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Lakhimpur Kheri News: बाढ़ की चपेट में 60 से अधिक गांव, दो प्रमुख मार्गों पर आवागमन थमा, ट्रेनें निरस्त
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बिजुआ क्षेत्र में बझेड़ा तटबंध कटने के बाद का नजारा- संवाद
लखीमपुर खीरी। बारिश और बैराज से छोड़े गए पानी से उफनाई शारदा, घाघरा और मोहाना नदियों का पानी 60 से अधिक गांवों में घुस गया है। नदी का पानी सड़क पर बहने से पलिया-भीरा मार्ग पर दो दिन के लिए आवागमन रोक दिया गया है। संपूर्णानगर-खजुरिया में भी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगी। मैलानी-पलिया रूट की ट्रेनों को निरस्त कर दिया गया है। उधर, मोहाना नदी का पानी रपटा पुल पर बह रहा है। बनबसा बैराज से छोड़ा गया पौने चार लाख क्यूसेक पानी देर रात शारदा में आने के बाद और तबाही मचा सकता है।
धौरहरा तहसील क्षेत्र के रामलोक, कैरातीपुरवा सहित करीब 20 गांवों में बाढ़ का पानी भर गया था, जो अब धीरे-धीरे कम हो रहा है। हालांकि अभी खतरा कम नहीं है। धौरहरा के गुलरिया तालुके, अमेठी, अग्घरा, परौरी आदि गांवों को बचाने के लिए साढ़े पांच करोड़ की परियोजना पहली बार में ही बिखरने लगी। नदी ने अब किसानों की जमीनों को निगलना शुरू कर दिया है।
कटान से अमेठी के राममनोहर लाल और विशुननाथ की करीब दो एकड़ कृषि योग्य भूमि नदी में समा गई। ईसानगर ब्लॉक के कैरातीपुरवा और हटवा बंधे में भी दरारें आ चुकी हैं। धौरहरा के कैरातीपुरवा गांव में एसडीएम राजेश कुमार ने लेखपाल शशांक शुक्ला के साथ बाढ़ प्रभावित गांवों में पहुंचकर लंच पैकेट वितरित किए।
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मुहाना नदी उफान पर, एक दर्जन से अधिक गांवों में भरा पानी
तिकुनिया। मूसलाधार बारिश के चलते मुहाना नदी के बॉर्डर क्षेत्र के खेरेटिया के नया पिंड, गंगानगर, रननगर, रामनगर मुजहा, जनकपुर, टांडा, कौड़ियाला, बाबापुरवा, दीपनगर आदि गांवों तक पानी भरा है। बाढ़ का पानी कौडियाला गुरुद्वारा मार्ग पर तेजी से बह रहा है। आधा दर्जन से अधिक लोगों का संपर्क तिकुनिया बाजार से कट गया है। गांवों के चारों ओर जलभराव है। स्कूल बंद रहे। बनवीरपुर बाजार, रननगर, खखरौला पर पानी चलने के चलते तिकोनिया मंडी से संपर्क कट गया है। एसडीएम राजीव निगम ने बताया कि बाढ़ चौकियों पर लेखपाल तैनात हैं। चार नाव लगा दी गई हैं, ताकि समय रहते बचाव कार्य शुरू हो सके। संवाद
4.30 करोड़ से बना बझेड़ा तटबंद दो जगह से कटा, कई गांवों पर संकट
बिजुआ। 4.30 करोड़ से बना बझेड़ा तटबंध (बंधे) को शारदा नदी ने काटना शुरू कर दिया है। यह बांध दो जगह से कट चुका है। अब भी कटान जारी है। इसके कटने से कुंवरपुर कला, ढकिया, शाहपुर, बझेड़ा, रेवतीपुरवा, दंबल टांडा, रैनागंज, रमेश्वरापुर आदि गांवों पर खतरा है। सूरजपुर जंगल नंबर-सात में भी तटबंध कटने से जगन्नाथ टांडा, प्रताप टांडा, राहु टांडा, देशराज टांडा, नया देशराज टांडा, टापरपुरवा, नरायनपुरवा आदि गांवों पर खतरा मंडरा रहा है।
