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मिल्क कलेक्शन सेंटर भी होंगे खाद्य सुरक्षा के दायरे में
लखीमपुर खीरी।
Updated Sat, 24 Jan 2015 05:45 PM IST
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दूध में मिलावट रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने समय-समय पर अपना
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निर्णय सुनाते हुए संबंधित विभागों को आदेश दिए हैं। इसी क्रम में फूड
सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी आफ इंडिया ने आदेश जारी किया है, जिसमें
एफएसएस एक्ट 2006 के तहत शहर से लेकर गांवों में दूध के व्यवसाय से जुड़े
कारोबारियों का पंजीकरण/लाइसेंस अनिवार्य कर दिया है। लिहाजा अब बगैर
पंजीकरण/लाइसेंस के संचालित होने वाले दूध प्रतिष्ठानों के विरुद्ध एफएसडीए
(खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन) विभाग कार्रवाई करेगा।
बता दें कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के तहत जनवरी 2014 में खाद्य तथा रसद विभाग के आयुक्त ने आदेश जारी कर खाद्य पदार्थों के कारोबार से जुड़े छोटे-बड़े समस्त कारोबारियों के लिए पंजीकरण/लाइसेंस अनिवार्य किया था। जनपद स्तर पर स्थापित खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग इस दिशा में अभी तक उल्लेखनीय कार्य नहीं कर सका है।
खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में पंजीकरण/लाइसेंस लेने वाले कारोबारियों की संख्या बेहद कम है। दूध के कारोबार में मिलावटखोरी की जड़ें गहराई तक पैठ बना चुकी हैं, जिसका समय-समय पर होने वाली कार्रवाई में खुलासा होता आया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के क्रम में फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी आफ इंडिया ने जनवरी 2015 में सभी राज्यों के खाद्य सुरक्षा आयुक्त को आदेश जारी कर दिए हैं।
जारी आदेश के मुताबिक गांवों में स्थापित दूध कलेक्शन सेंटरों के लिए भी पंजीकरण/लाइसेंस लेना अनिवार्य कर दिया गया है। इन सेंटरों पर कूलिंग की व्यवस्था नहीं है, लेकिन किसानों से कच्चा दूध खरीदकर एकत्र किया जाता हैै। फिर यहां से दूध को चिलिंग प्लांट भेजा जाता है। इसके अलावा वहीं चिलिंग प्लांट भी लाइसेंस के दायरे में रहेंगे। विभागीय सूत्र बताते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर मिल्क कलेक्शन सेंटरों के माध्यम से दूध करोबार संचालित होता है, लेकिन पंजीकरण/लाइसेंस लेने वालों की संख्या नगण्य है।
फैक्ट फाइल
पंजीकृत व्यापारी 1874
लाइसेंसधारक व्यापारी 308
पेंडिंग लाइसेंस आवेदन 15
किसानों का दर्ज करना होगा ब्यौरा
निर्देश यह भी दिए गए हैं कि दूध कलेक्शन सेंटर पर एकत्र किए जाने वाले दूध का ब्यौरा अंकित करना होगा। ताकि गड़बड़ी पाए जाने पर संदिग्ध किसान को ट्रेस किया जा सके। प्रतिदिन किसानों से की जाने वाली खरीद को नामवार रजिस्टर में दर्ज किया जाएगा।
-विनय कुमार सहाय, अभिहित अधिकारी
बता दें कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के तहत जनवरी 2014 में खाद्य तथा रसद विभाग के आयुक्त ने आदेश जारी कर खाद्य पदार्थों के कारोबार से जुड़े छोटे-बड़े समस्त कारोबारियों के लिए पंजीकरण/लाइसेंस अनिवार्य किया था। जनपद स्तर पर स्थापित खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग इस दिशा में अभी तक उल्लेखनीय कार्य नहीं कर सका है।
खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में पंजीकरण/लाइसेंस लेने वाले कारोबारियों की संख्या बेहद कम है। दूध के कारोबार में मिलावटखोरी की जड़ें गहराई तक पैठ बना चुकी हैं, जिसका समय-समय पर होने वाली कार्रवाई में खुलासा होता आया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के क्रम में फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी आफ इंडिया ने जनवरी 2015 में सभी राज्यों के खाद्य सुरक्षा आयुक्त को आदेश जारी कर दिए हैं।
जारी आदेश के मुताबिक गांवों में स्थापित दूध कलेक्शन सेंटरों के लिए भी पंजीकरण/लाइसेंस लेना अनिवार्य कर दिया गया है। इन सेंटरों पर कूलिंग की व्यवस्था नहीं है, लेकिन किसानों से कच्चा दूध खरीदकर एकत्र किया जाता हैै। फिर यहां से दूध को चिलिंग प्लांट भेजा जाता है। इसके अलावा वहीं चिलिंग प्लांट भी लाइसेंस के दायरे में रहेंगे। विभागीय सूत्र बताते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर मिल्क कलेक्शन सेंटरों के माध्यम से दूध करोबार संचालित होता है, लेकिन पंजीकरण/लाइसेंस लेने वालों की संख्या नगण्य है।
फैक्ट फाइल
पंजीकृत व्यापारी 1874
लाइसेंसधारक व्यापारी 308
पेंडिंग लाइसेंस आवेदन 15
किसानों का दर्ज करना होगा ब्यौरा
निर्देश यह भी दिए गए हैं कि दूध कलेक्शन सेंटर पर एकत्र किए जाने वाले दूध का ब्यौरा अंकित करना होगा। ताकि गड़बड़ी पाए जाने पर संदिग्ध किसान को ट्रेस किया जा सके। प्रतिदिन किसानों से की जाने वाली खरीद को नामवार रजिस्टर में दर्ज किया जाएगा।
-विनय कुमार सहाय, अभिहित अधिकारी