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खादी उतार कुर्ता जींस पहनकर नेताजी चमका रहे राजनीति
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लखीमपुर खीरी। कुछ साल पहले तक चुनावी सीजन में खादी कपड़ों की खूब मांग रहती थी। नेता खादी का कुर्ता-पायजामा पहनकर क्षेत्र भ्रमण पर निकलते थे। खादी पहनना देश भक्ति की पहचान थी। मगर, बदलते दौर में खादी वस्त्रों को लेकर नेताओं की सोच बिल्कुल अलग है। विधायक से लेकर अन्य तमाम नेता खादी का कुर्ता पायजामा छोड़कर जींस और ब्रांडेड कुर्ता के साथ जैकेट पहनने लगे हैं। ऐसे में चुनावी मौसम होने के बावजूद खादी की दुकानों पर सन्नाटा पसरा है।
स्वतंत्रता आंदोलनों से लेकर आजादी के बाद एक लंबे समय तक खादी हर वर्ग की खूब भाती रही। खासकर चुनाव के वक्त तो खादी की दुकानों पर नेताओं से लेकर उनके करीबियों की भीड़ लग जाती थी। खादी विक्रेताओं का कहना है कि एक दौर तो वह था कि दुकान खोलने के लिए जब आते थे तो ग्राहक पहले से खड़े मिलते थे। मगर, बदलते दौर में अब नेताओं का भी खादी से मोहभंग होने लगा है। खादी की जगह स्टाइलिश चिकन, कॉटन के कपड़े, ब्रांडेड कंपनियों की जींस और जैकेट ने ले ली। नेताओं ने भी कुर्ता धोती पहनना छोड़कर जींस और कुर्ता पहने लगे हैं। यही कारण है कि चुनावी सीजन में भी खादी की दुकानों पर ग्राहक नहीं है।
.......
धोती कुर्ता भी चलन से हो रहा बाहर
एक दशक पहले नेताओं की पहचान कुर्ता धीती के साथ नेहरू वाली टोपी हुआ करती थी, लेकिन समय के साथ नेताओं की पोशाक भी बदलती रही। धोती कुर्ता छोड़कर नेताओं ने कुर्ता पायजामा पहनना शुरू किया और फिर धीरे धीरे पायजामा की जगह पैंट ने ले ली। इधर कुछ सालों से नेताजी कुर्ता के साथ जींस पहनने लगे हैं। वह भी ब्रांडेड।
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खादी- कीमत प्रति मीटर
पोली- 112 से 260
रेशम, मटका, कटिया- 665 से 1500
कोटिंग- 180 से 200
शूटिंग-385 से 400
शर्टिंग- 126 से 150
विभिन्न खादी की दुकानों से मूल्य लिए गए हैं।
चुनावी मौसम शुरू हो चुका है। दिनभर खरीदारों का इंतजार है। ये हालात तब हैं जब चुुनाव के दौरान खादी वस्त्रों पर 30 प्रतिशत तक की छूट चल रही है।
- सुभाष चंद्र मिश्रा, खादी वस्त्र विक्रेता मिश्राना
पहले चुनाव के दौरान खादी वस्त्रों की मांग बढ़ जाती थी। नेता से लेकर उनके साथ रहने वाले लोग भी कुर्ता पायजामा या फिर पैंट के लिए कपड़े खरीदते थे। मगर, इस समय चुनाव के दौरान भी बाजार सुस्त है।
- मोहन जी शुक्ला, खादी वस्त्र विक्रेता मेन रोड
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स्वतंत्रता आंदोलनों से लेकर आजादी के बाद एक लंबे समय तक खादी हर वर्ग की खूब भाती रही। खासकर चुनाव के वक्त तो खादी की दुकानों पर नेताओं से लेकर उनके करीबियों की भीड़ लग जाती थी। खादी विक्रेताओं का कहना है कि एक दौर तो वह था कि दुकान खोलने के लिए जब आते थे तो ग्राहक पहले से खड़े मिलते थे। मगर, बदलते दौर में अब नेताओं का भी खादी से मोहभंग होने लगा है। खादी की जगह स्टाइलिश चिकन, कॉटन के कपड़े, ब्रांडेड कंपनियों की जींस और जैकेट ने ले ली। नेताओं ने भी कुर्ता धोती पहनना छोड़कर जींस और कुर्ता पहने लगे हैं। यही कारण है कि चुनावी सीजन में भी खादी की दुकानों पर ग्राहक नहीं है।
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धोती कुर्ता भी चलन से हो रहा बाहर
एक दशक पहले नेताओं की पहचान कुर्ता धीती के साथ नेहरू वाली टोपी हुआ करती थी, लेकिन समय के साथ नेताओं की पोशाक भी बदलती रही। धोती कुर्ता छोड़कर नेताओं ने कुर्ता पायजामा पहनना शुरू किया और फिर धीरे धीरे पायजामा की जगह पैंट ने ले ली। इधर कुछ सालों से नेताजी कुर्ता के साथ जींस पहनने लगे हैं। वह भी ब्रांडेड।
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खादी- कीमत प्रति मीटर
पोली- 112 से 260
रेशम, मटका, कटिया- 665 से 1500
कोटिंग- 180 से 200
शूटिंग-385 से 400
शर्टिंग- 126 से 150
विभिन्न खादी की दुकानों से मूल्य लिए गए हैं।
चुनावी मौसम शुरू हो चुका है। दिनभर खरीदारों का इंतजार है। ये हालात तब हैं जब चुुनाव के दौरान खादी वस्त्रों पर 30 प्रतिशत तक की छूट चल रही है।
- सुभाष चंद्र मिश्रा, खादी वस्त्र विक्रेता मिश्राना
पहले चुनाव के दौरान खादी वस्त्रों की मांग बढ़ जाती थी। नेता से लेकर उनके साथ रहने वाले लोग भी कुर्ता पायजामा या फिर पैंट के लिए कपड़े खरीदते थे। मगर, इस समय चुनाव के दौरान भी बाजार सुस्त है।
- मोहन जी शुक्ला, खादी वस्त्र विक्रेता मेन रोड