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ईसानगर और धौरहरा में इस बार नहीं लगेगा दशहरा मेला

Tue, 20 Oct 2020 02:19 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 20 Oct 2020 02:19 AM IST
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सानगर में जलता हुआ रावण का पुतला फाइल फोटो - फोटो : LAKHIMPUR
ईसानगर/धौरहरा (लखीमपुर खीरी)। ईसानगर और धौरहरा कस्बे में आयोजित होने वाला दो सौ साल पुराने ऐतिहासिक दशहरा मेला इस बार कोरोना के चलते नहीं हो सकेगा। आयोजकों ने बैठक कर इसे स्थगित कर दिया है। इन दोनों जगहों पर दशहरा दो शताब्दी से धूमधाम से मनाया जाता रहा है।
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ईसानगर के ऐतिहासिक दशहरे मेले की शुरुआत 200 साल पूर्व ईसानगर स्टेट के जागड़ा राजा रंजीत सिंह ने की थी। तब से मेले का आयोजन होता आ रहा है। जानकार बताते हैं कि कस्बे का दशहरा मेला जितना प्राचीन है। उतना ऐतिहासिक भी। उस जमाने में लोगों के पास दूसरी जगह आने-जाने के साधन नहीं थे, जिससे दैनिक उपयोग की वस्तुओं को खरीदने में काफी परेशानी होती थी। इसको देखते हुए इस मेले की शुरुआत की गई थी। ईसानगर कस्बा निवासी बुजुर्ग बांकेलाल शुक्ला बताते हैं कि आपातकाल के समय जब पूरा देश थम सा गया था। तब भी रामलीला हुई थी। इस बार सरकार की गाइडलाइन के हिसाब से मेले का आयोजन कराना मुमकिन नहीं है। इसलिए सर्वसम्मति से इस बार मेले का आयोजन टाल दिया गया है। धौरहरा कस्बे में होने वाला दशहरा मेला भी इस बार कोरोना के चलते स्थगित कर दिया गया है। हालांकि दशहरा के दिन शस्त्र पूजन के साथ सांकेतिक दशहरा मनाया जाएगा।
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दशहरा मेले का सभी को इंतजार रहता है। कोरोना की वजह से मेले का आयोजन इस बार स्थगित करने से सभी को निराशा हुई है।
-रामसुबेर मिश्रा निवासी ईसानगर
दो सौ वर्षों से मेले का आयोजन लगातार होता आ रहा है। कोरोना की वजह से मेले को स्थगित करना पड़ा। आपातकाल के समय भी मेला हुआ था।
-रामगुलाम, अवस्थी निवासी ईसानगर
कस्बे का मेला बहुत ही ऐतिहासिक व प्राचीन है। 200 वर्ष पूर्व अध्यात्म व धार्मिक प्रचार प्रसार के लिए मेले का आयोजन कराया गया था।
-बांकेलाल शुक्ला, निवासी ईसानगर
कोरोना को देखते हुए मेला नहीं होगा, क्योंकि सरकार की जारी गाइडलाइन के हिसाब से मेला कराना संभव नही है। लोगों की सुरक्षा हमारे लिए मेले से ज्यादा महत्वपूर्ण है।
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- राजा राजेंद्र प्रताप सिंह, अध्यक्ष मेला कमेटी
सिर्फ शस्त्र पूजन का होगा कार्यक्रम
जांगड़ा राज परिवार के वंशज राजा राजेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि वर्षों से चली आ रही परंपरा का निर्वहन करने के लिए इस बार सिर्फ शस्त्र पूजन का कार्यक्रम विजय दशमी के दिन किया जाएगा।
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