{"_id":"5936d3694f1c1b801c9c899c","slug":"no-more-hearing-on-police-stations-growing-crowd","type":"story","status":"publish","title_hn":"थानों पर सुनवाई नहीं एसपी दफ्तर पर बढ़ रही भीड़ ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
थानों पर सुनवाई नहीं एसपी दफ्तर पर बढ़ रही भीड़
टीएन अवस्थी लखीमपुर खीरी।
Updated Tue, 06 Jun 2017 10:58 PM IST
विज्ञापन
police
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फरियादियों का थानों से उठ रहा विश्वास है वजह
तहसील-समाधान दिवस में भी नहीं मिलता न्याय
एसपी दफ्तर पर शिकायतों का बोझ बढ़ा है। कारण यह है कि थानों पर फरियादियों की सुनवाई नहीं होती। अगर मामला सुना भी गया तो राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण उन्हें न्याय नहीं मिल पाता। यही वजह है कि फरियादियों का थानों से विश्वास उठता जा रहा है। सरकारें बदली लेकिन थानों में न राजनीतिक हस्तक्षेप बंद हुआ और न ही दलालों का वर्चस्व। लिहाजा लोगों को अपनी फरियाद लेकर एसपी के दफ्तर जाना पड़ रहा है। एसपी दफ्तर ही नहीं लोग योगी के जनता दरबार में भी फरियाद लगा रहे हैं।
शासन जन सुनवाई को लेकर काफी गंभीर है। फरियादियों को अपनी समस्याएं लेकर बेवजह अफसरों के पास दौड़ न लगानी पड़े, इसके लिए तहसील दिवस और समाधान दिवस आयोजित किए जाते हैं, फिर भी लोगों की समस्याओं का निस्तारण नहीं हो पाता। अक्सर देखा जाता है कि जब पीड़ित व्यक्ति थाने पर जाता है तो उसकी सुनवाई नहीं हो पाती। पुलिस उसका शिकायती पत्र ले तो लेती है, लेकिन इसका उपयोग अक्सर दूसरे पक्ष से आर्थिक लाभ लेने में करती है। इससे पीड़ित व्यक्ति को न्याय नहीं मिल पाता है। यहां तक कुछ मामले ऐसे भी सामने आए हैं, जिनमें पुलिस शिकायतकर्ता के विरोध में ही गलत रिपोर्ट लगाकर भेज देती है। इससे पीड़ित व्यक्ति न्याय पाने के लिए भटकता रहता है। हालात यह हैं कि अब लोगों को सीओ स्तर से न्याय मिलने का भी भरोसा समाप्त हो गया है। पीड़ित को आस रहती है कि यदि वह एसपी से मिलेगा तो उसे न्याय मिल सकता है। इसी उम्मीद को लेकर पीड़ित व्यक्ति एसपी दफ्तर के चक्कर काटता रहता है। एसपी दफ्तर के जांच शिकायत प्रकोष्ठ के आंकड़ों पर यदि गौर करें तो प्रतिदिन 55 से 70 तक प्रार्थना पत्र आते हैं। इनमें सर्वाधिक शिकायतें सदर कोतवाली क्षेत्र की होती हैं।
अफसरों का भी नहीं है थानेदारों में खौफ
अफसर जनशिकायतों के निस्तारण को लेकर बैठकों में भी मातहत अधिकारियों को दिशा-निर्देश देते हैं और उनका प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण करने की बात कहते हैं। यहां तक कि लापरवाही करने पर दंडित करने की बात कहने में भी कोई गुरेज नहीं करते, लेकिन जिले के थानेदारों पर इसका कोई असर नहीं पड़ता है। एसपी ने पहली क्राइम बैठक में ही जनशिकायतों के निस्तारण करने पर जोर दिया था, लेकिन उनके दफ्तर पर आई शिकायतों के आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि थानों पर अधिकारी जिम्मेदारी के साथ जनसमस्याओं का निस्तारण नहीं करते।
विज्ञापन
थानों मे राजनीतिक हस्तक्षेप और दलालों का वर्चस्व
सरकार चाहे जिस पार्टी की रही हो, लेकिन थाने दलालों से मुक्त नहीं हो पाए हैं। राजनीतिक हस्तक्षेप का आलम यह है कि अक्सर नेता उत्पीड़न करने वालों और आपराधिक तत्वों के पक्ष में पैरवी करते नजर आते हैं। पीड़ित व्यक्ति को खुद ही अपनी लड़ाई लड़नी पड़ती है। यही हाल दलालों का भी है। वे भी अपराधियों की तरफदारी करके मोटी कमाई करते और कराते हैं। इससे पीड़ित पक्ष को थाने से निराशा हाथ लगती है।
जमीन के विवाद और घरेलू हिंसा के मामले अधिक
