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गेहूं के निर्यात पर रोक लगते ही बाजार भाव 100 रुपये लुढ़का
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दाम गिरने से मंडियों में भी घट सकती है गेहूं की आवक
पहले से तय सौदों के लिए व्यापारियों को अभी नई निर्यात पॉलिसी आने का इंतजार
शुक्रवार को राजापुर मंडी में गेहूं 2090 रुपये प्रति क्विंटल बिका, अब भाव 2000
लखीमपुर खीरी। भारत सरकार द्वारा गेहूं के निर्यात पर रोक लगाए जाने के बाद बाजार भाव में एकाएक करीब 60 से 100 रुपये प्रति क्विंटल तक की गिरावट आई है। इससे व्यापारियों की खरीद में भी थोड़ी कमी आने की संभावना बन गई है, क्योंकि निर्यात पर रोक लगाए जाने से व्यापारियों के सामने गेहूं की आपूर्ति को लेकर सवाल उठने लगे हैं। वहीं रेट कम होने से मंडियों में भी गेहूं की आवक कम हो सकती है।
इस वर्ष रबी विपणन सीजन में सरकार द्वारा निर्धारित एमएसपी से बाजार रेट अधिक चल रहा था। एक अप्रैल से सरकारी गेहूं खरीद प्रारंभ हुई थी, लेकिन बाजार भाव एमएसपी 2015 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक होने के कारण किसान सरकारी क्रय केंद्रों के बजाय व्यापारियों के हाथ गेहूं बेच रहे हैं। गेहूं के निर्यातक देशों में शुमार रूस-यूक्रेन के बीच युद्घ चालू होने के कारण भारत से दूसरे देशों में गेहूं का निर्यात बड़े पैमाने पर किया जा रहा था, जिस कारण बाजार भाव एमएसपी से करीब 50 से 100 रुपये प्रति क्विंटल अधिक रहा। यहां के व्यापारी भी अभी तक गेहूं को ट्रकों से सीधे एक्सपोर्ट प्वाइंट यानी गांधीधाम गुजरात भेज रहे थे। इसके अलावा रैक प्वाइंट गोला से भी मालगाड़ी के माध्यम से गेहूं को गांधीधाम गुजरात भेजा जा रहा था। गेहूं निर्यात पर रोक लगाए जाने से पहले तक शुक्रवार को राजापुर मंडी में किसानों का गेहूं 2090 रुपये प्रति क्विंटल तक बिका था। इसके बाद शनिवार को जैसे ही निर्यात पर रोक लगाए जाने की खबर वायरल हुई तो मंडी में गेहूं के रेट अचानक 90 रुपये लुढ़ककर 2000 रुपये तक आ गया था। हालांकि व्यापारी अभी सरकार की पॉलिसी आने का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि जो सौदे 13 मई तक हो चुके हैं। उनकी सप्लाई भेजने की छूट मिल सकती है।
क्रय केंद्रों के लिए राहत के आसार कम
गेहूं निर्यात पर रोक लगाए जाने से बाजार भाव पर आंशिक असर हुआ है, जिससे रेट अब एमएसपी के बराबर आ गए हैं। फिर भी किसानों द्वारा क्रय केंद्र पर गेहूं बेचने की संभावनाएं कम नजर आ रही हैं, क्योंकि डेढ़ माह के दौरान करीब 60 फीसदी गेहूं की खरीद मंडियों के माध्यम से व्यापारियों कर डाली है। क्रय केंद्र पर तरह-तरह की औपचारिकताएं करनी पड़ती हैं, जिससे बचने के लिए किसानों को व्यापारियों के पास गेहूं बेचना ज्यादा आसान है।
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स्टॉक लिमिट लगी तो गेहूं के रेट में आएगी कमी
गल्ला कारोबारी हुकुम चंद अग्रवाल ने बताया कि निर्यात पर रोक लगाए जाने से गेहूं के रेट में करीब 100 रुपये प्रति क्विंटल की कमी आई है। अब तक गेहूं को एक्सपोर्ट प्वाइंट गांधीधाम गुजरात भेज रहे थे। अब सरकार की पॉलिसी आने पर सारी स्थिति स्पष्ट होगी। अभी गेहूं पर स्टॉक लिमिट नहीं है, लेकिन स्टॉक लिमिट लागू होने पर गेहूं के रेट और टूट सकते हैं। एक और गल्ला कारोबारी गुड्डन गुप्ता ने बताया कि निर्यात पर रोक लगने से गेहूं के बाजार भाव में कमी आई है, लेकिन अभी एमएसपी से रेट कम होने के आसार नहीं है। रेट कम होने से मंडियों में आवक कम हो सकती है।
गेहूं का निर्यात होने से किसानों को रेट अच्छे मिल रहे थे। निर्यात पर रोक लगने से बाजार भाव कम हुए हैं। इससे सरकारी क्रय केंद्रों को किसानों से गेहूं खरीदने का मौका मिल सकता है। हालांकि इसके लिए मोबाइल क्रय केंद्र सेवा का सहारा लेना होगा।
