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न बसें, न कार्यशाला, सिर्फ नाम को है लखीमपुर डिपो
लखीमपुर खीरी
Updated Sun, 14 Dec 2014 07:23 PM IST
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जिला मुख्यालय का लखीमपुर डिपो और निगम की बस एक भी नहीं, इससे यह नाम का
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ही डिपो रह गया है। 47 अनुबंधित बसों के सहारे यह डिपो चल रहा है। बकौल
एआरएम डॉ. वीके गोस्वामी, जिला प्रशासन से भूमि न मिल पाने के कारण डिपो की
कार्यशाला नहीं बन सकी। यही वजह है कि आज तक इस डिपो को निगम की बस नहीं
मिल सकी है।
वर्ष 1998 में भाजपा-लोकां सरकार में लखीमपुर डिपो का उद्घाटन तत्कालीन होमगार्ड्स एवं राजनीतिक पेंशन मंत्री राजा सरस्वती प्रताप सिंह ने किया था। पहले तो कई वर्षों तक इसे एक भी बस मयस्सर नहीं हो सकी। इसके बाद वर्ष 2006 में सपा की सरकार में पुन: इस डिपो का उद्घाटन कर यहां से 26 बसें चलाई गईं। बाद में धीरे-धीरे यह बसें बढ़ गईं और वर्ष 2013 में इनकी संख्या 47 हो गई। आज भी इतनी ही बसें चल रही हैं। वैसे जिला मुख्यालय के इस डिपो से रोजाना विभिन्न डिपो की करीब 102 गाड़ियों का आवागमन हो रहा है।
वर्कशाप होने से यह होता फायदा
निगम की बसें मिल जातीं, बसों को लखीमपुर से बहराइच, दिल्ली, हरिद्वार, आगरा, मथुरा और जिले के पलिया तथा निघासन रूट पर चलाए जाने से आमदनी बढ़ती, इस डिपो से होकर जाने वाली दूसरे डिपो की बसों की भी मरम्मत हो जाती, इससे लखीमपुर डिपो की आय बढ़ती।
भूमि न मिलने के पीछे यह रही वजह
सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक (एआरएम) वीके गोस्वामी के अनुसार लखीमपुर डिपो की कार्यशाला निर्माण के लिए शासन के निर्देश पर तत्कालीन डीएम ने वर्ष 2006 में तहसील प्रशासन को भूमि उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। गोला रोड पर लालपुर बैरियर के पास जमीन भी देख ली गई थी, लेकिन विवाद के कारण भूमि का आवंटन नहीं हो सका, जिससे वर्कशॉप नहीं बन सकी। भूमि के लिए विभागीय स्तर पर प्रयास जारी हैं। कार्यशाला बनने के बाद ही निगम से डिपो को बस दिए जाने का प्रावधान है।
वर्ष 1998 में भाजपा-लोकां सरकार में लखीमपुर डिपो का उद्घाटन तत्कालीन होमगार्ड्स एवं राजनीतिक पेंशन मंत्री राजा सरस्वती प्रताप सिंह ने किया था। पहले तो कई वर्षों तक इसे एक भी बस मयस्सर नहीं हो सकी। इसके बाद वर्ष 2006 में सपा की सरकार में पुन: इस डिपो का उद्घाटन कर यहां से 26 बसें चलाई गईं। बाद में धीरे-धीरे यह बसें बढ़ गईं और वर्ष 2013 में इनकी संख्या 47 हो गई। आज भी इतनी ही बसें चल रही हैं। वैसे जिला मुख्यालय के इस डिपो से रोजाना विभिन्न डिपो की करीब 102 गाड़ियों का आवागमन हो रहा है।
वर्कशाप होने से यह होता फायदा
निगम की बसें मिल जातीं, बसों को लखीमपुर से बहराइच, दिल्ली, हरिद्वार, आगरा, मथुरा और जिले के पलिया तथा निघासन रूट पर चलाए जाने से आमदनी बढ़ती, इस डिपो से होकर जाने वाली दूसरे डिपो की बसों की भी मरम्मत हो जाती, इससे लखीमपुर डिपो की आय बढ़ती।
भूमि न मिलने के पीछे यह रही वजह
सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक (एआरएम) वीके गोस्वामी के अनुसार लखीमपुर डिपो की कार्यशाला निर्माण के लिए शासन के निर्देश पर तत्कालीन डीएम ने वर्ष 2006 में तहसील प्रशासन को भूमि उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। गोला रोड पर लालपुर बैरियर के पास जमीन भी देख ली गई थी, लेकिन विवाद के कारण भूमि का आवंटन नहीं हो सका, जिससे वर्कशॉप नहीं बन सकी। भूमि के लिए विभागीय स्तर पर प्रयास जारी हैं। कार्यशाला बनने के बाद ही निगम से डिपो को बस दिए जाने का प्रावधान है।