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नेपाल में ठहर गया जनजीवन
धनगढ़ी-नेपाल
Updated Mon, 23 Nov 2015 11:18 PM IST
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पिछले तीन माह से नेपाल में मधेसी और थारुओं के आंदोलन के चलते पेट्रोलियम पदार्थ, गैस और खाद्य सामग्री का अभाव बना है। इसके चलते सामग्री के भाव आसमान छू रहे हैं। वहीं जनजीवन अस्त-व्यस्त है और लोग परेशान हैं।
नेपाल में संविधान की घोषणा के बाद से ही मधेसी और थारूओं ने अपनी-अपनी मांगों को लेकर जगह-जगह धरना-प्रदर्शन शुरू कर रखा है। मधेसी सोनोली बार्डर पर स्थाई रूप से धरना दे रहे है।
मधेसियों के उग्र प्रदर्शन के चलते भारतीय ट्रक नेपाल न जाकर भारतीय सीमा पर खड़े हैं। नाकाबंदी के चलते नेपाल को सामग्री की आपूर्ति न होने से नेपाल में चारों ओर हाहाकार मचा है। भारत से खाद्य सामग्री और दैनिक उपभोग की वस्तुएं न पहुंचने से उनके भाव आसमान छू रहे हैं। वहीं पेट्रोल-डीजल, गैस की किल्लत बनी हुई है। धनगढ़ी से पहाड़ी जिलों और काठमांडू के लिए जाने वाली बसें भी नाममात्र को ही जा रहीं हैं। पेट्रोल-डीजल के लिए बसों व अन्य वाहनों की लंबी कतार दो-दो दिनों तक लगी रहती हैं। इधर कैलाली जिले में पेट्रोलियम पदार्थ की आपूर्ति आधी हो रही है जिसमें से कुछ स्टॉक काठमांडू के लिए भेज रहे हैं। इसके चलते यहां यह स्थिति बनी हुई है। मधेसी आंदोलन के 101 दिन बीत चुके हैं और 59 लोगों की जान भी जा चुकीं हैं । नेपाल सरकार से उनकी कई दौर वार्ता के बाद भी कोई हल नहीं निकला है और आंदोलन जारी है।
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महंगाई चरम पर
पेट्रोलियम पदार्थ की आपूर्ति न के बराबर होने से धनगढ़ी सहित सीमावर्ती भारतीय ग्रामों में पेट्रोल-डीजल सौ से 250 रुपये तक बिक्री हो रहा है। पेट्रोल-डीजल की कमी से ज्यादातर वाहन खड़े हो गए हैं और जो महंगे दामों पर पेट्रोल-डीजल लेकर चल रहे हैं उन्होंने किराया बढ़ा दिया है। बसों और हवाई जहाज का किराया दोगुना हो गया है और खाद भी दो हजार रुपये बोरी तक बिक रही है।
पहाड़ों पर हालात और बुरे
आंदोलन के चलते पहाड़ों पर हालात और खराब हो गए हैं। खाद्य वस्तुओं और दवाओं का अभाव यहां सबसे ज्यादा है बना है। अस्पतालों में भी दवाओं की किल्लत से मरीजों को खासी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।।
पर्यटन पर भी असर
मधेसी और थारुओं के आंदोलन के लगातार जारी रहने से पर्यटन पर खासा असर पड़ा है। आंदोलन के चलते भारत समेत अन्य देशों के पर्यटक नेपाल नहीं आ रहे हैं।
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नेपाल में संविधान की घोषणा के बाद से ही मधेसी और थारूओं ने अपनी-अपनी मांगों को लेकर जगह-जगह धरना-प्रदर्शन शुरू कर रखा है। मधेसी सोनोली बार्डर पर स्थाई रूप से धरना दे रहे है।
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मधेसियों के उग्र प्रदर्शन के चलते भारतीय ट्रक नेपाल न जाकर भारतीय सीमा पर खड़े हैं। नाकाबंदी के चलते नेपाल को सामग्री की आपूर्ति न होने से नेपाल में चारों ओर हाहाकार मचा है। भारत से खाद्य सामग्री और दैनिक उपभोग की वस्तुएं न पहुंचने से उनके भाव आसमान छू रहे हैं। वहीं पेट्रोल-डीजल, गैस की किल्लत बनी हुई है। धनगढ़ी से पहाड़ी जिलों और काठमांडू के लिए जाने वाली बसें भी नाममात्र को ही जा रहीं हैं। पेट्रोल-डीजल के लिए बसों व अन्य वाहनों की लंबी कतार दो-दो दिनों तक लगी रहती हैं। इधर कैलाली जिले में पेट्रोलियम पदार्थ की आपूर्ति आधी हो रही है जिसमें से कुछ स्टॉक काठमांडू के लिए भेज रहे हैं। इसके चलते यहां यह स्थिति बनी हुई है। मधेसी आंदोलन के 101 दिन बीत चुके हैं और 59 लोगों की जान भी जा चुकीं हैं । नेपाल सरकार से उनकी कई दौर वार्ता के बाद भी कोई हल नहीं निकला है और आंदोलन जारी है।
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महंगाई चरम पर
पेट्रोलियम पदार्थ की आपूर्ति न के बराबर होने से धनगढ़ी सहित सीमावर्ती भारतीय ग्रामों में पेट्रोल-डीजल सौ से 250 रुपये तक बिक्री हो रहा है। पेट्रोल-डीजल की कमी से ज्यादातर वाहन खड़े हो गए हैं और जो महंगे दामों पर पेट्रोल-डीजल लेकर चल रहे हैं उन्होंने किराया बढ़ा दिया है। बसों और हवाई जहाज का किराया दोगुना हो गया है और खाद भी दो हजार रुपये बोरी तक बिक रही है।
पहाड़ों पर हालात और बुरे
आंदोलन के चलते पहाड़ों पर हालात और खराब हो गए हैं। खाद्य वस्तुओं और दवाओं का अभाव यहां सबसे ज्यादा है बना है। अस्पतालों में भी दवाओं की किल्लत से मरीजों को खासी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।।
पर्यटन पर भी असर
मधेसी और थारुओं के आंदोलन के लगातार जारी रहने से पर्यटन पर खासा असर पड़ा है। आंदोलन के चलते भारत समेत अन्य देशों के पर्यटक नेपाल नहीं आ रहे हैं।