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खतरे में नौनिहालः तराई के ब्लॉकों में सबसे ज्यादा कुपोषण की मार
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अत्यधिक गंभीर अल्प वजन (सैम) की श्रेणी में धौरहरा में सबसे अधिक 285 बच्चे
जिले में 11 हजार बच्चे अतिकुपोषित मिले, 37 हजार बच्चे मध्यम कुपोषण का शिकार
गांवों में वजन सप्ताह कार्यक्रम चलाकर जीरो से पांच वर्ष तक के बच्चों की कराई जा रही है जांच
लखीमपुर खीरी। कुपोषण की सबसे ज्यादा मार तराई क्षेत्र के ब्लॉकों में है। गांवों में आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से वजन सप्ताह कार्यक्रम चलाकर जीरो से पांच वर्ष तक के बच्चों की जांच कराई गई है। इसमें जिले में 11 हजार बच्चे अतिकुपोषित मिले हैं, जबकि 37 हजार बच्चे मध्यम कुपोषण का शिकार हैं। अत्यधिक गंभीर अल्प वजन (सैम) की श्रेणी में धौरहरा में सबसे अधिक 285 बच्चे हैं।
कुपोषण से ग्रसित बच्चों में बाल्यावस्था की बीमारियां एवं उनसे होने वाली मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है। कुपोषण की सबसे गंभीर श्रेणी में सैम, मैम, अतिकुपोषित (लाल), मध्यम कुपोषित (पीले) को रखा गया है। ऐसे कुपोषित बच्चों की पहचान करने के लिए बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग ने 17 से 24 जून 2021 के मध्य सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर जीरो से पांच वर्ष के बच्चों के लिए वजन सप्ताह चलाया गया, जिसमें वजन और लंबाई/ ऊंचाई लेकर बच्चों के स्वास्थ्य की जांच की गई। कुल 3,33,475 में से 2,98,038 बच्चों का वजन लिया गया है। इसमें 1308 बच्चे सैम श्रेणी के मिले हैं, जबकि 10,812 बच्चे मैम (मध्यम गंभीर अल्प वजन) श्रेणी के पाए गए हैं। 11,487 बच्चे अतिकुुपोषित (लाल) श्रेणी के पाए गए हैं और 37,102 बच्चे मध्यम कुपोषित (पीले) श्रेणी के पाए गए हैैं।
सैम श्रेणी के धौरहरा में सबसे अधिक 285 बच्चे, निघासन में 104, फूलेबहड़ में 106, रमियाबेहड़ में 196, नकहा में 89 बच्चे मिले हैं, जिन्हें तुरंत नियमित इलाज की जरूरत हैै। इसके अलावा अन्य ब्लॉकों बेहजम में 75, मितौली में 71, पसगवां में 98, गोला में 31, पलिया में 45, बांकेगंज में 29 बच्चे सैम श्रेणी के मिले हैं।
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273 बच्चे दिव्यांग मिले
वजन सप्ताह के दौरान विभिन्न ब्लॉक क्षेत्रों के गांवों में 273 बच्चे दिव्यांग मिले हैं, जिनमें अलग-अलग तरह की शारीरिक अक्षमता है। सबसे ज्यादा 42 दिव्यांग सदर ब्लॉक के गांवों में मिले हैं। बेहजम में 35, गोला में 33, फूलबेहड़ में 37, रमियाबेहड़ में 28, ईसानगर में 35, नकहा में 14, शहर में 12, पलिया में 10 बच्चे दिव्यांग हैं।
कुपोषण की रोकथाम के लिए संभव-पोषण से संवर्धन की ओर एक कदम अभियान एक जुलाई से दो अक्तूबर 2021 के मध्य चलाया जाएगा। चिन्हित किए बच्चों को चिकित्सीय उपचार के लिए पोषण पुनर्वास केंद्र भेजा जाएगा। सैम, मैम, गंभीर अल्प वजन बच्चों की पोषण स्थिति में सुधार लाया जाएगा। जरूरतमंद परिवारों को शौचालय, राशनकार्ड, जॉबकार्ड बनवाए जाएंगे और इच्छुक परिवारों को गाय दिलाई जाएगी। - सुनील कुमार श्रीवास्तव, जिला कार्यक्रम अधिकारी