चार दिन पहले ही इस तटबंध को जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने निरीक्षण कर अफसरों की पीठ थपथपाई थी। ग्रामीणों ने बताया कि तटबंध बनाते समय दीवार पर रोलिंग नहीं बनाई गई। रोलर से दबाया भी नहीं। मानक में काम न होने से तटबंध पहली बरसात भी नहीं झेल सका और कटान शुरू हो गया। बेलहासिकटिहा में गांव के पूरब कटान जारी है। चकपुरवा में तीन घर नदी में समा चुके हैं। गांव के लोग गृहस्थी लेकर चले गए।
बाढ़खंड के एई राजेश कुमार ने बताया कि तटबंध को गर्मी व सर्दी से बचाने के लिए एक बालू की लेयर डाली जाती है, जो कट गई है। मुख्य तटबंध सुरक्षित है। जेई शिवशंकर जायसवाल ने बताया कि पानी घटते ही मरम्मत का काम शुरू कर दिया जाएगा।
फूलबेहड़ के 25 गांवों का अब नाव ही सहारा
महेवागंज। बनबसा से छोड़े गए पानी से फूलबेहड़ क्षेत्र के 25 गांव टापू बन गए हैं। अब इन गांवों में आने-जाने के लिए सिर्फ नाव का ही सहारा है। मिलपुरवा तटबंध पानी से भरने से गूम रास्ते पर दो फुट तक पानी की धार चल रही है। श्रीनगर के सामने बने पुल के दोनों छोर बाढ़ की धार में कट गए। इससे दर्जनों गांवों का रास्ता बाधित हो गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि हर वर्ष पुल कटता है। जिम्मेदारों ने इसको कमाई का जरिया बनाया लिया है। तटबंध के भीतर बेड़हासूतिया, जदीदपुरवा, रायनगर, भूलभुलिया, खगईपुरवा, चकलुआ, नरी, रंडऊहा, मंगलीपुरवा, खंभी, धोबियाना, शंकरपुरवा, पकरियापुरवा, गूम, पिपरा, टापरपुरवा, बाबापुरवा, बसहा, मेंहदी, बेचनपुरवा, जंगल न 10 और 11, ग्रंट 12 आदि 25 गांव में बाढ़ का पानी चल रहा है। सदर एडीएम अश्वनी सिंह ने बताया कि नदी का जलस्तर काफी बढ़ा है। गांवों में आंशिक रूप से बाढ़ का पानी है। नदी किनारे बसे लोग ऊंचे स्थान पर जा रहे है। नाव की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। स्वास्थ्य टीम भी अलर्ट है। समय पर लंच पैकेट की व्यवस्था भी की जा रही है। संवाद
सड़क पर पहुंचा जमुआरी नदी का पानी, राहगीरों को दिक्कत
फरधान। जमुआरी नदी का पानी परसेहरा बुजुर्ग जाने वाली सड़क पर बहने लगा है। नेशनल हाईवे से परसेहरा बुजुर्ग, शंकरपुर, जगन्नाथपुर और मनिकापुर जाने वाला एक मात्र रास्ता जमुआरी नदी के ऊपर से होकर निकलता है। शारदा नदी का जलस्तर बढ़ने से प्रत्येक वर्ष जमुआरी नदी का पानी सड़क के ऊपर बहने लगता है। इस बार फिर सड़क पर पानी देखने को मिल रहा है। पानी के तेज बहाव से कुछ किसानों की फसलों को भी नुकसान हो रहा है। परसेहरा बुजुर्ग गांव निवासी उपेंद्र सिंह, दिलीप कुमार, गनेश कुमार आदि का कहना है कि जमुआरी नदी पर एकमात्र छोटी सी पुलिया बनी है। हर वर्ष बरसात के समय पानी अधिक होने पर सड़क के ऊपर से लगभग 4-6 फुट ऊंचाई तक पानी बहता है। संवाद
डीएम की अपील: समय रहते सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं
