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Lakhimpur Kheri News: खतरे में नाैनिहाल... जर्जर भवनों में चल रहीं परिषदीय स्कूलों में कक्षाएं
Sun, 27 Jul 2025 11:55 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sun, 27 Jul 2025 11:55 PM IST
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पूर्व माध्यमिक विद्यालय गलरई की क्षतिग्रस्त छत- संवाद
लखीमपुर खीरी। परिषदीय स्कूलों में खतरे के बीच नाैनिहाल पढ़ाई के लिए मजबूर हैं। जर्जर भवनों में ही लंबे समय से कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। पूर्व में जिले में कुल 626 स्कूलों को कंडम घोषित किया गया था। विभाग का दावा है, इनके ध्वस्तीकरण का कार्य पूरा करा लिया गया है। पड़ताल में ये दावा गलत निकला है।
बता दें कि शुक्रवार को राजस्थान के झाड़ावाड़ के एक स्कूली भवन की जर्जर छत गिरने से सात बच्चों की मौत हो गई थी, जबकि 29 बच्चे घायल हो गए थे। इस घटना के बाद भी जिले के अधिकारी नहीं चेते हैं। हाल यह है कि आज भी तमाम स्कूल जर्जर भवनों में चल रहे हैं।
शहर से सटे प्राथमिक विद्यालय नौरंगाबाद को ही देखें तो इसका भवन काफी पुराना हो चुका है। कई जगहों से प्लास्टर टूटकर गिर चुका है। दीवारों में दरारें आ चुकी हैं। बारिश में खतरे के बीच यहां पर करीब सौ बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। परिसर के भीतर ही आंगनबाड़ी केंद्र भी संचालित होती है।
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गलरई और ककराही विद्यालय की स्थिति भी खराब
बरबर। क्षेत्र के पूर्व माध्यमिक विद्यालय गलरई का भवन भी जर्जर हो चुका है। यहां के एक कमरे की छत का प्लास्टर गिर रहा है। इसी कमरे में बैठकर बच्चे पढ़ाई करते हैं। बच्चों की सुरक्षा के लिए शिक्षकों से लेकर अभिभावक तक हर वक्त चिंतित रहतेे हैं। परिजनों के मुताबिक, किसी भी समय कोई हादसा हो सकता है। पड़ताल के दौरान ककरही विद्यालय का हाल भी काफी बुरा दिखाई दिया। यहां के एक कमरे की दीवार में दरार पड़ चुकी थी। संवाद
बरसात में टपकता है पानी
खीरी टाउन। संविलियन विद्यालय खीरी टाउन द्वितीय और उच्च प्राथमिक विद्यालय बालक खीरी टाउन में स्कूल की बिल्डिंग जर्जर हाल में है। बरसात में जान जोखिम में डालकर विद्यालय में बच्चों को अध्यापक पढ़ाते हैं। उच्च प्राथमिक विद्यालय बालक के स्कूल का भवन जर्जर होने के साथ ही बरसात के दिनों में टपकने लगता है। इससे बरसात का सारा पानी कक्षा में भर जाता है। संविलियन उच्च प्राथमिक विद्यालय खीरी टाउन द्वितीय में बच्चों के कक्षा और प्रधानाचार्य का कक्ष जर्जर हालत में है। स्कूल का एक कमरा गिरा दिया गया था, तब से दूसरा कमरा नहीं बना। कमरे की जगह पर मलबा पड़ा हुआ है, जिससे हर समय बच्चों पर खतरा बना रहता है। नवागत प्रधानाचार्य निगार फारूकी ने बताया कि शनिवार को ही कक्षा पांच का प्लास्टर टूट कर गिरा है। गनीमत रही कि उस वक्त बच्चे कक्षा से बाहर थे। पूर्व में स्कूल की जर्जर छत के बारे में अधिकारियों को लिखित सूचना जा चुकी है। संवाद
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बता दें कि शुक्रवार को राजस्थान के झाड़ावाड़ के एक स्कूली भवन की जर्जर छत गिरने से सात बच्चों की मौत हो गई थी, जबकि 29 बच्चे घायल हो गए थे। इस घटना के बाद भी जिले के अधिकारी नहीं चेते हैं। हाल यह है कि आज भी तमाम स्कूल जर्जर भवनों में चल रहे हैं।
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शहर से सटे प्राथमिक विद्यालय नौरंगाबाद को ही देखें तो इसका भवन काफी पुराना हो चुका है। कई जगहों से प्लास्टर टूटकर गिर चुका है। दीवारों में दरारें आ चुकी हैं। बारिश में खतरे के बीच यहां पर करीब सौ बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। परिसर के भीतर ही आंगनबाड़ी केंद्र भी संचालित होती है।
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गलरई और ककराही विद्यालय की स्थिति भी खराब
बरबर। क्षेत्र के पूर्व माध्यमिक विद्यालय गलरई का भवन भी जर्जर हो चुका है। यहां के एक कमरे की छत का प्लास्टर गिर रहा है। इसी कमरे में बैठकर बच्चे पढ़ाई करते हैं। बच्चों की सुरक्षा के लिए शिक्षकों से लेकर अभिभावक तक हर वक्त चिंतित रहतेे हैं। परिजनों के मुताबिक, किसी भी समय कोई हादसा हो सकता है। पड़ताल के दौरान ककरही विद्यालय का हाल भी काफी बुरा दिखाई दिया। यहां के एक कमरे की दीवार में दरार पड़ चुकी थी। संवाद
बरसात में टपकता है पानी
खीरी टाउन। संविलियन विद्यालय खीरी टाउन द्वितीय और उच्च प्राथमिक विद्यालय बालक खीरी टाउन में स्कूल की बिल्डिंग जर्जर हाल में है। बरसात में जान जोखिम में डालकर विद्यालय में बच्चों को अध्यापक पढ़ाते हैं। उच्च प्राथमिक विद्यालय बालक के स्कूल का भवन जर्जर होने के साथ ही बरसात के दिनों में टपकने लगता है। इससे बरसात का सारा पानी कक्षा में भर जाता है। संविलियन उच्च प्राथमिक विद्यालय खीरी टाउन द्वितीय में बच्चों के कक्षा और प्रधानाचार्य का कक्ष जर्जर हालत में है। स्कूल का एक कमरा गिरा दिया गया था, तब से दूसरा कमरा नहीं बना। कमरे की जगह पर मलबा पड़ा हुआ है, जिससे हर समय बच्चों पर खतरा बना रहता है। नवागत प्रधानाचार्य निगार फारूकी ने बताया कि शनिवार को ही कक्षा पांच का प्लास्टर टूट कर गिरा है। गनीमत रही कि उस वक्त बच्चे कक्षा से बाहर थे। पूर्व में स्कूल की जर्जर छत के बारे में अधिकारियों को लिखित सूचना जा चुकी है। संवाद

पूर्व माध्यमिक विद्यालय गलरई की क्षतिग्रस्त छत- संवाद