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जिले में 11 हजार बच्चे अतिकुपोषित मिले, 37 हजार बच्चे मध्यम कुपोषण का शिकार
गांवों में वजन सप्ताह कार्यक्रम चलाकर जीरो से पांच वर्ष तक के बच्चों की कराई जा रही है जांच
लखीमपुर खीरी। कुपोषण की सबसे ज्यादा मार तराई क्षेत्र के ब्लॉकों में है। गांवों में आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से वजन सप्ताह कार्यक्रम चलाकर जीरो से पांच वर्ष तक के बच्चों की जांच कराई गई है। इसमें जिले में 11 हजार बच्चे अतिकुपोषित मिले हैं, जबकि 37 हजार बच्चे मध्यम कुपोषण का शिकार हैं। अत्यधिक गंभीर अल्प वजन (सैम) की श्रेणी में धौरहरा में सबसे अधिक 285 बच्चे हैं।
कुपोषण से ग्रसित बच्चों में बाल्यावस्था की बीमारियां एवं उनसे होने वाली मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है। कुपोषण की सबसे गंभीर श्रेणी में सैम, मैम, अतिकुपोषित (लाल), मध्यम कुपोषित (पीले) को रखा गया है। ऐसे कुपोषित बच्चों की पहचान करने के लिए बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग ने 17 से 24 जून 2021 के मध्य सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर जीरो से पांच वर्ष के बच्चों के लिए वजन सप्ताह चलाया गया, जिसमें वजन और लंबाई/ ऊंचाई लेकर बच्चों के स्वास्थ्य की जांच की गई। कुल 3,33,475 में से 2,98,038 बच्चों का वजन लिया गया है। इसमें 1308 बच्चे सैम श्रेणी के मिले हैं, जबकि 10,812 बच्चे मैम (मध्यम गंभीर अल्प वजन) श्रेणी के पाए गए हैं। 11,487 बच्चे अतिकुुपोषित (लाल) श्रेणी के पाए गए हैं और 37,102 बच्चे मध्यम कुपोषित (पीले) श्रेणी के पाए गए हैैं।
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सैम श्रेणी के धौरहरा में सबसे अधिक 285 बच्चे, निघासन में 104, फूलेबहड़ में 106, रमियाबेहड़ में 196, नकहा में 89 बच्चे मिले हैं, जिन्हें तुरंत नियमित इलाज की जरूरत हैै। इसके अलावा अन्य ब्लॉकों बेहजम में 75, मितौली में 71, पसगवां में 98, गोला में 31, पलिया में 45, बांकेगंज में 29 बच्चे सैम श्रेणी के मिले हैं।
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273 बच्चे दिव्यांग मिले
वजन सप्ताह के दौरान विभिन्न ब्लॉक क्षेत्रों के गांवों में 273 बच्चे दिव्यांग मिले हैं, जिनमें अलग-अलग तरह की शारीरिक अक्षमता है। सबसे ज्यादा 42 दिव्यांग सदर ब्लॉक के गांवों में मिले हैं। बेहजम में 35, गोला में 33, फूलबेहड़ में 37, रमियाबेहड़ में 28, ईसानगर में 35, नकहा में 14, शहर में 12, पलिया में 10 बच्चे दिव्यांग हैं।
कुपोषण की रोकथाम के लिए संभव-पोषण से संवर्धन की ओर एक कदम अभियान एक जुलाई से दो अक्तूबर 2021 के मध्य चलाया जाएगा। चिन्हित किए बच्चों को चिकित्सीय उपचार के लिए पोषण पुनर्वास केंद्र भेजा जाएगा। सैम, मैम, गंभीर अल्प वजन बच्चों की पोषण स्थिति में सुधार लाया जाएगा। जरूरतमंद परिवारों को शौचालय, राशनकार्ड, जॉबकार्ड बनवाए जाएंगे और इच्छुक परिवारों को गाय दिलाई जाएगी। - सुनील कुमार श्रीवास्तव, जिला कार्यक्रम अधिकारी