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मीटर रीडिंग में घपला बढे़ आईडीएफ बिल
लखीमपुर खीरी
Updated Thu, 14 May 2015 06:23 PM IST
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शहर में घरेलू और कामर्शियल मीटरों की रीडिंग में बड़ा घपला सामने आया है। बिजली अधिकारियों के मुताबिक प्राइवेट कंपनी के मीटर रीडरों ने बड़े पैमाने पर बिजली बिलों में मनमाने ढंग से रीडिंग भर दी है, जिसके कारण शहर के करीब छह से सात हजार उपभोक्ताओं के बिल आईडीएफ आने लगे हैं। इससे न सिर्फ उनकी दिक्कतें बढ़ गई हैं, बल्कि विभाग को भी लाखों रुपये के राजस्व का चूना लग रहा है। बिजली अधिकारियों ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए इस वित्तीय अनियमितता की जांच कराने को कहा है।
गौरतलब है कि शहरी मोहल्लों में बिजली बिल वितरण के लिए हैंड बिलिंग का प्रावधान है। घरेलू और कामर्शियल कनेक्शनों (नौ किलोवॉट तक) की हर महीने मीटर रीडिंग और बिलिंग का जिम्मा एक प्राइवेट कंपनी को सौंपा गया है। बिजली अधिकारियों के मुताबिक छानबीन में सामने आया है कि प्राइवेट कंपनी के मीटर रीडर कई-कई महीने उपभोक्ताओं के घरों में मीटर की सही रीडिंग लेने और बिल देने नहीं जा रहे हैं, लेकिन मीटर रीडर घरों में जाए बिना रीडिंग का आंकड़ा हर महीने मनमाने ढंग से भर रहे हैं। कई मीटर रीडर तो साठगांठ कर करंट यूनिट से कम रीडिंग भर रहे हैं। ऐसा करके उपभोक्ताओं के सही मीटरों को भी खराब दर्शा दिया जा रहा है। मीटर रीडरों के ऐसा करने से न सिर्फ बिल सही कराने के लिए सैकड़ों उपभोक्ताओं को बिजली दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, बल्कि रीडिंग में इस घपलेबाजी के कारण विभाग के राजस्व को भी हर महीने लाखों रुपये का चूना लग रहा है।
एसडीओ टाउन धर्मेंद्र आनंद ने बतया कि पता चला है कि प्राइवेट कंपनी द्वारा बिजली मीटरों की रीडिंग हर महीने घर बैठकर किया जा रहा है। जिससे आईडीएफ बिजली बिलों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। उपभोक्ताओं को भी बिल सही कराने के लिए परेशान होना पड़ रहा है। वहीं आईडीएफ बिलों की संख्या बढ़ने से लाखों रुपये के राजस्व की क्ष्ति हो रही है।यह वित्तीय अनियमितता का मामला है। इसकी जांच कराई जाएगी।
यह है उपभोक्ताओं की संख्या
-घरेलू कनेक्शन-32 हजार
-कामर्शियल कनेक्शन-नौ हजार
-पॉवर कनेक्शन-एक हजार
ऐसे होती है घपलेबाजी
अधिकारियों के मुताबिक बिजली मीटरों की रीडिंग को बिल में हर महीने छिपाया जा सकता है, लेकिन घरों में बिजली खर्च के हिसाब से रीडिंग हर महीने मीटर में स्टोर होती रहती है। जबकि मीटर रीडर हर माह आईडीएफ बिलों की रीडिंग जारी करते रहते हैं। इससे एक अंतराल के बाद उपभोक्ताओं के घरों के बिजली बिल अचानक उसके खर्च के कई गुना ज्यादा आ जाते हैं। कई बार रीडिंग छिपाने के लिए मीटरों को जला दिखाकर नया मीटर लगवाया दिया जाता है। इससे विभाग के राजस्व को भी लाखों का नुकसान हो रहा है।
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गौरतलब है कि शहरी मोहल्लों में बिजली बिल वितरण के लिए हैंड बिलिंग का प्रावधान है। घरेलू और कामर्शियल कनेक्शनों (नौ किलोवॉट तक) की हर महीने मीटर रीडिंग और बिलिंग का जिम्मा एक प्राइवेट कंपनी को सौंपा गया है। बिजली अधिकारियों के मुताबिक छानबीन में सामने आया है कि प्राइवेट कंपनी के मीटर रीडर कई-कई महीने उपभोक्ताओं के घरों में मीटर की सही रीडिंग लेने और बिल देने नहीं जा रहे हैं, लेकिन मीटर रीडर घरों में जाए बिना रीडिंग का आंकड़ा हर महीने मनमाने ढंग से भर रहे हैं। कई मीटर रीडर तो साठगांठ कर करंट यूनिट से कम रीडिंग भर रहे हैं। ऐसा करके उपभोक्ताओं के सही मीटरों को भी खराब दर्शा दिया जा रहा है। मीटर रीडरों के ऐसा करने से न सिर्फ बिल सही कराने के लिए सैकड़ों उपभोक्ताओं को बिजली दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, बल्कि रीडिंग में इस घपलेबाजी के कारण विभाग के राजस्व को भी हर महीने लाखों रुपये का चूना लग रहा है।
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एसडीओ टाउन धर्मेंद्र आनंद ने बतया कि पता चला है कि प्राइवेट कंपनी द्वारा बिजली मीटरों की रीडिंग हर महीने घर बैठकर किया जा रहा है। जिससे आईडीएफ बिजली बिलों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। उपभोक्ताओं को भी बिल सही कराने के लिए परेशान होना पड़ रहा है। वहीं आईडीएफ बिलों की संख्या बढ़ने से लाखों रुपये के राजस्व की क्ष्ति हो रही है।यह वित्तीय अनियमितता का मामला है। इसकी जांच कराई जाएगी।
यह है उपभोक्ताओं की संख्या
-घरेलू कनेक्शन-32 हजार
-कामर्शियल कनेक्शन-नौ हजार
-पॉवर कनेक्शन-एक हजार
ऐसे होती है घपलेबाजी
अधिकारियों के मुताबिक बिजली मीटरों की रीडिंग को बिल में हर महीने छिपाया जा सकता है, लेकिन घरों में बिजली खर्च के हिसाब से रीडिंग हर महीने मीटर में स्टोर होती रहती है। जबकि मीटर रीडर हर माह आईडीएफ बिलों की रीडिंग जारी करते रहते हैं। इससे एक अंतराल के बाद उपभोक्ताओं के घरों के बिजली बिल अचानक उसके खर्च के कई गुना ज्यादा आ जाते हैं। कई बार रीडिंग छिपाने के लिए मीटरों को जला दिखाकर नया मीटर लगवाया दिया जाता है। इससे विभाग के राजस्व को भी लाखों का नुकसान हो रहा है।
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