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दुधवा के हाथी परिवार में शामिल हुए मिथुन और जय सिंह
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दुधवा में नर हाथी जय सिंह को पेट्रोलिंग का प्रशिक्षण देता महावत
- फोटो : LAKHIMPUR
लखीमपुर खीरी। ग्रामीण को पटककर मार डालने के बाद दुधवा में बतौर सजा भेजे गए नर हाथी मिथुन और दूसरा नर हाथी जयसिंह अब दुधवा के हाथी परिवार में शामिल हो गए हैं। जयसिंह कभी कुख्यात दस्यु ददुआ की संपत्ति हुआ करता था। दुधवा के पशु चिकित्सक और महावतों के प्रयास से न केवल दोनों हाथियों आचरण में सुधार हुआ बल्कि यह दुधवा की आबोहवा में भी पूरी तरह ढल गए हैं। मिथुन को गैंडा पुनर्वासन क्षेत्र में पेट्रोलिंग पर लगाया गया है तो जयसिंह की अभी ट्रेनिंग चल रही है। ट्रेनिंग के बाद यह भी पेट्रोलिंग करेगा। दोनों हाथी बेहद ही अनुशासित तरीके से अपना काम कर रहे हैं।
अदालत ने चंदौली से दुधवा भेजा था मिथुन को - रामनगर वन प्रभाग के चंदौली से रेस्क्यू किया गया नर हाथी मिथुन पूर्व में एक साधु की संपत्ति था। एक बार मेला जाते समय रास्ते में यह हाथी उग्र हो उठा और एक ग्रामीण को पटक कर मार डाला था। बाद में वन विभाग ने किसी तरह काबू कर इसे रेस्क्यू करने के बाद कब्जे में ले लिया था। अदालत ने इस हाथी को बतौर सजा दुधवा टाइगर रिजर्व भेजने का आदेश दिया था। 14 जून 2021 को मिथुन एक ट्रक के जरिए दुधवा लाया गया था।
तब इसे छह माह के क्वारंटीन पर गुलरा वन चौकी पर रखा गया। इस दौरान दुधवा के पशु चिकित्सक डॉ. दया शंकर ने इसके स्वास्थ्य का नियमित परीक्षण कर सेहत की देखभाल की तो महावतों ने इसके स्वभाव में बदलाव लाने और आचरण सुधारने के साथ दुधवा के माहौल में ढालने का प्रयास किया। दिसंबर से इसे पेट्रोलिंग का प्रशिक्षण दिया जा रहा था। पूरी तरह प्रशिक्षित होने के बाद अब इसे दुधवा के गैंडा पुनर्वासन क्षेत्र की पेट्रोलिंग पर लगाया गया है। मिथुन की देखभाल इरशाद और पप्पू महावत कर रहे हैं।
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कुख्यात दस्यु ददुआ की संपत्ति था जयसिंह- इसी तरह नर हाथी जय सिंह को चित्रकूट वन प्रभाग ने रेस्क्यू किया गया था। जयसिंह कुख्यात दस्यु ददुआ की संपत्ति थी। ददुआ की मौत के बाद जयसिंह ददुआ के विधायक भाई के कब्जे में था। उनके पास हाथी पालने का लाइसेंस न होने के कारण वन विभाग ने हाथी को अपने कब्जे में ले लिया और उसे बेहतर रखरखाव के लिए दुधवा टाइगर रिजर्व भेजा गया। 18 अक्टूबर 2021 को जयसिंह दुधवा लाया गया।
इसे भी छह माह के क्वारंटीन पर गुलरा वन चौकी पर रखा गया। महावतों ने इसे दुधवा के माहौल में ढाला तो दुधवा के पशु चिकित्सक डॉ. दया शंकर ने इसकी सेहत की देखभाल की। 18 मार्च को छह माह की क्वारंटीन अवधि पूरी होने के बाद इसे जंगल पेट्रोलिंग का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जयसिंह को उसका महावत सानू गुलरा, परवतिया, नौगवां जंगल में भ्रमण कराकर पेट्रोलिंग के लिए अभ्यस्त कर रहे हैं। जल्दी ही इससे पेट्रालिंग का काम लिया जाएगा।
दुधवा के पालतू हाथी परिवार में हैं अब 26 हाथी- दुधवा टाइगर रिजर्व के हाथी परिवार में मिथुन और जयसिंह के शामिल होने के बाद इनकी संख्या बढ़कर 26 हो गई है। इनमें आठ नर और 18 मादा हाथी हैं। इस हाथी परिवार में कर्नाटक से लाए गए आठ हाथी भी शामिल हैं। दुधवा के हाथी परिवार में शामिल होकर जयसिंह और मिथुुन काफी खुश नजर आ रहे हैं। दुधवा के पशु चिकित्सक डॉ. दयाशंकर ने बताया कि सभी हाथी पूरी तरह स्वस्थ हैं। इन हाथियों के स्वास्थ्य की नियमित जांच की जा रही है।
