरी नहीं हुई।
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गांवों में भी जोखिम बरकरार
खतरा केवल शहर तक सीमित नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई और जलनिकासी के लिए बने कई नाले खुले पड़े हैं। बरसात में इनमें तेज बहाव होने से बच्चों और पशुओं के गिरने का खतरा बना रहता है। निघासन के भेड़ौरी गांव के अलावा बेलरायां-कड़िया मार्ग पर भी बड़ा और गहरा नाला बिना सुरक्षा व्यवस्था के खुला है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हादसे के बाद अधिकारी मौके पर पहुंचते हैं, जांच और कार्रवाई का भरोसा देकर लौट जाते हैं, लेकिन कुछ दिन बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। न तो खतरनाक स्थानों का सर्वे कराया जाता है और न ही उन्हें सुरक्षित बनाने की कोई ठोस योजना लागू होती है।
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पलिया में भी सड़क किनारे खुला है जानलेवा नाला
पलियाकलां। शहर के बाइपास रोड पर बैंक ऑफ बड़ौदा के पास खुला और जर्जर नाला राहगीरों के लिए बड़ा खतरा बना हुआ है। नाले की दीवारें टूट चुकी हैं और ऊपर सुरक्षा के लिए कोई स्लैब नहीं बचा है। सड़क किनारे खुले इस गहरे नाले से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। स्थानीय लोगों और वाहन चालकों ने प्रशासन से किसी अनहोनी से पहले सुरक्षा इंतजाम कराने की मांग की है। संवाद
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निघासन के भेड़ौरी गांव में दो वर्षीय मासूम शुभ की खुले नाले में डूबने से मौत हुए दो दिन बीत चुके हैं, लेकिन जिले के अन्य खतरनाक नालों की तस्वीर नहीं बदली। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक कई स्थानों पर खुले नाले अब भी लोगों की जान पर खतरा बने हुए हैं, जबकि जिम्मेदार विभागों की ओर से स्थायी सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई है।
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शहर के डीसी रोड पर स्थित बड़ा और गहरा नाला लंबे समय से खुला पड़ा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, यहां कई राहगीर, बाइक सवार और बच्चे हादसों का शिकार हो चुके हैं। बरसात में नाले का किनारा और पानी का बहाव दिखाई नहीं देता, जिससे दुर्घटना की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। इसके बावजूद नाले को ढकने या सुरक्षा रेलिंग लगाने का काम अब तक नहीं कराया गया।
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शहर की नहर पटरी भी दुर्घटनाओं का संवेदनशील क्षेत्र बनी हुई है। डॉन बॉस्को स्कूल के पास मोड़, गुरु नानक स्कूल के आगे और पटेल नगर के आसपास कई बार लोग नहर में गिर चुके हैं। स्थानीय नागरिक वर्षों से इन स्थानों पर मजबूत रेलिंग या सुरक्षा बैरियर लगाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी मांग पूरी नहीं हुई।
गांवों में भी जोखिम बरकरार
खतरा केवल शहर तक सीमित नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई और जलनिकासी के लिए बने कई नाले खुले पड़े हैं। बरसात में इनमें तेज बहाव होने से बच्चों और पशुओं के गिरने का खतरा बना रहता है। निघासन के भेड़ौरी गांव के अलावा बेलरायां-कड़िया मार्ग पर भी बड़ा और गहरा नाला बिना सुरक्षा व्यवस्था के खुला है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हादसे के बाद अधिकारी मौके पर पहुंचते हैं, जांच और कार्रवाई का भरोसा देकर लौट जाते हैं, लेकिन कुछ दिन बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। न तो खतरनाक स्थानों का सर्वे कराया जाता है और न ही उन्हें सुरक्षित बनाने की कोई ठोस योजना लागू होती है।
पलिया में भी सड़क किनारे खुला है जानलेवा नाला
पलियाकलां। शहर के बाइपास रोड पर बैंक ऑफ बड़ौदा के पास खुला और जर्जर नाला राहगीरों के लिए बड़ा खतरा बना हुआ है। नाले की दीवारें टूट चुकी हैं और ऊपर सुरक्षा के लिए कोई स्लैब नहीं बचा है। सड़क किनारे खुले इस गहरे नाले से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। स्थानीय लोगों और वाहन चालकों ने प्रशासन से किसी अनहोनी से पहले सुरक्षा इंतजाम कराने की मांग की है। संवाद

भिड़ौरी गांव में सत्यकिशोर के घर के सामने खुला पड़ा नाला।संवाद

भिड़ौरी गांव में सत्यकिशोर के घर के सामने खुला पड़ा नाला।संवाद

भिड़ौरी गांव में सत्यकिशोर के घर के सामने खुला पड़ा नाला।संवाद