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नागपंचमी आज : देवकली में होगा कालसर्प योग शांति महायज्ञ
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महंत प्रमोद दीक्षित
लखीमपुर खीरी। जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर महाभारत कालीन देवकली तीर्थ कालसर्प दोष के निदान के लिए भी जाना जाता है। देवकली तीर्थ पर पिछले 25 वर्षों से हर नागपंचमी के दिन कालसर्प योग शांति महायज्ञ का आयोजन हो रहा है। इसकी शुरुआत यहां चंद्रकला आश्रम की स्थापना करने वाले नेपाली बाबा ने की थी। तब से यहां यहां परंपरा अनवरत जारी है।
चंद्रकला आश्रम देवकली के मौजूदा महंत प्रमोद दीक्षित बताते हैं कि एक महीने पहले से ही कालसर्प दोष से ग्रसित जातकों का वैदिक ब्राह्मणों द्वारा जप एवं रजिस्ट्रेशन किया जा रहा हैं। इस वर्ष काल सर्प दोष निवारण के लिए 90 लोगों का पंजीकरण हो चुका हैं। कालसर्प शांति महायज्ञ की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी है। सोमवार 21 अगस्त को नागपंचमी है। इस मौके पर देवकली में कालसर्प महायज्ञ और कालसर्प दोष निवारण अनुष्ठान सामूहिक रूप से किया जाएगा।
क्या है काल सर्प दोष
पं. प्रमोद प्रमोद दीक्षित बताते हैं कि जन्म कुंडली के बारह भावों में विभिन्न ग्रहों की स्थितियां बनती हैं। इनके आधार पर विश्लेषण करने पर योग बनते हैं। इन्हीं योगों में एक स्थिति बनती हैं - काल सर्प दोष की। इस योग में राहु और केतु के बीच सभी ग्रह आते हैं। इसीलिए इन दोनों छाया ग्रहों का जातक के संपूर्ण भाग्य पर प्रभाव पड़ता है।
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12 प्रकार का होता है काल सर्प योग
प्रमोद दीक्षित बताते हैं कि कालसर्प योग प्रमुख 12 प्रकार का होता हैं और विभिन्न रूपों को जोड़कर 3456 प्रकार का पाया जाता हैं। 12 भावों के हिसाब से पूरे बारह कालसर्प योग बनते हैं।
1- अनंत कालसर्प योग
2- कुलिक कालसर्प योग
3- वासुकी कालसर्प योग
4- शंखपाल कालसर्प योग
5- पद्म कालसर्प योग
6- महापद्म कालसर्प योग
7- शेषनाग कालसर्प योग
8- विषाक्त कालसर्प योग
9- घातक कालसर्प योग
10- तक्षक कालसर्प योग
11- कर्कोटक कालसर्प योग
12- शंखनाद कालसर्प योग
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चंद्रकला आश्रम देवकली के मौजूदा महंत प्रमोद दीक्षित बताते हैं कि एक महीने पहले से ही कालसर्प दोष से ग्रसित जातकों का वैदिक ब्राह्मणों द्वारा जप एवं रजिस्ट्रेशन किया जा रहा हैं। इस वर्ष काल सर्प दोष निवारण के लिए 90 लोगों का पंजीकरण हो चुका हैं। कालसर्प शांति महायज्ञ की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी है। सोमवार 21 अगस्त को नागपंचमी है। इस मौके पर देवकली में कालसर्प महायज्ञ और कालसर्प दोष निवारण अनुष्ठान सामूहिक रूप से किया जाएगा।
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क्या है काल सर्प दोष
पं. प्रमोद प्रमोद दीक्षित बताते हैं कि जन्म कुंडली के बारह भावों में विभिन्न ग्रहों की स्थितियां बनती हैं। इनके आधार पर विश्लेषण करने पर योग बनते हैं। इन्हीं योगों में एक स्थिति बनती हैं - काल सर्प दोष की। इस योग में राहु और केतु के बीच सभी ग्रह आते हैं। इसीलिए इन दोनों छाया ग्रहों का जातक के संपूर्ण भाग्य पर प्रभाव पड़ता है।
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12 प्रकार का होता है काल सर्प योग
प्रमोद दीक्षित बताते हैं कि कालसर्प योग प्रमुख 12 प्रकार का होता हैं और विभिन्न रूपों को जोड़कर 3456 प्रकार का पाया जाता हैं। 12 भावों के हिसाब से पूरे बारह कालसर्प योग बनते हैं।
1- अनंत कालसर्प योग
2- कुलिक कालसर्प योग
3- वासुकी कालसर्प योग
4- शंखपाल कालसर्प योग
5- पद्म कालसर्प योग
6- महापद्म कालसर्प योग
7- शेषनाग कालसर्प योग
8- विषाक्त कालसर्प योग
9- घातक कालसर्प योग
10- तक्षक कालसर्प योग
11- कर्कोटक कालसर्प योग
12- शंखनाद कालसर्प योग

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