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निघासन कांडः सालभर में सभी छह दोषियों को मिला दंड, किशोर न्याय बोर्ड ने गलत परिवेश पर भी की टिप्पणी
Sun, 03 Sep 2023 12:17 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Published by: बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 03 Sep 2023 12:17 PM IST
सार
किशोर न्याय बोर्ड ने कहा कि दोषी ने जिस तरह अपने आवारा दोस्तों के साथ मिलकर इस घिनौने कृत्य को अंजाम दिया है। वह पूरे समाज के लिए भय के वातारण का संकेत है।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
लखीमपुर खीरी के चर्चित निघासन कांड मामले में अदालत ने शनिवार को किशोर अपचारी को भी सजा सुना दी। इस चर्चित मामले में अदालत ने एक साल के अंदर सभी आरोपियों पर दोष सिद्ध कर उन्हें सजा सुनाई है। शनिवार को किशोर न्याय बोर्ड के आए 38 पेज के फैसले में किशोर न्याय बोर्ड ने नाबालिग के गलत परवरिश और अराजक तत्वों के साथ गलत संगत को लेकर भी टिप्पणी की है।
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बोर्ड ने कहा कि दोषी ने जिस तरह अपने आवारा दोस्तों के साथ मिलकर इस घिनौने कृत्य को अंजाम दिया है। वह पूरे समाज के लिए भय के वातारण का संकेत है। दुष्कर्म और हत्या करने के बाद जिस तरह खुदकुशी दर्शाने के लिए दलित नाबालिग बहनों को अपने दोस्तों को बुलाकर से खैर के पेड़ की टहनी में टांग दिया गया था। वह अपराध की गंभीरता को और बढ़ा देता है।
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ये भी पढ़ें- निघासन कांड: एक और नाबालिग को तीन साल की सजा, किशोर न्याय बोर्ड ने घटना को समाज के लिए बताया कलंक
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बोर्ड ने कहा कि अगर घरवाले बच्चों के दोस्तों व स्वयं के गुटखा और धूम्रपान जैसी गलत हरकतों पर ध्यान देते, नाबालिग को सही-गलत की जानकारी देते, उसके मोबाइल और उसके शौक के बारे में ध्यान देते तो नाबालिग के भविष्य और परिणाम को बदला जा सकता था।
अभियोजन अधिकारी राजेश कुमार और सहायक अभियोजन अधिकारी विजय कुमार ने बताया कि किशोर न्याय अधिनियम में संशोधन के बाद अब अधिकतम सजा तीन वर्ष की प्रावधानित है, लिहाजा अदालत में सबसे अधिक सजा दी है।
किशोर न्याय बोर्ड में होते हैं प्रधान मजिस्ट्रेट के साथ दो सदस्य
अधिकतर मामलों में एक ही न्यायाधीश मामले की सुनवाई करते हैं, लेकिन किशोर न्याय बोर्ड नाबालिग अपराधियों के मामले में सुनवाई के लिए प्रधान मजिस्ट्रेट के साथ ही सामाजिक कार्यकर्ता और महिला अधिकारों को लेकर कार्य करने वाले सदस्यों को भी सम्मिलित करता है।
यही कारण है कि हरेराम और रंजना श्रीवास्तव ने भी इस मामले में समाज पर पड़ने वाले प्रभाव पर विवेचन करते हुए गलत परवरिश को लेकर शनिवार को टिप्पणी की और अपचारी किशोर के आगे के भविष्य को संवारने के लिए उसे इस अवधि में किसी रोजगार परक प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल किए जाने के आदेश दिए हैं।
दो साल बाद मिल जाएगी जेल से रिहाई
किशोर न्याय बोर्ड ने दोषी को नाबालिग मामले में सर्वाधिक सजा सुनाई है। इसमें जेल में बिताई गई अवधि को भी समायोजित किया जाएगा। कुल तीन साल की सजा सुनाई गई है। जेल में बिताई अवधि समायोजित करने के हिसाब से दोषी किशोर अपचारी को दो साल की सजा जेल में और बितानी होगी। इसके बाद रिहाई हो सकेगी।
अधिकतर मामलों में एक ही न्यायाधीश मामले की सुनवाई करते हैं, लेकिन किशोर न्याय बोर्ड नाबालिग अपराधियों के मामले में सुनवाई के लिए प्रधान मजिस्ट्रेट के साथ ही सामाजिक कार्यकर्ता और महिला अधिकारों को लेकर कार्य करने वाले सदस्यों को भी सम्मिलित करता है।
