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मेडिकल का लाइसेंस के नाम पर वसूली
लखीमपुर खीरी
Updated Wed, 13 May 2015 06:17 PM IST
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दवाओं की बिक्री में मोटा मुनाफा होने के चलते मेडिकल स्टोर खोलने के लिए आवेदकों की लंबी कतार दफ्तर में लग रही है। मेडिकल स्टोर खोलने के लिए पहले लाइसेंस बनवाना जरूरी है, जिसके लिए आवेदकों से हजारों रुपये की धन उगाही की जा रही है। दलालों के माध्यम से इस कार्य को अंजाम दिया जा रहा है, जिसको लेकर कुछ आवेदकों ने डीएम समेत स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से शिकायत की हैै।
बता दें कि मेडिकल कारोबार का फैलाव अब गांवों में भी हो रहा है, जिससे खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के दफ्तर में आवेदकों की कतार लग रही है। जिले में 459 थोक और 1607 फुटकर मेडिकल स्टोर संचालित हैं, जिनकी देखरेख और समय-समय पर निरीक्षण के लिए एक ड्रग इंस्पेक्टर की तैनाती है। डीएम को शिकायती पत्र देकर कुछ लोगों ने बताया है कि खुदरा लाइसेंस बनाने के लिए 25 से 50 हजार और थोक लाइसेंस के लिए एक लाख रुपये की डिमांड की जा रही है। जबकि दोनों प्रकार के लाइसेंस के लिए सरकारी फीस तीन हजार रुपये तय है। नए लाइसेंस के लिए विभाग द्वारा 24 प्रकार के प्रपत्र मांगे जाते हैं, जिससे आवेदकों को नियमों की बारीकियों में फंसाकर दोहन किया जाता हैै। एक आवेदक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया है कि फुटकर लाइसेंस बनाने के लिए 50 हजार रुपये खर्चा बताया गया है जबकि थोक लाइसेंस के लिए एक पेटी (एक लाख) की डिमांड है।
ड्रग इंस्पेक्टर संदेश मौर्या ने बताया कि शिकायत संज्ञान में है। तीन हजार रुपये लाइसेंस फीस तय है, जिससे अधिक पैसे नहीं लिए जा रहे हैं। दलालों की बात सामने आई है, जिनसे आवेदकों को दूर रहने की सलाह है। आवेदक सीधे कार्यालय में संपर्क करें।
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बता दें कि मेडिकल कारोबार का फैलाव अब गांवों में भी हो रहा है, जिससे खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के दफ्तर में आवेदकों की कतार लग रही है। जिले में 459 थोक और 1607 फुटकर मेडिकल स्टोर संचालित हैं, जिनकी देखरेख और समय-समय पर निरीक्षण के लिए एक ड्रग इंस्पेक्टर की तैनाती है। डीएम को शिकायती पत्र देकर कुछ लोगों ने बताया है कि खुदरा लाइसेंस बनाने के लिए 25 से 50 हजार और थोक लाइसेंस के लिए एक लाख रुपये की डिमांड की जा रही है। जबकि दोनों प्रकार के लाइसेंस के लिए सरकारी फीस तीन हजार रुपये तय है। नए लाइसेंस के लिए विभाग द्वारा 24 प्रकार के प्रपत्र मांगे जाते हैं, जिससे आवेदकों को नियमों की बारीकियों में फंसाकर दोहन किया जाता हैै। एक आवेदक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया है कि फुटकर लाइसेंस बनाने के लिए 50 हजार रुपये खर्चा बताया गया है जबकि थोक लाइसेंस के लिए एक पेटी (एक लाख) की डिमांड है।
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ड्रग इंस्पेक्टर संदेश मौर्या ने बताया कि शिकायत संज्ञान में है। तीन हजार रुपये लाइसेंस फीस तय है, जिससे अधिक पैसे नहीं लिए जा रहे हैं। दलालों की बात सामने आई है, जिनसे आवेदकों को दूर रहने की सलाह है। आवेदक सीधे कार्यालय में संपर्क करें।
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