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धौरहरा में शारदा-घाघरा का कहर से हाहाकार
अमर उजाला ब्यूरो/लखीमपुर खीरी।
Updated Thu, 21 Jul 2016 11:25 PM IST
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- फोटो : amar ujala
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- रास्ते हुए जलमग्न, कटान के भय से ढहा रहे आशियाने
धौरहरा में शारदा और घाघरा नदी के कहर से हाहाकार मचा है। गांवों को जाने वाले रास्ते जलमग्न हो गए हैं तो कटान के कारण लोगबाग अपने आशियाने ढहा रहे हैं। प्रशासन की तैयारियां धरी रह गई हैं। अभी तक महज तिरपाल और प्लास्टिक की पिपिया के सिवा पीड़ितों को कोई मदद नहीं मिल सकी है। वहीं, जनप्रतिनिधि भी पीड़ितों की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। उधर, पलिया में शारदा नदी का जलस्तर घटने से गांवों में बाढ़ का पानी कम हो गया है, जिससे लोगों ने राहत महसूस की है। हालांकि अभी खेतों में पानी भरे होने से फसलें बर्बाद हो रही हैं। वहीं निघासन क्षेत्र में भी शारदा बैराज के फाटक खोले जाने से रानीगंज बंधा फटने से आई बाढ़ का पानी कम हो गया है। इससे यहां भी समस्या कम होने लगी हैं।
पलिया, निघासन में बाढ़ से राहत
शारदा का जलस्तर घटा पर खेतों में पानी से फसल की बर्बादी
पलियाकलां। शारदा नदी का उफान अब कम होने लगा है, जिससे नदी खतरे के निशान से अब महज 68 सेमी ऊपर ही रह गई है। पहाड़ों पर हो रही बारिश तथा बनबसा बैराज द्वारा की गई, पानी की रिलीजिंग से शारदा नदी खतरे के निशान से काफी ऊपर पहुंच गई थी, लेकिन धीरे-धीरे जलस्तर घटता रहा और शारदा नदी खतरे के निशान 153.620 सेमी से मात्र 68 सेमी ऊपर 154.300 पर रह गई है, जिससे आसपास के आजादनगर, बर्बादनगर, मटैहिया, खैराना, बोझवा, दौलतापुर, कचनारा, मटहिया, श्रीनगर, इमलिया फार्म, मेलाघाट, लगदहन, पतवारा आदि गांवों से पानी कम हो गया है, लेकिन अधिकांश गांवों में फसलें अभी भी जलमग्न हैं, जिससे किसान चिंतित हैं। उधर मझगईं क्षेत्र के नयापुरवा में पानी कम होने के बाद नदी ने कटान तेज कर दिया है, जिससे ग्रामीणों की भूमि नदी धीरे-धीरे अपने आगोश में लेने लगी है।
शारदा के फाटक खुलने से गांवों में कम हुआ पानी
निघासन। घाघी नाला फट जाने के बाद डीएम के आदेश पर शारदा नगर में बने फाटक खोल दिए गए, जिससे गांवों में पानी कम होने लगा है। हालांकि अभी भी ठाकुरपुरवा, मिठुई और पुरैना गांव के दर्जनों घरों में बाढ़ का पानी भरा हुआ है। तहसीलदार जगदीश सिंह का दावा है कि निघासन तहसील के किसी गांव में अभी तक बाढ़ का पानी नहीं भरा है। प्रशासन बाढ़ का पानी भरा होना नहीं मान रहा है। यहीं वजह है, ग्रामीणों को आने जाने के लिए प्रशासन ने नाव भी मुहैया नहीं कराया है। बाढ़ पीड़ित किसी तरह से जानवरों को चारा आदि खिलाने के लिए खेतों में पानी भरा होने के बाद भी खेतों में जाकर पानी से होते हुए चारे की व्यवस्था कर रहे हैं। नाव न होने के कारण लोग गहरे पानी से होकर पैदल निकलने के लिए मजबूर हैं। उधर तहसीलदार जगदीश सिंह दावा कर रहे हैं कि समूचे तहसील के किसी गांव में बाढ़ का पानी ही नहीं भरा है।
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अपने ही हाथों उजाड़ रहे खुद के आशियाने