लखीमपुर खीरी। डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल ने बाढ़ प्रभावित लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है। कहा, सभी ग्रामवासी अपने-अपने पशुओं को लेकर राहत शिविरों में चले जाएं। जिला प्रशासन की ओर से वहां पर व्यापक इंतजाम किए गए हैं। साथ ही उन्होंने बाढ़ राहत व बचाव में लगे अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देश दिए कि आपदा से प्रभावितों हर संभव मदद की जाए। राहत व बचाव के सफल संचालन के लिए एसडीएम नोडल व तहसीलदार सह नोडल अधिकारी नामित किए गए हैं। जिला स्तरीय अफसरों को भी सहयोग के लिए लगाया गया है। संवाद
परिवार के 20 लोगों को बोट से सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया
लखीमपुर। पलिया एसडीएम कार्तिकेय सिंह ने गोविंद नगर कॉलोनी के फंसे सात परिवार के करीब 20 सदस्यों को पीएसी बोट से सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कराया गया। खाद्यान्न, फल, पेयजल की व्यवस्था कराई। मेडिकल चेकअप भी कराया। वहीं सदर तहसील क्षेत्र बड़ागांव, धोबियाना, सिंधिया आदि गांवों में एसडीएम अश्वनी, तहसीलदार सुशील प्रताप सिंह ट्रैक्टर और नाव से पहुंचे। लेखपाल को फसल और घर का सर्वे करने के निर्देश दिए। गोला में एसडीएम विनोद गुप्ता ने जोहरा गुजारा, पूजा गांव मुडिया, आषाढी, बेल्हा सिकटिहा, डंबल टांडा, बजेड़ा, रेवतीपुरवा, रूरा सुल्तानपुर करसोर आदि गांवों का निरीक्षण कर ग्रामीणों से संवाद किया। निघासन में एसडीएम राजीव निगम ने सूरतनगर, बरसोलाकला, बाबा पुरवा, गुलरिया पत्थर टागा में परिवारों से मुलाकात की। कुछ परिवारों को बाढ़ चौकियाें में शिफ्ट कराया। संवाद
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धौरहरा तहसील क्षेत्र के रामलोक, कैरातीपुरवा सहित करीब 20 गांवों में बाढ़ का पानी भर गया था, जो अब धीरे-धीरे कम हो रहा है। हालांकि अभी खतरा कम नहीं है। धौरहरा के गुलरिया तालुके, अमेठी, अग्घरा, परौरी आदि गांवों को बचाने के लिए साढ़े पांच करोड़ की परियोजना पहली बार में ही बिखरने लगी। नदी ने अब किसानों की जमीनों को निगलना शुरू कर दिया है।
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कटान से अमेठी के राममनोहर लाल और विशुननाथ की करीब दो एकड़ कृषि योग्य भूमि नदी में समा गई। ईसानगर ब्लॉक के कैरातीपुरवा और हटवा बंधे में भी दरारें आ चुकी हैं। धौरहरा के कैरातीपुरवा गांव में एसडीएम राजेश कुमार ने लेखपाल शशांक शुक्ला के साथ बाढ़ प्रभावित गांवों में पहुंचकर लंच पैकेट वितरित किए।
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मुहाना नदी उफान पर, एक दर्जन से अधिक गांवों में भरा पानी
तिकुनिया। मूसलाधार बारिश के चलते मुहाना नदी के बॉर्डर क्षेत्र के खेरेटिया के नया पिंड, गंगानगर, रननगर, रामनगर मुजहा, जनकपुर, टांडा, कौड़ियाला, बाबापुरवा, दीपनगर आदि गांवों तक पानी भरा है। बाढ़ का पानी कौडियाला गुरुद्वारा मार्ग पर तेजी से बह रहा है। आधा दर्जन से अधिक लोगों का संपर्क तिकुनिया बाजार से कट गया है। गांवों के चारों ओर जलभराव है। स्कूल बंद रहे। बनवीरपुर बाजार, रननगर, खखरौला पर पानी चलने के चलते तिकोनिया मंडी से संपर्क कट गया है। एसडीएम राजीव निगम ने बताया कि बाढ़ चौकियों पर लेखपाल तैनात हैं। चार नाव लगा दी गई हैं, ताकि समय रहते बचाव कार्य शुरू हो सके। संवाद
