{"_id":"68f2a2767cee6287e004e138","slug":"migratory-bird-demoiselle-crane-arrives-in-dudhwa-tiger-reserve-lakhimpur-news-c-120-1-sbly1008-158674-2025-10-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lakhimpur Kheri News: दुधवा टाइगर रिजर्व में प्रवासी पक्षी डेमोसिल क्रेन की दस्तक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lakhimpur Kheri News: दुधवा टाइगर रिजर्व में प्रवासी पक्षी डेमोसिल क्रेन की दस्तक
Sat, 18 Oct 2025 01:39 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sat, 18 Oct 2025 01:39 AM IST
विज्ञापन
दुधवा में डेमोसिल क्रेन की दस्तक। स्रोत : वन विभाग
बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व का पर्यटन सत्र शुरू होने से पहले इस बार हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर प्रवासी पक्षी डेमोसिल क्रेन ने दुधवा के जलाशयों में पहुंचकर अपनी दस्तक दे दी है। सैकड़ों की संख्या में इनकी मौजूदगी मिलने से पार्क प्रशासन की बांछें खिल गई हैं।
दुधवा टाइगर रिजर्व के एफडी डॉ. एच राजामोहन ने बताया कि जंगल में हर साल यह प्रवासी पक्षी कजाकिस्तान, रूस, चीन समेत कई ठंडे देशोंं से लंबी उड़ान भरकर सितंबर के अंतिम सप्ताह में आते थे। इस बार अक्तूबर के दूसरे हफ्ते में आए हैं। चंदनचौकी क्षेत्र में गश्त करती वन कर्मियों की टीम को बृृहस्पतिवार को यह सैकड़ों की संख्या में दिखाई दिए।
एफडी ने बताया कि यह पक्षी प्रेम और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। जीवन में एक बार जोड़ा बनाने वाले यह पक्षी साथी की मौत पर खाना-पीना बंद कर देते हैं, जिससे प्राय: दूसरे की भी मौत हो जाती है। दुधवा के जलाशयों में छह माह प्रवास के बाद मार्च के अंतिम सप्ताह में ये वापस अपने वतन लौट जाते हैं।
विज्ञापन
आसमान में पांच से आठ किमी की ऊंचाई पर उड़ान भरने में माहिर होते हैं। दुधवा के उप-निदेशक जगदीश आर ने बताया कि वन कर्मियों की टीमें गठित कर इन पक्षियों की लगातार निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।
विज्ञापन
दुधवा टाइगर रिजर्व के एफडी डॉ. एच राजामोहन ने बताया कि जंगल में हर साल यह प्रवासी पक्षी कजाकिस्तान, रूस, चीन समेत कई ठंडे देशोंं से लंबी उड़ान भरकर सितंबर के अंतिम सप्ताह में आते थे। इस बार अक्तूबर के दूसरे हफ्ते में आए हैं। चंदनचौकी क्षेत्र में गश्त करती वन कर्मियों की टीम को बृृहस्पतिवार को यह सैकड़ों की संख्या में दिखाई दिए।
विज्ञापन
एफडी ने बताया कि यह पक्षी प्रेम और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। जीवन में एक बार जोड़ा बनाने वाले यह पक्षी साथी की मौत पर खाना-पीना बंद कर देते हैं, जिससे प्राय: दूसरे की भी मौत हो जाती है। दुधवा के जलाशयों में छह माह प्रवास के बाद मार्च के अंतिम सप्ताह में ये वापस अपने वतन लौट जाते हैं।
विज्ञापन
आसमान में पांच से आठ किमी की ऊंचाई पर उड़ान भरने में माहिर होते हैं। दुधवा के उप-निदेशक जगदीश आर ने बताया कि वन कर्मियों की टीमें गठित कर इन पक्षियों की लगातार निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।