धौरहरा/ईसानगर (खीरी)। मेरी बेबसी से कोई पूछे कितना मुश्किल है, रास्तों को घर कहना ये लाइन हुलासपुरवा के बाशिंदों पर सटीक बैठती है। ईसानगर विकास खंड के रुद्रपुर ग्राम सभा के मजरा हुलासपुरवा जहां लोग खुशहाली की जिंदगी जीते थे, यहां के किसानों की उगाई सब्जियां पूरे इलाके में बिकती थीं। अपनी मेहनत के बल पर पूरे हुलासपुरवा में उल्लास का माहौल था। समय ने करवट बदली घाघरा नदी ने इस गांव को निगलना शुरू कर दिया। पहले हरे भरे खेत फिर घरों को उजाड़ दिया। देखते ही देखते हंसता खेलता गांव तिनके की तरह बिखर गया। अब यहां चारों तरह तबाही का मंजर है।
ईसानगर के हुलासपुरवा गांव की कुल आबादी पन्द्रह सौ के करीब है, जिसमें अधिकांश पिछड़ी जातियों के मेहनतकश किसान रहते थे। गांव वाले गन्ने के साथ सब्जियों की खेती भी करते थे। यहां की सब्जियां पूरे ईसानगर इलाके में बिकती थीं। इसी के चलते यह गांव खुशहाल था और अधिकांश लोगों ने अपने पक्के मकान बना लिए थे। बीते वर्ष यहां घाघरा ने इनके खेत फसलों सहित निगल लिए इस वर्ष जुलाई माह से गांव की तरफ बढ़ती घाघरा ने अब तक 25 घर जिसमें करीब अस्सी परिवार रहते थे उजाड़ दिए हैं। अपने घरों की तरफ बढ़ती नदी को देख घर वालों ने अपने ही हाथों अपने घरों को तोड़कर सुरक्षित स्थानों चकमार्गों पर खुले आसमान के नीचे रहने को बिवस है। घाघरा की जद में आए रामभजन, प्रेम कुमार, बाबूराम, राजेन्द्र, शादिक अली, जमालू, जहूर, याकूब अली आदि जो घरों को हथौड़े से तोड़ रहे थे। बताया कि दो वर्ष पहले ही किसी तरह मेहनत मजदूरी कर तिनका तिनका जोड़ मकान बनवाया था। अब खुद ही उजाड़ना पड़ रहा है। मकानों को तोड़ रहे ग्रामीणों को देख उनके चेहरे से साफ झलकता था कि उन्हें कितनी तकलीफ हो रही है। अपने हाथों अपने मकानों पर हथौड़ा चला रहे लोग मानो अपने दिल पर हथौड़ा चला रहे हों। बेबस गांव वाले अपनी बची खुची गृहस्थी के साथ मकानों के मलबे को बैलगाड़ियों में भरकर नदी से दूर चकमार्ग सड़कों के किनारे खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।
तहसीलदार नीरज पटेल ने बताया कि बुधवार को कटान पीड़ित अस्सी परिवारों को तिरपाल और पानी भरने को पिपिया दी गयी है। सहायता राशि सभी के खातों ने भेजी जा रही।
समय से बचाव कार्य होता तो बच सकता था गांव धौरहरा। पूर्व एसडीएम धौरहरा ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव ने इस गांव को कटान से बचाने को तीन माह पूर्व पत्र जारी किया था। सिंचाई विभाग ने खानापूर्ति तब शुरू किया जब आधा गांव उजड़ चुका। सिंचाई विभाग ने लगभग दस मीटर बांस की बल्ली लगा प्लास्टिक बोरियों में मिट्टी भर कटान की ठोकर बनानी शुरू की थी। ग्रामीणों ने बताया दो दिन बाद वह भी चले गये। नदी का वेग घरों को निगलता जा रहा है बचाव कर नहीं हो रहे।
प्रशासन का दावा, धौरहरा में बन गईं छह बाढ़ राहत चौकी
धौरहरा। प्रशासन का दावा है कि धौरहरा में छह बाढ़ राहत चौकी बना दी गई हैं। तहसील क्षेत्र के ग्राम बसढ़िया, तहसील मुख्यालय, चकलाखीपुर, भूलनपुर मजरा जठपुरवा, रमियाबेहड़ और हसनपुर कटौली में बाढ़ राहत चौकी स्थापित की गई है। इसमें बसढ़िया में निजी आवास, तहसील में आरके ऑफिस, चकलाखीपुर में सहकारी समिति, भूलनपुर में प्राथमिक स्कूल, रमियाबेहड़ और हसनपुर कटौली में राजस्व निरीक्षक आवास को बाढ़ राहत केन्द्र बनाया गया है।
बाढ़ पीड़ित इन नंबरों पर करें संपर्क
1. रमियाबेहड - सुशील पांडेय : 9415461313
2. भूलनपुर - कृष्णानन्द वर्मा : 9559305935
3. हसनपुर कटौली - सुधीर वर्मा : 9454449535