एसपी दफ्तर पर आने वाली शिकायतों पर यदि गौर करें तो अधिकतर मामले जमीन के विवाद और घरेलू हिंसा से जुड़े होते हैं। जमीन के विवाद राजस्व विभाग से जुड़े होने के कारण पुलिस इन विवादों के निस्तारण में लाचार नजर आती है। पीड़ित को लगता है कि पुलिस मामले को जान बुझकर टाल रही है।
छोटे अफसरों की अपेक्षा बड़ों से मिलना है आसान
लखीमपुर खीरी। जिले के थानों और तहसीलों में शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही का आलम यह है कि प्रदेश स्तर पर समीक्षा के दौरान खीरी जिला फिसड्डी पाया गया। इस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने डीएम और एसपी से जवाब-तलब भी तलब किया है। इसके बाद से अफसरों में हड़कंप मचा हुआ है।
पुलिस का खौफ कुछ इस तरह लोगों में है कि लोग थाने में जाने से भी डरते हैं। तहसील दिवसों में भी गंभीर शिकायत लेकर आने वाले फरियादियों को उच्चाधिकारियों तक पहुंचने ही नहीं दिया जाता। स्थानीय स्तर के बजाय उन्हें जिला और प्रदेश स्तर पर अपनी शिकायतें रखने में अधिक सहूलियत होती है। यही कारण है कि डीएम और एसपी के कार्यालयों में फरियादियों की भीड़ लगातार बढ़ रही है। जब फरियादियों को यहां से भी निराशा हाथ लगती हैं तो वह प्रदेश के आला अफसरों के अलावा मुख्यमंत्री के जनता दरबार में भी पहुंच जाते हैं। इधर लखीमपुर खीरी जिले के बड़ी संख्या में फरियादी मुख्यमंत्री के दरबार में पहुंचे हैं।
जनशिकायतों के निस्तारण पर काफी जोर दिया जा रहा है। शिकायतें निस्तारित भी हो रही हैं। इधर कुछ दिनों से ऑफिस पर शिकायतें बढ़ीं हैं, जिसकी समीक्षा कर कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. एस चन्नप्पा, एसपी
शिकायतों का निस्तारण निचले स्तर पर अधिक से अधिक कराने के लिए प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए एसडीएम, तहसीलदारों, सीओ और एसओ को निर्देश दिए गए हैं कि आने वाले फरियागदी की अच्छे ढंग से बात सुनकर अपने स्तर से उनका निस्तारण करने का प्रयास करें, ताकि उन्हें जिला और प्रदेश स्तर पर दौड़ने की जरूरत न पड़े। उच्च स्तर जब अधिकरियों की उपलब्धता आसान होती है तो फरियादी सीधे बड़े अफसरों के पास जाना पसंद करता है।
-आकाश दीप, जिलाधिकारी खीरी।
विज्ञापन
तहसील-समाधान दिवस में भी नहीं मिलता न्याय
एसपी दफ्तर पर शिकायतों का बोझ बढ़ा है। कारण यह है कि थानों पर फरियादियों की सुनवाई नहीं होती। अगर मामला सुना भी गया तो राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण उन्हें न्याय नहीं मिल पाता। यही वजह है कि फरियादियों का थानों से विश्वास उठता जा रहा है। सरकारें बदली लेकिन थानों में न राजनीतिक हस्तक्षेप बंद हुआ और न ही दलालों का वर्चस्व। लिहाजा लोगों को अपनी फरियाद लेकर एसपी के दफ्तर जाना पड़ रहा है। एसपी दफ्तर ही नहीं लोग योगी के जनता दरबार में भी फरियाद लगा रहे हैं।
शासन जन सुनवाई को लेकर काफी गंभीर है। फरियादियों को अपनी समस्याएं लेकर बेवजह अफसरों के पास दौड़ न लगानी पड़े, इसके लिए तहसील दिवस और समाधान दिवस आयोजित किए जाते हैं, फिर भी लोगों की समस्याओं का निस्तारण नहीं हो पाता। अक्सर देखा जाता है कि जब पीड़ित व्यक्ति थाने पर जाता है तो उसकी सुनवाई नहीं हो पाती। पुलिस उसका शिकायती पत्र ले तो लेती है, लेकिन इसका उपयोग अक्सर दूसरे पक्ष से आर्थिक लाभ लेने में करती है। इससे पीड़ित व्यक्ति को न्याय नहीं मिल पाता है। यहां तक कुछ मामले ऐसे भी सामने आए हैं, जिनमें पुलिस शिकायतकर्ता के विरोध में ही गलत रिपोर्ट लगाकर भेज देती है। इससे पीड़ित व्यक्ति न्याय पाने के लिए भटकता रहता है। हालात यह हैं कि अब लोगों को सीओ स्तर से न्याय मिलने का भी भरोसा समाप्त हो गया है। पीड़ित को आस रहती है कि यदि वह एसपी से मिलेगा तो उसे न्याय मिल सकता है। इसी उम्मीद को लेकर पीड़ित व्यक्ति एसपी दफ्तर के चक्कर काटता रहता है। एसपी दफ्तर के जांच शिकायत प्रकोष्ठ के आंकड़ों पर यदि गौर करें तो प्रतिदिन 55 से 70 तक प्रार्थना पत्र आते हैं। इनमें सर्वाधिक शिकायतें सदर कोतवाली क्षेत्र की होती हैं।
