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Lakhimpur Kheri News: गांव में महिला नेतृत्व की मिसाल बनी मोतीपुर गोशाला
Thu, 12 Mar 2026 11:38 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Thu, 12 Mar 2026 11:38 PM IST
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निघासन। तहसील क्षेत्र की ग्राम पंचायत मोतीपुर में संचालित गोशाला गांव में महिला नेतृत्व की मिसाल बनकर उभरी है। इस व्यवस्था ने न सिर्फ छुट्टा पशुओं की समस्या को काफी हद तक कम किया, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए।
ग्राम प्रधान रेनू और उनके पति कुलदीप सिंह पटेल उर्फ केडी ने गोशाला के लिए अपनी निजी दो एकड़ जमीन उपलब्ध कराई। अधिकारियों की सहमति के बाद यहां अस्थायी गोशाला का निर्माण कराया गया और अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के दिन भंडारे के साथ इसका शुभारंभ किया गया।
गोशाला में वर्तमान में करीब 400 गोवंश की देखभाल की जा रही है। पशुओं के लिए टिनशेड, तिरपाल से घेरा, पानी के लिए पंपिंग सेट और बैठने के लिए गन्ने की सूखी पत्तियों की व्यवस्था की गई। जंगली जानवरों से सुरक्षा के लिए फेंसिंग में हल्का करंट भी प्रवाहित किया गया है।
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गोशाला से निकलने वाले गोबर का उपयोग वर्मी कंपोस्ट खाद बनाने में किया जा रहा है, जिसमें स्वयं सहायता समूह की महिलाएं सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। आरआरसी सेंटर में स्थापित यूनिट में फिलहाल 12 महिलाएं काम कर रही हैं और इससे उन्हें अतिरिक्त आमदनी का स्रोत मिल रहा है।
स्वयं सहायता समूह की संचालक शीलू वर्मा ने बताया कि एक बार खाद तैयार करने में करीब 15 क्विंटल गोबर, एक क्विंटल राख, चार किलो गुड़, चार किलो बेसन और एक बोरी जैविक कल्चर का उपयोग होता है। लगभग 8,000 रुपये की लागत से तैयार खाद 15 दिनों में बनकर तैयार हो जाती है। इसकी बिक्री से करीब 15 हजार रुपये तक की आय हो जाती है। फिलहाल छह टैंकों की क्षमता के साथ उत्पादन लगातार जारी है।
समूह का लक्ष्य भविष्य में करीब 400 महिलाओं को इस कार्य से जोड़ने का है, ताकि अधिक से अधिक परिवारों को रोजगार और स्थायी आय का साधन मिल सके। ग्रामीणों का कहना है कि इस पहल से जहां फसल नुकसान में कमी आई है, वहीं जैविक खाद मिलने से खेती की गुणवत्ता में भी सुधार हो रहा है।
जिला पशु चिकित्सा अधिकारी दिनेश सचान के अनुसार जिले में कुल 145 गोशालाएं संचालित हैं, जिनमें 127 अस्थायी और आठ स्थायी हैं। मोतीपुर गोशाला को और सुदृढ़ बनाने के लिए सोलर पंपिंग सेट लगाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
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सीता-गीता की पुकार सुनकर प्रतिक्रिया देती हैं गाय
मोतीपुर गोशाला में कुछ गायों के साथ ग्रामीणों का खास लगाव बन गया है। देखभाल करने वाले लोग उन्हें सीता, गीता और सोनू जैसे नामों से पुकारते हैं। ग्रामीण बताते हैं कि जब इन नामों से आवाज लगाई जाती है तो कई गायें तुरंत सिर घुमाकर देखने लगती हैं या आवाज की दिशा में बढ़ आती हैं। रोजाना देखभाल और स्नेह के कारण पशु अब लोगों को पहचानने लगे हैं।
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ग्राम प्रधान रेनू और उनके पति कुलदीप सिंह पटेल उर्फ केडी ने गोशाला के लिए अपनी निजी दो एकड़ जमीन उपलब्ध कराई। अधिकारियों की सहमति के बाद यहां अस्थायी गोशाला का निर्माण कराया गया और अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के दिन भंडारे के साथ इसका शुभारंभ किया गया।
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गोशाला में वर्तमान में करीब 400 गोवंश की देखभाल की जा रही है। पशुओं के लिए टिनशेड, तिरपाल से घेरा, पानी के लिए पंपिंग सेट और बैठने के लिए गन्ने की सूखी पत्तियों की व्यवस्था की गई। जंगली जानवरों से सुरक्षा के लिए फेंसिंग में हल्का करंट भी प्रवाहित किया गया है।
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गोशाला से निकलने वाले गोबर का उपयोग वर्मी कंपोस्ट खाद बनाने में किया जा रहा है, जिसमें स्वयं सहायता समूह की महिलाएं सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। आरआरसी सेंटर में स्थापित यूनिट में फिलहाल 12 महिलाएं काम कर रही हैं और इससे उन्हें अतिरिक्त आमदनी का स्रोत मिल रहा है।
स्वयं सहायता समूह की संचालक शीलू वर्मा ने बताया कि एक बार खाद तैयार करने में करीब 15 क्विंटल गोबर, एक क्विंटल राख, चार किलो गुड़, चार किलो बेसन और एक बोरी जैविक कल्चर का उपयोग होता है। लगभग 8,000 रुपये की लागत से तैयार खाद 15 दिनों में बनकर तैयार हो जाती है। इसकी बिक्री से करीब 15 हजार रुपये तक की आय हो जाती है। फिलहाल छह टैंकों की क्षमता के साथ उत्पादन लगातार जारी है।
समूह का लक्ष्य भविष्य में करीब 400 महिलाओं को इस कार्य से जोड़ने का है, ताकि अधिक से अधिक परिवारों को रोजगार और स्थायी आय का साधन मिल सके। ग्रामीणों का कहना है कि इस पहल से जहां फसल नुकसान में कमी आई है, वहीं जैविक खाद मिलने से खेती की गुणवत्ता में भी सुधार हो रहा है।
जिला पशु चिकित्सा अधिकारी दिनेश सचान के अनुसार जिले में कुल 145 गोशालाएं संचालित हैं, जिनमें 127 अस्थायी और आठ स्थायी हैं। मोतीपुर गोशाला को और सुदृढ़ बनाने के लिए सोलर पंपिंग सेट लगाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
सीता-गीता की पुकार सुनकर प्रतिक्रिया देती हैं गाय
मोतीपुर गोशाला में कुछ गायों के साथ ग्रामीणों का खास लगाव बन गया है। देखभाल करने वाले लोग उन्हें सीता, गीता और सोनू जैसे नामों से पुकारते हैं। ग्रामीण बताते हैं कि जब इन नामों से आवाज लगाई जाती है तो कई गायें तुरंत सिर घुमाकर देखने लगती हैं या आवाज की दिशा में बढ़ आती हैं। रोजाना देखभाल और स्नेह के कारण पशु अब लोगों को पहचानने लगे हैं।