4. बसढ़िया - अजय पाल सिह : 9452178446
5. चकलाखीपुर - सुरेन्द्र वर्मा : 9598073112
6. तहसील मुख्या- कमलकिशोर मिश्र: 9454449529
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धौरहरा में शारदा और घाघरा नदी के कहर से हाहाकार मचा है। गांवों को जाने वाले रास्ते जलमग्न हो गए हैं तो कटान के कारण लोगबाग अपने आशियाने ढहा रहे हैं। प्रशासन की तैयारियां धरी रह गई हैं। अभी तक महज तिरपाल और प्लास्टिक की पिपिया के सिवा पीड़ितों को कोई मदद नहीं मिल सकी है। वहीं, जनप्रतिनिधि भी पीड़ितों की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। उधर, पलिया में शारदा नदी का जलस्तर घटने से गांवों में बाढ़ का पानी कम हो गया है, जिससे लोगों ने राहत महसूस की है। हालांकि अभी खेतों में पानी भरे होने से फसलें बर्बाद हो रही हैं। वहीं निघासन क्षेत्र में भी शारदा बैराज के फाटक खोले जाने से रानीगंज बंधा फटने से आई बाढ़ का पानी कम हो गया है। इससे यहां भी समस्या कम होने लगी हैं।
पलिया, निघासन में बाढ़ से राहत
शारदा का जलस्तर घटा पर खेतों में पानी से फसल की बर्बादी
पलियाकलां। शारदा नदी का उफान अब कम होने लगा है, जिससे नदी खतरे के निशान से अब महज 68 सेमी ऊपर ही रह गई है। पहाड़ों पर हो रही बारिश तथा बनबसा बैराज द्वारा की गई, पानी की रिलीजिंग से शारदा नदी खतरे के निशान से काफी ऊपर पहुंच गई थी, लेकिन धीरे-धीरे जलस्तर घटता रहा और शारदा नदी खतरे के निशान 153.620 सेमी से मात्र 68 सेमी ऊपर 154.300 पर रह गई है, जिससे आसपास के आजादनगर, बर्बादनगर, मटैहिया, खैराना, बोझवा, दौलतापुर, कचनारा, मटहिया, श्रीनगर, इमलिया फार्म, मेलाघाट, लगदहन, पतवारा आदि गांवों से पानी कम हो गया है, लेकिन अधिकांश गांवों में फसलें अभी भी जलमग्न हैं, जिससे किसान चिंतित हैं। उधर मझगईं क्षेत्र के नयापुरवा में पानी कम होने के बाद नदी ने कटान तेज कर दिया है, जिससे ग्रामीणों की भूमि नदी धीरे-धीरे अपने आगोश में लेने लगी है।
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शारदा के फाटक खुलने से गांवों में कम हुआ पानी
निघासन। घाघी नाला फट जाने के बाद डीएम के आदेश पर शारदा नगर में बने फाटक खोल दिए गए, जिससे गांवों में पानी कम होने लगा है। हालांकि अभी भी ठाकुरपुरवा, मिठुई और पुरैना गांव के दर्जनों घरों में बाढ़ का पानी भरा हुआ है। तहसीलदार जगदीश सिंह का दावा है कि निघासन तहसील के किसी गांव में अभी तक बाढ़ का पानी नहीं भरा है। प्रशासन बाढ़ का पानी भरा होना नहीं मान रहा है। यहीं वजह है, ग्रामीणों को आने जाने के लिए प्रशासन ने नाव भी मुहैया नहीं कराया है। बाढ़ पीड़ित किसी तरह से जानवरों को चारा आदि खिलाने के लिए खेतों में पानी भरा होने के बाद भी खेतों में जाकर पानी से होते हुए चारे की व्यवस्था कर रहे हैं। नाव न होने के कारण लोग गहरे पानी से होकर पैदल निकलने के लिए मजबूर हैं। उधर तहसीलदार जगदीश सिंह दावा कर रहे हैं कि समूचे तहसील के किसी गांव में बाढ़ का पानी ही नहीं भरा है।
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धौरहरा/ईसानगर (खीरी)। मेरी बेबसी से कोई पूछे कितना मुश्किल है, रास्तों को घर कहना ये लाइन हुलासपुरवा के बाशिंदों पर सटीक बैठती है। ईसानगर विकास खंड के रुद्रपुर ग्राम सभा के मजरा हुलासपुरवा जहां लोग खुशहाली की जिंदगी जीते थे, यहां के किसानों की उगाई सब्जियां पूरे इलाके में बिकती थीं। अपनी मेहनत के बल पर पूरे हुलासपुरवा में उल्लास का माहौल था। समय ने करवट बदली घाघरा नदी ने इस गांव को निगलना शुरू कर दिया। पहले हरे भरे खेत फिर घरों को उजाड़ दिया। देखते ही देखते हंसता खेलता गांव तिनके की तरह बिखर गया। अब यहां चारों तरह तबाही का मंजर है।
