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किशोरों में खतरनाक हो रही मोबाइल की लत

Fri, 10 Jun 2022 12:24 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 10 Jun 2022 12:24 AM IST
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Mobile addiction becoming dangerous among teenagers
लखीमपुर खीरी। नौंवी से लेकर 12वीं क्लास तक के बच्चों में मोबाइल की लत लगातार बढ़ती जा रही है। मनोचिकित्सकों के पास हर रोज औसतन चार मरीज पहुंच रहे हैं, जिनमें व्यवहारगत भिन्नता देखने को मिलती है।
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जिला अस्पताल में मनोचिकित्सक डॉ. अखिलेश शुक्ला बताते हैं कि उनके पास आने वाले सैकड़ों मरीजों में हर रोज औसतन चार मरीज ऐसे निकलते हैं, जो कि मोबाइल की लत से पीड़ित होते हैं। हालांकि, जब मरीज आता है तो उसके तीमारदार सीधे यह बात नहीं कहते। जब उनके रोग का कारण और निदान किया जाता है तो मूल में मोबाइल की लत निकलती है।
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डॉ. शुक्ला का कहना है कि हर रोज औसतन चार और महीने में करीब 150 मरीज उनके पास ऐसे पहुंचते हैं, जिनका मुख्य कारण मोबाइल का एडिक्शन होना होता है।
कोरोना और लॉकडाउन ने दिए जख्म - किशोरों में मोबाइल की लत के कारणों को लेकर जब पड़ताल की गई तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। डॉ. अखिलेश शुक्ला बताते हैं कि लॉकडाउन के दौरान ई-क्लास का जमाना आया, जिसके बाद अभिभावकों ने भी अपने लाडलों को मोबाइल और सहज इंटरनेट उपलब्ध कराने की व्यवस्था की लेकिन उसके साइडइफेक्ट अब सामने आ रहे हैं।
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नाजुक है 13 से 17 साल तक की उमर - हाल ही में लखनऊ में एक किशोर ने मोबाइल पर गेम खेलने से मना करने पर अपनी ही मां की हत्या कर दी थी। ऐसे मामलों में मनोचिकित्सक डॉ. शुक्ला का कहना है कि कच्ची उम्र में किशोरों के हाथ में इंटरनेट और मोबाइल ने उनकी उन्मुक्तता को पंख लगा दिए हैं। किशोरों ने सोशल मीडिया पर भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करवाई है।
मगर वह परिवार और दोस्तों से कट गए हैं। ऐसे में धीरे धीरे उनमें अकेलापन बढ़ने लगा है और उनमें संवेदना के भाव की भी कमी आई है। जिससे उनका दिमाग एक तरफा निर्णय लेता है जो उनके अहं को संतुष्टि प्रदान करता है। डॉ. शुक्ला ऐसे अपराधों की मुख्य वजह अकेलेपन में सुकून ढूंढने की कोशिश को बताते हैं।

कोरोना काल और ऑनलाइन क्लासेज के दौर में सोशल मीडिया के इस्तेमाल में 85 प्रतिशत इजाफा हुआ है। लोग अपना अकेलापन दूर करने के लिए वर्चुअल माध्यम के प्रति जल्दी आकर्षित हो जाते हैं। ऐसा 13 से 17 साल के किशोरों में सबसे ज्यादा देखा गया है। हर दिन औसतन चार मरीज ऐसे मिलते हैं। यह बहुत नाजुक उमर है, ऐसे में परिवार को किशोरों का खास ख्याल रखने की जरूरत है।
- डॉ. अखिलेश शुक्ला, मनोचिकित्सक जिला अस्पताल
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