यही कारण है कि हरेराम और रंजना श्रीवास्तव ने भी इस मामले में समाज पर पड़ने वाले प्रभाव पर विवेचन करते हुए गलत परवरिश को लेकर शनिवार को टिप्पणी की और अपचारी किशोर के आगे के भविष्य को संवारने के लिए उसे इस अवधि में किसी रोजगार परक प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल किए जाने के आदेश दिए हैं।
दो साल बाद मिल जाएगी जेल से रिहाई
किशोर न्याय बोर्ड ने दोषी को नाबालिग मामले में सर्वाधिक सजा सुनाई है। इसमें जेल में बिताई गई अवधि को भी समायोजित किया जाएगा। कुल तीन साल की सजा सुनाई गई है। जेल में बिताई अवधि समायोजित करने के हिसाब से दोषी किशोर अपचारी को दो साल की सजा जेल में और बितानी होगी। इसके बाद रिहाई हो सकेगी।
घटना के बाद कब, क्या हुआ
28 सितंबर 2022 - आरोप पत्र दाखिल किया गया।
29 सितंबर 2022- आरोप पत्र पर प्रसंज्ञान लिया गया।
30 सितंबर 2022- अभियुक्तगण पर आरोप तय किये गये।
03 अक्तूबर 2022- वास्ते साक्ष्य वादी मुकदमा माया देवी की मुख्य परीक्षा लिखी गयी।
07 अक्तूबर 2022- साक्षी उपस्थित बार संघ से विपरीत आदेश पारित न करने का प्रस्ताव।
11 से लेकर 29 अक्तूबर 2022- गवाहों से जिरह की गई।
31 अक्तूबर 2022- किशोर अपचारी प्रार्थना पत्र पर सुनवाई हुई।
01 नवम्बर 2022- अभियोजन गवाह-तीन रामपाल की मुख्य परीक्षा अंकित की गयी।
02 से 14 नवंबर तक- अभियोजन के गवाह सेजिरह की गई।
18 नवंबर 2022- अभियोजन गवाह एक की जिरह पूर्ण की गयी।
21 नवंबर 2022- अभियोजन गवाह दो से जिरह, अभियोजन गवाह दो से जिरह अभियुक्त जुनैद के जरिए की गयी।
23 नवंबर 2022- अभियोजन गवाह दो से जिरह पूरी की गयी। अभियोजन गवाह चार, कांस्टेबिल शुभम रावत की मुख्य परीक्षा लिखी गयी।
24 नवंबर 2022- अभियुक्त छोटू उर्फ सुनील का जिरह का अवसर समाप्त किया गया।
23 मार्च 2023- प्रार्थना पत्र धारा 34 2 पाक्सो एक्ट निरस्त किया गया।
11 अप्रैल 2023- अभियोजन द्वारा शेष साक्षीगणों को छोड़ने का प्रार्थना पत्र दिया गया, और अभियोजन साक्ष्य को समाप्त किया।
24 अप्रैल 2023- अभियुक्तों के बयान के अन्तर्गत धारा 313 बनाये गये।
27 अप्रैल 2023- अभियुक्तों को साक्ष्य का अवसर दिया गया जिसमें बचाव पक्ष की गवाह एक सरोजनी का साक्ष्य अंकित किया गया।
01 मई 2023 से 18 मई 2023 तक बचाव पक्ष द्वारा कोई सफाई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया।
19 मई 2023- अभियुक्त जुनैद द्वारा धारा 293 के तहत विधि विज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ के वैज्ञानिकों कोतलबी का प्रार्थना पत्र दिया जिसे न्यायालय ने निरस्त कर दिया। तक अभियुक्त के अधिवक्ता ने सफाई साक्ष्य समाप्त किया।
20 मई 2023- अभियुक्त सुनील उर्फ छोटू के अधिवक्ता ने सफाई साक्ष्य समाप्त किये।
22 मई 2023- अभियोजन पक्ष ने बहस शुरू की।
31 मई 2023- अभियोजन बहस समाप्त हुई।
12 जून 2023- अभियुक्त सुनील उर्फ छोटू की तरफ से बहस शुरू हुई।
17 जून 2023- अभियुक्त सुनील उर्फ छोटू की तरफ से बहस पूरी हुई।
20 जून 2023- अभियुक्त जुनैद व सुहैल की तरफ से बहस शुरू की।
07 अगस्त 2023- आरिफ व करीमुद्दीन की बहस शुरू हुई व सुहैल की बहस पूरी।
11 अगस्त 2023- अदालत ने चार आरोपियों को दोषी माना
14 अगस्त 2023- सुनील उर्फ छोटू और जुनैद को उम्रकैद, आरिफ और करीमुद्दीन को छह छह साल की सजा
25 अगस्त 2023- पांचवें दोषी नाबालिग को उम्रकैद की सजा
02 सितंबर 2023 - छठे दोषी नाबालिग को तीन साल की कैद