ईसानगर के हुलासपुरवा गांव की कुल आबादी पन्द्रह सौ के करीब है, जिसमें अधिकांश पिछड़ी जातियों के मेहनतकश किसान रहते थे। गांव वाले गन्ने के साथ सब्जियों की खेती भी करते थे। यहां की सब्जियां पूरे ईसानगर इलाके में बिकती थीं। इसी के चलते यह गांव खुशहाल था और अधिकांश लोगों ने अपने पक्के मकान बना लिए थे। बीते वर्ष यहां घाघरा ने इनके खेत फसलों सहित निगल लिए इस वर्ष जुलाई माह से गांव की तरफ बढ़ती घाघरा ने अब तक 25 घर जिसमें करीब अस्सी परिवार रहते थे उजाड़ दिए हैं। अपने घरों की तरफ बढ़ती नदी को देख घर वालों ने अपने ही हाथों अपने घरों को तोड़कर सुरक्षित स्थानों चकमार्गों पर खुले आसमान के नीचे रहने को बिवस है। घाघरा की जद में आए रामभजन, प्रेम कुमार, बाबूराम, राजेन्द्र, शादिक अली, जमालू, जहूर, याकूब अली आदि जो घरों को हथौड़े से तोड़ रहे थे। बताया कि दो वर्ष पहले ही किसी तरह मेहनत मजदूरी कर तिनका तिनका जोड़ मकान बनवाया था। अब खुद ही उजाड़ना पड़ रहा है। मकानों को तोड़ रहे ग्रामीणों को देख उनके चेहरे से साफ झलकता था कि उन्हें कितनी तकलीफ हो रही है। अपने हाथों अपने मकानों पर हथौड़ा चला रहे लोग मानो अपने दिल पर हथौड़ा चला रहे हों। बेबस गांव वाले अपनी बची खुची गृहस्थी के साथ मकानों के मलबे को बैलगाड़ियों में भरकर नदी से दूर चकमार्ग सड़कों के किनारे खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।
तहसीलदार नीरज पटेल ने बताया कि बुधवार को कटान पीड़ित अस्सी परिवारों को तिरपाल और पानी भरने को पिपिया दी गयी है। सहायता राशि सभी के खातों ने भेजी जा रही।
समय से बचाव कार्य होता तो बच सकता था गांव धौरहरा। पूर्व एसडीएम धौरहरा ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव ने इस गांव को कटान से बचाने को तीन माह पूर्व पत्र जारी किया था। सिंचाई विभाग ने खानापूर्ति तब शुरू किया जब आधा गांव उजड़ चुका। सिंचाई विभाग ने लगभग दस मीटर बांस की बल्ली लगा प्लास्टिक बोरियों में मिट्टी भर कटान की ठोकर बनानी शुरू की थी। ग्रामीणों ने बताया दो दिन बाद वह भी चले गये। नदी का वेग घरों को निगलता जा रहा है बचाव कर नहीं हो रहे।
प्रशासन का दावा, धौरहरा में बन गईं छह बाढ़ राहत चौकी
धौरहरा। प्रशासन का दावा है कि धौरहरा में छह बाढ़ राहत चौकी बना दी गई हैं। तहसील क्षेत्र के ग्राम बसढ़िया, तहसील मुख्यालय, चकलाखीपुर, भूलनपुर मजरा जठपुरवा, रमियाबेहड़ और हसनपुर कटौली में बाढ़ राहत चौकी स्थापित की गई है। इसमें बसढ़िया में निजी आवास, तहसील में आरके ऑफिस, चकलाखीपुर में सहकारी समिति, भूलनपुर में प्राथमिक स्कूल, रमियाबेहड़ और हसनपुर कटौली में राजस्व निरीक्षक आवास को बाढ़ राहत केन्द्र बनाया गया है।
बाढ़ पीड़ित इन नंबरों पर करें संपर्क
1. रमियाबेहड - सुशील पांडेय : 9415461313
2. भूलनपुर - कृष्णानन्द वर्मा : 9559305935
3. हसनपुर कटौली - सुधीर वर्मा : 9454449535
4. बसढ़िया - अजय पाल सिह : 9452178446
5. चकलाखीपुर - सुरेन्द्र वर्मा : 9598073112
6. तहसील मुख्या- कमलकिशोर मिश्र: 9454449529