4.30 करोड़ से बना बझेड़ा तटबंद दो जगह से कटा, कई गांवों पर संकट
बिजुआ। 4.30 करोड़ से बना बझेड़ा तटबंध (बंधे) को शारदा नदी ने काटना शुरू कर दिया है। यह बांध दो जगह से कट चुका है। अब भी कटान जारी है। इसके कटने से कुंवरपुर कला, ढकिया, शाहपुर, बझेड़ा, रेवतीपुरवा, दंबल टांडा, रैनागंज, रमेश्वरापुर आदि गांवों पर खतरा है। सूरजपुर जंगल नंबर-सात में भी तटबंध कटने से जगन्नाथ टांडा, प्रताप टांडा, राहु टांडा, देशराज टांडा, नया देशराज टांडा, टापरपुरवा, नरायनपुरवा आदि गांवों पर खतरा मंडरा रहा है।
चार दिन पहले ही इस तटबंध को जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने निरीक्षण कर अफसरों की पीठ थपथपाई थी। ग्रामीणों ने बताया कि तटबंध बनाते समय दीवार पर रोलिंग नहीं बनाई गई। रोलर से दबाया भी नहीं। मानक में काम न होने से तटबंध पहली बरसात भी नहीं झेल सका और कटान शुरू हो गया। बेलहासिकटिहा में गांव के पूरब कटान जारी है। चकपुरवा में तीन घर नदी में समा चुके हैं। गांव के लोग गृहस्थी लेकर चले गए।
बाढ़खंड के एई राजेश कुमार ने बताया कि तटबंध को गर्मी व सर्दी से बचाने के लिए एक बालू की लेयर डाली जाती है, जो कट गई है। मुख्य तटबंध सुरक्षित है। जेई शिवशंकर जायसवाल ने बताया कि पानी घटते ही मरम्मत का काम शुरू कर दिया जाएगा।
फूलबेहड़ के 25 गांवों का अब नाव ही सहारा
महेवागंज। बनबसा से छोड़े गए पानी से फूलबेहड़ क्षेत्र के 25 गांव टापू बन गए हैं। अब इन गांवों में आने-जाने के लिए सिर्फ नाव का ही सहारा है। मिलपुरवा तटबंध पानी से भरने से गूम रास्ते पर दो फुट तक पानी की धार चल रही है। श्रीनगर के सामने बने पुल के दोनों छोर बाढ़ की धार में कट गए। इससे दर्जनों गांवों का रास्ता बाधित हो गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि हर वर्ष पुल कटता है। जिम्मेदारों ने इसको कमाई का जरिया बनाया लिया है। तटबंध के भीतर बेड़हासूतिया, जदीदपुरवा, रायनगर, भूलभुलिया, खगईपुरवा, चकलुआ, नरी, रंडऊहा, मंगलीपुरवा, खंभी, धोबियाना, शंकरपुरवा, पकरियापुरवा, गूम, पिपरा, टापरपुरवा, बाबापुरवा, बसहा, मेंहदी, बेचनपुरवा, जंगल न 10 और 11, ग्रंट 12 आदि 25 गांव में बाढ़ का पानी चल रहा है। सदर एडीएम अश्वनी सिंह ने बताया कि नदी का जलस्तर काफी बढ़ा है। गांवों में आंशिक रूप से बाढ़ का पानी है। नदी किनारे बसे लोग ऊंचे स्थान पर जा रहे है। नाव की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। स्वास्थ्य टीम भी अलर्ट है। समय पर लंच पैकेट की व्यवस्था भी की जा रही है। संवाद
सड़क पर पहुंचा जमुआरी नदी का पानी, राहगीरों को दिक्कत
