आंख मूंदकर मानकविहीन स्कूल बना दिए परीक्षा केंद्र
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प्रदेश सरकार के नकल विहीन परीक्षा कराने के संकल्प को ताक पर रखकर जिले में चहेते स्कूलों को परीक्षा केंद्र बना दिया गया है। तीन स्कूलों के मामलों की शिकायत अधिकारियों से की गई तो मामला सामने आया। खास बात यह है कि मानकों की परवाह किए बगैर स्कूल संचालकों की सूचनाओं पर आंख मूंदकर डीआईओरएस ने भी रिपोर्ट लगा दी, जिससे मानक पूरे न करने वाले स्कूल भी परीक्षा केंद्र बना दिए गए। रानी लक्ष्मी बाई कन्या इंटर कॉलेज, शहाबुद्दीनपुर के प्रबंधक संजय वर्मा का आरोप है कि इसका विरोध करने पर उन्हें उनके स्कूल की मान्यता खत्म करने की धमकी दी गई। आरोप है कि उनका स्कूल पिछले कई वर्षों से परीक्षा सेंटर था। सभी मानक पूरे होने के बाद भी इस बार उनके स्कूल का सेंटर काट दिया गया। बताते हैं कि उनकी शिकायत के बाद हुई जांच में दी गई डीआईओएस आरके जायसवाल और एसडीएम गोला की रिपोर्ट भी विरोधाभाषी है। इसी से डीआईओएस की सत्यापन रिपोर्ट भी गलत प्रतीत होती है।
संजय वर्मा ने बीते दिनों एक बार फिर डीएम से शिकायत की है। अब उनका आरोप है कि एसडीएम की जांच के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई। इस पर डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह ने बीएसए बुद्धप्रिय सिंह और एसडीएम गोला योगानंद पांडेय को संयुक्त जांच सौंपी है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि शाहजहांपुर जनपद के बॉर्डर पर स्थित नालंदा पब्लिक शिक्षण संस्थान इंटर कॉलेज मछेछा मोहम्मदी में कुछ कमरे बन चुके हैं, जबकि कुछ निर्माणाधीन हैं। शिकायत में कहा गया है कि पांच कमरे बिना दरवाजे के हैं, जिसमें बैठने की कोई व्यवस्था नहीं है। कुछ पर टिन पड़ी है। स्कूल में न बिजली, न पानी, न सीसीटीवी कैमरा और न छात्र, लेकिन डीआईओएस की रिपोर्ट में छह सौ परीक्षार्थियों के बैठने का स्थान दिखाया गया। प्रधानाचार्य शिवशंकर लाल का कहना है कि ऑनलाइन आवेदन के समय कुछ कमियां थीं, जिन्हें नियमानुसार परीक्षा से पहले पूर्ण किया जा रहा है। वहीं जहीर हसन अल्पसंख्यक इंटर कॉलेज अमीरनगर में पांच कमरे हैं, बाकी अन्य पांच कमरों पर खपरैल पड़ा हुआ है। कुल दस कमरे हैं, जबकि डीआईओएस ने बीस कमरों की रिपोर्ट लगाई है। मानक के अनुरूप यहां भी कुछ नहीं है। मौके पर पड़ताल की गई तो पक्के कमरे मिले, जिन पर लिंटर पड़ा है। इसके अलावा पांच कमरों पर खपरैल मिली। इस बाबत प्रबंधक मोहम्मद यूनुस खां का कहना है कि खपरैल में अब शिक्षण कार्य नहीं होता। केंद्र के लिहाज से सभी व्यवस्थाएं पूर्ण कर ली गई हैं।
उधर, गुरुकुल विद्यापीठ इंटर कॉलेज मढ़िया भीखमपुर ने आवेदन में नजदीक के स्कूल को न दर्शाकर दूर का स्कूल दर्शाया है, जबकि कमरों की संख्या भी अधिक दर्शाई गई है। यहां पर न तो शौचालय, बिजली व्यवस्था है और न ही चारदीवारी है। पहली बार यहां पर केंद्र बना है, जबकि 2015 में इस स्कूल की मान्यता मिली है। नियम है कि जब तक परिषदीय परीक्षा न हुई हो सेंटर नहीं बन सकता है। इस बाबत प्रबंधक धमेंद्र कुमार का कहना है कि आरोप निराधार है। परीक्षा केंद्र के लिहाज से स्कूल में सभी मानक पूरे हैं। फिलहाल, इन सेंटरों पर परीक्षा कैसे होगी, यह सवाल जरूर उठ रहे हैं।
परीक्षा केंद्र बनाने का निर्धारण इलाहाबाद बोर्ड से किया गया है। स्थानीय स्तर पर इसमें कोई फेरबदल नहीं हो सकता है।
- आर के जायसवाल, डीआईओएस
परीक्षा केंद्र पर डीआईओएस स्तर से गड़बड़ी की शिकायत मिली थी। प्रश्नगत प्रकरण की संयुक्त जांच के लिए बीएसए और एसडीएम गोला को नामित किया गया है। एक सप्ताह में समस्त बिंदुओं की जांच आख्या देने का निर्देश दिया गया है।
- शैलेंद्र कुमार सिंह, डीएम