‘रामनगर वन प्रभाग के चंदौली से रेस्क्यू कर लाए गए नर हाथी मिथुन और चित्रकूट वन प्रभाग से रेस्क्यू कर लाए गए नर हाथी जयसिंह को क्वारंटीन अवधि पूरी होने के बाद इन्हें प्रशिक्षित कर दुधवा के हाथी परिवार में शामिल कर उन्हें पेट्रोलिंग के काम पर लगाया गया है, जो अनुशासित ढंग से काम कर रहे हैं।
- संजय पाठक, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व
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अदालत ने चंदौली से दुधवा भेजा था मिथुन को - रामनगर वन प्रभाग के चंदौली से रेस्क्यू किया गया नर हाथी मिथुन पूर्व में एक साधु की संपत्ति था। एक बार मेला जाते समय रास्ते में यह हाथी उग्र हो उठा और एक ग्रामीण को पटक कर मार डाला था। बाद में वन विभाग ने किसी तरह काबू कर इसे रेस्क्यू करने के बाद कब्जे में ले लिया था। अदालत ने इस हाथी को बतौर सजा दुधवा टाइगर रिजर्व भेजने का आदेश दिया था। 14 जून 2021 को मिथुन एक ट्रक के जरिए दुधवा लाया गया था।
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तब इसे छह माह के क्वारंटीन पर गुलरा वन चौकी पर रखा गया। इस दौरान दुधवा के पशु चिकित्सक डॉ. दया शंकर ने इसके स्वास्थ्य का नियमित परीक्षण कर सेहत की देखभाल की तो महावतों ने इसके स्वभाव में बदलाव लाने और आचरण सुधारने के साथ दुधवा के माहौल में ढालने का प्रयास किया। दिसंबर से इसे पेट्रोलिंग का प्रशिक्षण दिया जा रहा था। पूरी तरह प्रशिक्षित होने के बाद अब इसे दुधवा के गैंडा पुनर्वासन क्षेत्र की पेट्रोलिंग पर लगाया गया है। मिथुन की देखभाल इरशाद और पप्पू महावत कर रहे हैं।
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कुख्यात दस्यु ददुआ की संपत्ति था जयसिंह- इसी तरह नर हाथी जय सिंह को चित्रकूट वन प्रभाग ने रेस्क्यू किया गया था। जयसिंह कुख्यात दस्यु ददुआ की संपत्ति थी। ददुआ की मौत के बाद जयसिंह ददुआ के विधायक भाई के कब्जे में था। उनके पास हाथी पालने का लाइसेंस न होने के कारण वन विभाग ने हाथी को अपने कब्जे में ले लिया और उसे बेहतर रखरखाव के लिए दुधवा टाइगर रिजर्व भेजा गया। 18 अक्टूबर 2021 को जयसिंह दुधवा लाया गया।
इसे भी छह माह के क्वारंटीन पर गुलरा वन चौकी पर रखा गया। महावतों ने इसे दुधवा के माहौल में ढाला तो दुधवा के पशु चिकित्सक डॉ. दया शंकर ने इसकी सेहत की देखभाल की। 18 मार्च को छह माह की क्वारंटीन अवधि पूरी होने के बाद इसे जंगल पेट्रोलिंग का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जयसिंह को उसका महावत सानू गुलरा, परवतिया, नौगवां जंगल में भ्रमण कराकर पेट्रोलिंग के लिए अभ्यस्त कर रहे हैं। जल्दी ही इससे पेट्रालिंग का काम लिया जाएगा।
दुधवा के पालतू हाथी परिवार में हैं अब 26 हाथी- दुधवा टाइगर रिजर्व के हाथी परिवार में मिथुन और जयसिंह के शामिल होने के बाद इनकी संख्या बढ़कर 26 हो गई है। इनमें आठ नर और 18 मादा हाथी हैं। इस हाथी परिवार में कर्नाटक से लाए गए आठ हाथी भी शामिल हैं। दुधवा के हाथी परिवार में शामिल होकर जयसिंह और मिथुुन काफी खुश नजर आ रहे हैं। दुधवा के पशु चिकित्सक डॉ. दयाशंकर ने बताया कि सभी हाथी पूरी तरह स्वस्थ हैं। इन हाथियों के स्वास्थ्य की नियमित जांच की जा रही है।
‘रामनगर वन प्रभाग के चंदौली से रेस्क्यू कर लाए गए नर हाथी मिथुन और चित्रकूट वन प्रभाग से रेस्क्यू कर लाए गए नर हाथी जयसिंह को क्वारंटीन अवधि पूरी होने के बाद इन्हें प्रशिक्षित कर दुधवा के हाथी परिवार में शामिल कर उन्हें पेट्रोलिंग के काम पर लगाया गया है, जो अनुशासित ढंग से काम कर रहे हैं।
- संजय पाठक, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व