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ये दोस्ती रुला गई: किसान की मौत पर अंतिम दर्शन करने पहुंचा बंदर, महिलाओं की गोद में रखा सिर; लेटा रहा जमीन पर

Sun, 10 Sep 2023 10:19 AM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Published by: मुकेश कुमार Updated Sun, 10 Sep 2023 10:19 AM IST
सार

लखीमपुर खीरी जिले में एक किसान की मौत पर बंदर उसके घर पहुंच गया। शव पर पड़ी चादर हटाकर अंतिम दर्शन किए। इस दौरान वह मायूस दिखा। शव के पास लेट गया। इसके बाद उसने एक महिला की गोद में सिर रख लिया। ये दृश्य देख वहां मौजूद हर कोई हैरान रह गया। 

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Monkey crying to see farmer dead body in lakhimpur kheri
शव के पास बैठीं महिलाएं और पास में लेटा बंदर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लखीमपुर खीरी के गांव गोंधिया में इंसान और बंदर की दोस्ती का दिल छू लेने वाला मामला सामने आया है। किसान की मौत पर अंतिम दर्शन करने बंदर जंगल से निकलकर उसके घर पहुंच गया। शव से चादर हटाकर किसान का चेहरा देखा। करीब एक घंटे तक बैठा रहा। परिवार की महिलाओं की गोद में सिर रखा और फिर कहीं चला गया। यह मामला आसपास के गांवों में चर्चा का विषय बना हुआ है। बताया जा रहा है कि बंदर रोटी से पनपी दोस्ती का कर्ज निभाने पहुंचा था।

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बिजुआ क्षेत्र के गोंधिया निवासी चंदनलाल वर्मा की मंगलवार को मौत हो गई। परिजन और सगे संबंधियों का रो-रोकर बुरा हाल था। इसी समय एक बंदर कहीं से आ गया और मृतक चंदनलाल पर पड़ी चादर को हटाकर उनका चेहरा देखने लगा। ये देख ग्रामीण हैरान रह गए। ग्रामीणों के अनुसार बंदर परिजनों के पास ही बैठा रहा। रोती हुई महिलाओं की गोद में अपना सिर रखा। बंदर की यह गतिविधि चर्चा का विषय बन गई। 
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पास-पड़ोसी और ग्रामीण भी बंदर को देखने लगे। बंदर पर ग्रामीणों की मौजूदगी का कोई असर नहीं पड़ा। वह शव के करीब ही बैठा रहा। परिजन और ग्रामीण जब चंदनलाल का शव अंतिम संस्कार के लिए लेकर चले तो बंदर भी कहीं चला गया। परिजनों का कहना है कि कुछ वर्ष पहले जब चंदनलाल खेत में फसल बचाने जाते थे तो बंदर को खाना खिला देते थे। उस रोटी से ही बंदर और चंदनलाल में दोस्ती हो गई। बंदर उसी दोस्ती और रोटी के फर्ज को निभाने पहुंचा था।

इस तरह हुई दोस्ती 

परिजनों के अनुसार मृतक चंदनलाल वर्मा जंगल के किनारे जानवरों से फसल बचाने के लिए झोपड़ी डालकर दिनभर खेतों में रुकते थे। घर से जो खाना ले जाते उसमें से एक रोटी बंदर को दे देते थे। खाना खाने के समय बंदर उनके पास आ जाता था। बेटे सोनू ने बताया कि करीब एक वर्ष पहले पिता चंदनलाल को फालिज अटैक हो गया था। 


 

इससे वह चलने-फिरने में असमर्थ हो गए थे। चंदनलाल एक वर्ष से खेतों में नहीं गए थे। पता नहीं कैसे बंदर को उनकी मौत का पता चल गया। गांव के बुजुर्ग मोहनलाल वर्मा ने बताया कि आज तक ऐसा कभी ना देखा और न ही सुना था। वाकई में जानवर, इंसान से ज्यादा संवेदनशील व समझदार होते हैं।
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