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Lakhimpur Kheri News: विद्यालयों के विलय मामले ने सांसद ने डीएम को लिखा पत्र
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लखीमपुर खीरी। जिले में प्राथमिक विद्यालयों के विलय और बंद के आदेश मामले में सांसद उत्कर्ष वर्मा ने डीएम को पत्र लिखा है। डीएम को लिखे पत्र में सांसद ने कहा है कि जिले में 3122 विद्यालय चिह्नित किए गए हैं। इसमें अब तक 49 विद्यालयों को बंद करने या अन्य विद्यालयों में मर्ज अथवा पेयर करने के आदेश दिए गए हैं।
यह निर्णय हजारों बच्चों और उनके परिवारों को सीधा प्रभावित करेगा। उन्होंने पत्र के माध्यम से जानकारियां मांगी है कि इस आदेश से प्रभावित विद्यार्थियों का आय स्तर के आधार पर वर्गीकरण, जातिगत वर्गीकरण में अनुसूचित, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और सामान्य वर्ग के कितने विद्यार्थी प्रभावित होंगे इसका स्पष्ट विवरण दें।
कुल प्रभावित बच्चों की संख्या तथा ग्राम वार और ब्लाॅकवार सूची, विद्यालय बंद होने के बाद वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था क्या प्रभावित की गई है, इसकी जानकारी दी जाए।
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उन्होंने यह भी जानकारी मांगी हैं कि क्या बच्चों के अभिभावकों से इस फैसले पर कोई लिखित सहमति या आपत्ति ली गई है? तो उन दस्तावेजों की प्रतियां प्रदान की जाएं।
जिन विद्यालयों को मर्ज किया गया है, उनके शिक्षकों, अनुदेशकों शिक्षामित्रों, रसोइयों व अन्य चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को किस विद्यालय में नियुक्त किया गया है। इनकी सूची उपलब्ध कराई जाए जिससे जनहित में पारदर्शिता के लिए शीघ्र भेजी जाएं।
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यह निर्णय हजारों बच्चों और उनके परिवारों को सीधा प्रभावित करेगा। उन्होंने पत्र के माध्यम से जानकारियां मांगी है कि इस आदेश से प्रभावित विद्यार्थियों का आय स्तर के आधार पर वर्गीकरण, जातिगत वर्गीकरण में अनुसूचित, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और सामान्य वर्ग के कितने विद्यार्थी प्रभावित होंगे इसका स्पष्ट विवरण दें।
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कुल प्रभावित बच्चों की संख्या तथा ग्राम वार और ब्लाॅकवार सूची, विद्यालय बंद होने के बाद वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था क्या प्रभावित की गई है, इसकी जानकारी दी जाए।
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उन्होंने यह भी जानकारी मांगी हैं कि क्या बच्चों के अभिभावकों से इस फैसले पर कोई लिखित सहमति या आपत्ति ली गई है? तो उन दस्तावेजों की प्रतियां प्रदान की जाएं।
जिन विद्यालयों को मर्ज किया गया है, उनके शिक्षकों, अनुदेशकों शिक्षामित्रों, रसोइयों व अन्य चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को किस विद्यालय में नियुक्त किया गया है। इनकी सूची उपलब्ध कराई जाए जिससे जनहित में पारदर्शिता के लिए शीघ्र भेजी जाएं।