- सुधांशु कुमार, सचिव, मंडी राजापुर
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पहले से तय सौदों के लिए व्यापारियों को अभी नई निर्यात पॉलिसी आने का इंतजार
शुक्रवार को राजापुर मंडी में गेहूं 2090 रुपये प्रति क्विंटल बिका, अब भाव 2000
लखीमपुर खीरी। भारत सरकार द्वारा गेहूं के निर्यात पर रोक लगाए जाने के बाद बाजार भाव में एकाएक करीब 60 से 100 रुपये प्रति क्विंटल तक की गिरावट आई है। इससे व्यापारियों की खरीद में भी थोड़ी कमी आने की संभावना बन गई है, क्योंकि निर्यात पर रोक लगाए जाने से व्यापारियों के सामने गेहूं की आपूर्ति को लेकर सवाल उठने लगे हैं। वहीं रेट कम होने से मंडियों में भी गेहूं की आवक कम हो सकती है।
इस वर्ष रबी विपणन सीजन में सरकार द्वारा निर्धारित एमएसपी से बाजार रेट अधिक चल रहा था। एक अप्रैल से सरकारी गेहूं खरीद प्रारंभ हुई थी, लेकिन बाजार भाव एमएसपी 2015 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक होने के कारण किसान सरकारी क्रय केंद्रों के बजाय व्यापारियों के हाथ गेहूं बेच रहे हैं। गेहूं के निर्यातक देशों में शुमार रूस-यूक्रेन के बीच युद्घ चालू होने के कारण भारत से दूसरे देशों में गेहूं का निर्यात बड़े पैमाने पर किया जा रहा था, जिस कारण बाजार भाव एमएसपी से करीब 50 से 100 रुपये प्रति क्विंटल अधिक रहा। यहां के व्यापारी भी अभी तक गेहूं को ट्रकों से सीधे एक्सपोर्ट प्वाइंट यानी गांधीधाम गुजरात भेज रहे थे। इसके अलावा रैक प्वाइंट गोला से भी मालगाड़ी के माध्यम से गेहूं को गांधीधाम गुजरात भेजा जा रहा था। गेहूं निर्यात पर रोक लगाए जाने से पहले तक शुक्रवार को राजापुर मंडी में किसानों का गेहूं 2090 रुपये प्रति क्विंटल तक बिका था। इसके बाद शनिवार को जैसे ही निर्यात पर रोक लगाए जाने की खबर वायरल हुई तो मंडी में गेहूं के रेट अचानक 90 रुपये लुढ़ककर 2000 रुपये तक आ गया था। हालांकि व्यापारी अभी सरकार की पॉलिसी आने का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि जो सौदे 13 मई तक हो चुके हैं। उनकी सप्लाई भेजने की छूट मिल सकती है।
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क्रय केंद्रों के लिए राहत के आसार कम
गेहूं निर्यात पर रोक लगाए जाने से बाजार भाव पर आंशिक असर हुआ है, जिससे रेट अब एमएसपी के बराबर आ गए हैं। फिर भी किसानों द्वारा क्रय केंद्र पर गेहूं बेचने की संभावनाएं कम नजर आ रही हैं, क्योंकि डेढ़ माह के दौरान करीब 60 फीसदी गेहूं की खरीद मंडियों के माध्यम से व्यापारियों कर डाली है। क्रय केंद्र पर तरह-तरह की औपचारिकताएं करनी पड़ती हैं, जिससे बचने के लिए किसानों को व्यापारियों के पास गेहूं बेचना ज्यादा आसान है।
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स्टॉक लिमिट लगी तो गेहूं के रेट में आएगी कमी
गल्ला कारोबारी हुकुम चंद अग्रवाल ने बताया कि निर्यात पर रोक लगाए जाने से गेहूं के रेट में करीब 100 रुपये प्रति क्विंटल की कमी आई है। अब तक गेहूं को एक्सपोर्ट प्वाइंट गांधीधाम गुजरात भेज रहे थे। अब सरकार की पॉलिसी आने पर सारी स्थिति स्पष्ट होगी। अभी गेहूं पर स्टॉक लिमिट नहीं है, लेकिन स्टॉक लिमिट लागू होने पर गेहूं के रेट और टूट सकते हैं। एक और गल्ला कारोबारी गुड्डन गुप्ता ने बताया कि निर्यात पर रोक लगने से गेहूं के बाजार भाव में कमी आई है, लेकिन अभी एमएसपी से रेट कम होने के आसार नहीं है। रेट कम होने से मंडियों में आवक कम हो सकती है।
गेहूं का निर्यात होने से किसानों को रेट अच्छे मिल रहे थे। निर्यात पर रोक लगने से बाजार भाव कम हुए हैं। इससे सरकारी क्रय केंद्रों को किसानों से गेहूं खरीदने का मौका मिल सकता है। हालांकि इसके लिए मोबाइल क्रय केंद्र सेवा का सहारा लेना होगा।
- सुधांशु कुमार, सचिव, मंडी राजापुर