फरधान। जमुआरी नदी का पानी परसेहरा बुजुर्ग जाने वाली सड़क पर बहने लगा है। नेशनल हाईवे से परसेहरा बुजुर्ग, शंकरपुर, जगन्नाथपुर और मनिकापुर जाने वाला एक मात्र रास्ता जमुआरी नदी के ऊपर से होकर निकलता है। शारदा नदी का जलस्तर बढ़ने से प्रत्येक वर्ष जमुआरी नदी का पानी सड़क के ऊपर बहने लगता है। इस बार फिर सड़क पर पानी देखने को मिल रहा है। पानी के तेज बहाव से कुछ किसानों की फसलों को भी नुकसान हो रहा है। परसेहरा बुजुर्ग गांव निवासी उपेंद्र सिंह, दिलीप कुमार, गनेश कुमार आदि का कहना है कि जमुआरी नदी पर एकमात्र छोटी सी पुलिया बनी है। हर वर्ष बरसात के समय पानी अधिक होने पर सड़क के ऊपर से लगभग 4-6 फुट ऊंचाई तक पानी बहता है। संवाद
डीएम की अपील: समय रहते सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं
लखीमपुर खीरी। डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल ने बाढ़ प्रभावित लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है। कहा, सभी ग्रामवासी अपने-अपने पशुओं को लेकर राहत शिविरों में चले जाएं। जिला प्रशासन की ओर से वहां पर व्यापक इंतजाम किए गए हैं। साथ ही उन्होंने बाढ़ राहत व बचाव में लगे अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देश दिए कि आपदा से प्रभावितों हर संभव मदद की जाए। राहत व बचाव के सफल संचालन के लिए एसडीएम नोडल व तहसीलदार सह नोडल अधिकारी नामित किए गए हैं। जिला स्तरीय अफसरों को भी सहयोग के लिए लगाया गया है। संवाद
परिवार के 20 लोगों को बोट से सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया
लखीमपुर। पलिया एसडीएम कार्तिकेय सिंह ने गोविंद नगर कॉलोनी के फंसे सात परिवार के करीब 20 सदस्यों को पीएसी बोट से सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कराया गया। खाद्यान्न, फल, पेयजल की व्यवस्था कराई। मेडिकल चेकअप भी कराया। वहीं सदर तहसील क्षेत्र बड़ागांव, धोबियाना, सिंधिया आदि गांवों में एसडीएम अश्वनी, तहसीलदार सुशील प्रताप सिंह ट्रैक्टर और नाव से पहुंचे। लेखपाल को फसल और घर का सर्वे करने के निर्देश दिए। गोला में एसडीएम विनोद गुप्ता ने जोहरा गुजारा, पूजा गांव मुडिया, आषाढी, बेल्हा सिकटिहा, डंबल टांडा, बजेड़ा, रेवतीपुरवा, रूरा सुल्तानपुर करसोर आदि गांवों का निरीक्षण कर ग्रामीणों से संवाद किया। निघासन में एसडीएम राजीव निगम ने सूरतनगर, बरसोलाकला, बाबा पुरवा, गुलरिया पत्थर टागा में परिवारों से मुलाकात की। कुछ परिवारों को बाढ़ चौकियाें में शिफ्ट कराया। संवाद

बिजुआ क्षेत्र में बझेड़ा तटबंध कटने के बाद का नजारा- संवाद

बिजुआ क्षेत्र में बझेड़ा तटबंध कटने के बाद का नजारा- संवाद

बिजुआ क्षेत्र में बझेड़ा तटबंध कटने के बाद का नजारा- संवाद

बिजुआ क्षेत्र में बझेड़ा तटबंध कटने के बाद का नजारा- संवाद

बिजुआ क्षेत्र में बझेड़ा तटबंध कटने के बाद का नजारा- संवाद

बिजुआ क्षेत्र में बझेड़ा तटबंध कटने के बाद का नजारा- संवाद

बिजुआ क्षेत्र में बझेड़ा तटबंध कटने के बाद का नजारा- संवाद