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Lakhimpur Kheri News: खुद को बनाओ अपना अलार्म, हर दिन करो सुधार
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डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल से भेंट करतीं छात्राएं: स्रोत सूचना
लखीमपुर खीरी। सनातन धर्म सरस्वती बालिका इंटर कॉलेज की 18 छात्राओं का सरस्वती यात्रा दल प्रधानाचार्य डॉ. शिप्रा बाजपेई के नेतृत्व में सोमवार को जिलाधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल से मिलने पहुंचा। डीएम ने छात्राओं को तनावमुक्त रहकर लक्ष्य प्राप्त करने और चुनौतियों से लड़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने बालिकाओं को खुद अपना अलार्म बनने के लिए कहा। साथ ही हर दिन खुद में सुधार करने की सलाह दी।
जिलाधिकारी ने छात्राओं से परिचय जान कर उन्हें भविष्य में क्या बनना है, इसके बारे में पूछा। छात्राओं ने भी डीएम से सवाल पूछे। एक छात्रा ने पूछा कि आप डीएम कैसे बनीं। डीएम बनने में किन-किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। किस तरह से डीएम बनने के लिए तैयारी करनी चाहिए। वहीं अन्य बच्चों ने कार्यों के दौरान तनाव से कैसे निपटना है, इस बारे में पूछा।
डीएम ने कहा कि बालिकाओं को आत्मविश्वास के साथ परिचय देते देखकर खुशी हुई। बालिकाएं कठिन लक्ष्य और फील्ड को तय कर आगे बढ़ें। लक्ष्य, गाइडेंस, विषय चयन, दिनचर्या, टाइम टेबल जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर बालिकाओं का मार्गदर्शन किया। मैं बहुत अच्छी हूं, पर मुझे और अच्छा बनना है, इस लक्ष्य के साथ आगे बढ़ने को कहा। उन्होंने बताया कि आईएएस बनकर उन्होंने पापा के सपने को पूरा किया। पापा के सपनों को उन्होंने अपना सपना बना लिया था। सफलता तो काफी पहले इंजीनियरिंग में मिल गई थी, लेकिन पापा का सपना बाकी था, जिसे पूरा किया।
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जिलाधिकारी ने छात्राओं से परिचय जान कर उन्हें भविष्य में क्या बनना है, इसके बारे में पूछा। छात्राओं ने भी डीएम से सवाल पूछे। एक छात्रा ने पूछा कि आप डीएम कैसे बनीं। डीएम बनने में किन-किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। किस तरह से डीएम बनने के लिए तैयारी करनी चाहिए। वहीं अन्य बच्चों ने कार्यों के दौरान तनाव से कैसे निपटना है, इस बारे में पूछा।
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डीएम ने कहा कि बालिकाओं को आत्मविश्वास के साथ परिचय देते देखकर खुशी हुई। बालिकाएं कठिन लक्ष्य और फील्ड को तय कर आगे बढ़ें। लक्ष्य, गाइडेंस, विषय चयन, दिनचर्या, टाइम टेबल जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर बालिकाओं का मार्गदर्शन किया। मैं बहुत अच्छी हूं, पर मुझे और अच्छा बनना है, इस लक्ष्य के साथ आगे बढ़ने को कहा। उन्होंने बताया कि आईएएस बनकर उन्होंने पापा के सपने को पूरा किया। पापा के सपनों को उन्होंने अपना सपना बना लिया था। सफलता तो काफी पहले इंजीनियरिंग में मिल गई थी, लेकिन पापा का सपना बाकी था, जिसे पूरा किया।
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