विज्ञापन
अफसरों का भी नहीं है थानेदारों में खौफ
अफसर जनशिकायतों के निस्तारण को लेकर बैठकों में भी मातहत अधिकारियों को दिशा-निर्देश देते हैं और उनका प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण करने की बात कहते हैं। यहां तक कि लापरवाही करने पर दंडित करने की बात कहने में भी कोई गुरेज नहीं करते, लेकिन जिले के थानेदारों पर इसका कोई असर नहीं पड़ता है। एसपी ने पहली क्राइम बैठक में ही जनशिकायतों के निस्तारण करने पर जोर दिया था, लेकिन उनके दफ्तर पर आई शिकायतों के आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि थानों पर अधिकारी जिम्मेदारी के साथ जनसमस्याओं का निस्तारण नहीं करते।
विज्ञापन
थानों मे राजनीतिक हस्तक्षेप और दलालों का वर्चस्व
सरकार चाहे जिस पार्टी की रही हो, लेकिन थाने दलालों से मुक्त नहीं हो पाए हैं। राजनीतिक हस्तक्षेप का आलम यह है कि अक्सर नेता उत्पीड़न करने वालों और आपराधिक तत्वों के पक्ष में पैरवी करते नजर आते हैं। पीड़ित व्यक्ति को खुद ही अपनी लड़ाई लड़नी पड़ती है। यही हाल दलालों का भी है। वे भी अपराधियों की तरफदारी करके मोटी कमाई करते और कराते हैं। इससे पीड़ित पक्ष को थाने से निराशा हाथ लगती है।
जमीन के विवाद और घरेलू हिंसा के मामले अधिक
एसपी दफ्तर पर आने वाली शिकायतों पर यदि गौर करें तो अधिकतर मामले जमीन के विवाद और घरेलू हिंसा से जुड़े होते हैं। जमीन के विवाद राजस्व विभाग से जुड़े होने के कारण पुलिस इन विवादों के निस्तारण में लाचार नजर आती है। पीड़ित को लगता है कि पुलिस मामले को जान बुझकर टाल रही है।
छोटे अफसरों की अपेक्षा बड़ों से मिलना है आसान
लखीमपुर खीरी। जिले के थानों और तहसीलों में शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही का आलम यह है कि प्रदेश स्तर पर समीक्षा के दौरान खीरी जिला फिसड्डी पाया गया। इस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने डीएम और एसपी से जवाब-तलब भी तलब किया है। इसके बाद से अफसरों में हड़कंप मचा हुआ है।
पुलिस का खौफ कुछ इस तरह लोगों में है कि लोग थाने में जाने से भी डरते हैं। तहसील दिवसों में भी गंभीर शिकायत लेकर आने वाले फरियादियों को उच्चाधिकारियों तक पहुंचने ही नहीं दिया जाता। स्थानीय स्तर के बजाय उन्हें जिला और प्रदेश स्तर पर अपनी शिकायतें रखने में अधिक सहूलियत होती है। यही कारण है कि डीएम और एसपी के कार्यालयों में फरियादियों की भीड़ लगातार बढ़ रही है। जब फरियादियों को यहां से भी निराशा हाथ लगती हैं तो वह प्रदेश के आला अफसरों के अलावा मुख्यमंत्री के जनता दरबार में भी पहुंच जाते हैं। इधर लखीमपुर खीरी जिले के बड़ी संख्या में फरियादी मुख्यमंत्री के दरबार में पहुंचे हैं।
जनशिकायतों के निस्तारण पर काफी जोर दिया जा रहा है। शिकायतें निस्तारित भी हो रही हैं। इधर कुछ दिनों से ऑफिस पर शिकायतें बढ़ीं हैं, जिसकी समीक्षा कर कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. एस चन्नप्पा, एसपी
शिकायतों का निस्तारण निचले स्तर पर अधिक से अधिक कराने के लिए प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए एसडीएम, तहसीलदारों, सीओ और एसओ को निर्देश दिए गए हैं कि आने वाले फरियागदी की अच्छे ढंग से बात सुनकर अपने स्तर से उनका निस्तारण करने का प्रयास करें, ताकि उन्हें जिला और प्रदेश स्तर पर दौड़ने की जरूरत न पड़े। उच्च स्तर जब अधिकरियों की उपलब्धता आसान होती है तो फरियादी सीधे बड़े अफसरों के पास जाना पसंद करता है।
-आकाश दीप, जिलाधिकारी खीरी।