बिना वर्दी के पेश हुए पुलिस वाले
लखीमपुर खीरी। अदालत में नाबालिग अपराधियों के लिए बनाई गाइडलाइन के अनुसार, पेश होने वाले पुलिस बल को वर्दी में न आने के निर्देश दिए गए हैं। प्रधान मजिस्ट्रेट रवि पांडे ने बताया कि नाबालिग किशोर को लेकर आने वाले पुलिस बल की पुलिस यूनिफार्म न होने से अपचारी किशोर को मानसिक रूप से समृद्ध और विकसित होकर अपना पक्ष रखने का आत्मविश्वास मिलता है।
28 सितंबर 2022 - आरोप पत्र दाखिल किया गया।
29 सितंबर 2022- आरोप पत्र पर प्रसंज्ञान लिया गया।
30 सितंबर 2022- अभियुक्तगण पर आरोप तय किये गये।
03 अक्तूबर 2022- वास्ते साक्ष्य वादी मुकदमा माया देवी की मुख्य परीक्षा लिखी गयी।
07 अक्तूबर 2022- साक्षी उपस्थित बार संघ से विपरीत आदेश पारित न करने का प्रस्ताव।
11 से लेकर 29 अक्तूबर 2022- गवाहों से जिरह की गई।
31 अक्तूबर 2022- किशोर अपचारी प्रार्थना पत्र पर सुनवाई हुई।
01 नवम्बर 2022- अभियोजन गवाह-तीन रामपाल की मुख्य परीक्षा अंकित की गयी।
02 से 14 नवंबर तक- अभियोजन के गवाह सेजिरह की गई।
18 नवंबर 2022- अभियोजन गवाह एक की जिरह पूर्ण की गयी।
21 नवंबर 2022- अभियोजन गवाह दो से जिरह, अभियोजन गवाह दो से जिरह अभियुक्त जुनैद के जरिए की गयी।
23 नवंबर 2022- अभियोजन गवाह दो से जिरह पूरी की गयी। अभियोजन गवाह चार, कांस्टेबिल शुभम रावत की मुख्य परीक्षा लिखी गयी।
24 नवंबर 2022- अभियुक्त छोटू उर्फ सुनील का जिरह का अवसर समाप्त किया गया।
23 मार्च 2023- प्रार्थना पत्र धारा 34 2 पाक्सो एक्ट निरस्त किया गया।
11 अप्रैल 2023- अभियोजन द्वारा शेष साक्षीगणों को छोड़ने का प्रार्थना पत्र दिया गया, और अभियोजन साक्ष्य को समाप्त किया।
24 अप्रैल 2023- अभियुक्तों के बयान के अन्तर्गत धारा 313 बनाये गये।
27 अप्रैल 2023- अभियुक्तों को साक्ष्य का अवसर दिया गया जिसमें बचाव पक्ष की गवाह एक सरोजनी का साक्ष्य अंकित किया गया।
01 मई 2023 से 18 मई 2023 तक बचाव पक्ष द्वारा कोई सफाई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया।
19 मई 2023- अभियुक्त जुनैद द्वारा धारा 293 के तहत विधि विज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ के वैज्ञानिकों कोतलबी का प्रार्थना पत्र दिया जिसे न्यायालय ने निरस्त कर दिया। तक अभियुक्त के अधिवक्ता ने सफाई साक्ष्य समाप्त किया।
20 मई 2023- अभियुक्त सुनील उर्फ छोटू के अधिवक्ता ने सफाई साक्ष्य समाप्त किये।
22 मई 2023- अभियोजन पक्ष ने बहस शुरू की।
31 मई 2023- अभियोजन बहस समाप्त हुई।
12 जून 2023- अभियुक्त सुनील उर्फ छोटू की तरफ से बहस शुरू हुई।
17 जून 2023- अभियुक्त सुनील उर्फ छोटू की तरफ से बहस पूरी हुई।
20 जून 2023- अभियुक्त जुनैद व सुहैल की तरफ से बहस शुरू की।
07 अगस्त 2023- आरिफ व करीमुद्दीन की बहस शुरू हुई व सुहैल की बहस पूरी।
11 अगस्त 2023- अदालत ने चार आरोपियों को दोषी माना
14 अगस्त 2023- सुनील उर्फ छोटू और जुनैद को उम्रकैद, आरिफ और करीमुद्दीन को छह छह साल की सजा
25 अगस्त 2023- पांचवें दोषी नाबालिग को उम्रकैद की सजा
02 सितंबर 2023 - छठे दोषी नाबालिग को तीन साल की कैद
बिना वर्दी के पेश हुए पुलिस वाले
लखीमपुर खीरी। अदालत में नाबालिग अपराधियों के लिए बनाई गाइडलाइन के अनुसार, पेश होने वाले पुलिस बल को वर्दी में न आने के निर्देश दिए गए हैं। प्रधान मजिस्ट्रेट रवि पांडे ने बताया कि नाबालिग किशोर को लेकर आने वाले पुलिस बल की पुलिस यूनिफार्म न होने से अपचारी किशोर को मानसिक रूप से समृद्ध और विकसित होकर अपना पक्ष रखने का आत्मविश्वास मिलता है।