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दुधवा लाइव ने गौरैया संरक्षण को शुरू की अनूठी पहल
लखीमपुर खीरी।
Updated Sun, 28 Feb 2016 07:40 PM IST
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दुधवा लाइव सामुदायिक संगठन ने गौरैया संरक्षण की अनूठी मुहिम शुरू की है। गौरैया को अपने घरों में बुलाने के लिए उत्तर भारत की तराई में, इस वर्ष दुधवा लाइव ने गौरैया के घोंसले बनवाएं है, जिन्हें खीरी के अलावा आसपास के जिलों में स्कूलों और नागरिकों को वितरित किया जाएगा। साथ ही लोगों को गोष्ठियों के माध्यम से जागरूक किया जाएगा कि गौरैया को वह कैसे अनुकूल परिस्थितियां दें ताकि यह चिड़िया इन घोंसलों में अंडे दे सके और अपने चूजों को पाल सके। डायचे वैले जर्मनी से पुरस्कृत दुधवा लाइव कृष्ण कुमार मिश्र का कहना है गौरैया सिर्फ एक चिड़िया नहीं, बल्कि वह हमारी परंपराओं की एक जिंदा मिसाल है।
खीरी जिले से शुरू हुई थी गौरैया बचाने की मुहिम
दुधवा लाइव सामुदायिक संगठन ने सन 2010 में दुधवा लाइव डाट काम के बैनर तले खीरी जिले समेत उत्तर भारत के तमाम तराई के जिलों में गौरैया बचाओ अभियान शुरू किया था। नतीजतन लोगों की संवेदनाएं लौटी और इस नन्ही चिड़िया के लिए दाना पानी मुहैया कराया जाने लगा। 2010 गौरैया वर्ष के रूप में मनाया गया। साथ ही गौरैया ग्राम और गौरैया मित्र चयनित किए गए, विश्व में खीरी जिले से शुरू हुई अनूठी पहल की जमकर सराहना हुई। उनकी इस मुहिम के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पहल पर कृष्ण कुमार मिश्र को ई उत्तरा पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया। गौरैया संरक्षण की इस मुहिम में बांबे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी, रॉयल सोसाइटी फॉर बर्ड प्रोटेक्शन, इंटरनेशनल, जैसी तमाम संस्थाओं के सहयोग से यह मुहिम और विस्तृत हो सकी।
बीस मार्च को मनाया जाता है गौरैया दिवस
गौरैया के संरक्षण के लिए 20 मार्च को गौरैया दिवस मनाया जाता है। गौरैया दिवस की शुरूआत 2010 में हुई। गांव और शहरों में खड़े होते कंक्रीट के जंगल, हरे भरे पेड़ों के कम होने से इनके प्राकृतिक आवास का क्षरण हुआ, साथ ही खेती का पैटर्न बदलने, अंधाधुंध कीटनाशकों के इस्तेमाल से गौरैया के लिए भोजन का संकट भी पैदा हुआ है। इसके चलते लुप्त होती गौरैयों के संरक्षण की जरूरत राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर महसूस की गई।
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गोष्ठियों के जरिये गौरैया संरक्षण को करेंगे जागरूक
दुधवा लाइव सामुदायिक संगठन स्कूली बच्चों और नागरिकों को गौरैयों के लिए विशेष रूप से बनाए गए घोंसलों का वितरण करने के साथ गोष्ठियां कर लोगों को गौरैयों बचाने, उनके लिए घोंसले बनाने और दाना पानी आदि के इंतजाम के बारे में विस्तार से बताया जाएगा। दुधवा लाइव की ओर से यह अभियान पूरे मार्च माह में चलेगा।
स्कूलों में वितरित किए जाएंगे गौरैया के घोंसला
गोला गोकरननाथ। लुप्त हो रही गौरैया को संरक्षण देने के लिए कई विद्यालयों में घोंसले वन विभाग बांटेगा।
क्षेत्रीय वनाधिकारी उमेशचंद्र राय ने बताया कि लुप्त हो रही गौरैया को संरक्षण देने के लिए वन विभाग द्वारा लकड़ी के कई घोंसले बनवाए गए हैं। बनवाए गए घोंसलों को विद्यालयों में वितरित किया जाएगा। कार्यक्रम में गौरैया को संरक्षण देने, पर्यावरण आदि के बारे में भी जानकारी दी जाएगी।
दून स्कूल में गौरैया संरक्षण कार्यक्रम हुआ
मोहम्मदी। स्थानीय दून पब्लिक स्कूल में गौरैया बचाओ अभियान के तहत क्षेत्रीय वन अधिकारी एचएस यादव ने स्कूल के बच्चों को हस्त निर्मित पिंजड़े एवं घोंसले देकर उन्हें गौरैया संरक्षण के बारे में जानकारी दी। उन्होंने स्कूल में गौरैया बसाने के लिए घोंसले रखे। वन दरोगा ओमप्रकाश वर्मा और रमेश कुमार मिश्रा ने भी बच्चों को संबोधित किया। वनाधिकारियों और कर्मचारियों ने लकड़ियों के घोंसले प्रबंधक डॉ. गुरमेजर सिंह को सौंपे। आवासीय निर्देशिका सुरिंदर कौर ने सभी बच्चों से अपील की आज से सभी बच्चे सुबह प्रतिदिन गौरैया को दाना चुगाए एवं पानी के लिए एक बर्तन रखे। कार्यक्रम में वार्डन विमल अवस्थी, सरफराज खान, शिवओम दीक्षित, संजय सक्सेना, अवधेश वर्मा, मनोज कुशवाहा, अंकुर सक्सेना, फरहीन खान, ईशा गुप्ता, हरीशंकर शुक्ला आदि स्टाफ मौजूद रहा।
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खीरी जिले से शुरू हुई थी गौरैया बचाने की मुहिम
दुधवा लाइव सामुदायिक संगठन ने सन 2010 में दुधवा लाइव डाट काम के बैनर तले खीरी जिले समेत उत्तर भारत के तमाम तराई के जिलों में गौरैया बचाओ अभियान शुरू किया था। नतीजतन लोगों की संवेदनाएं लौटी और इस नन्ही चिड़िया के लिए दाना पानी मुहैया कराया जाने लगा। 2010 गौरैया वर्ष के रूप में मनाया गया। साथ ही गौरैया ग्राम और गौरैया मित्र चयनित किए गए, विश्व में खीरी जिले से शुरू हुई अनूठी पहल की जमकर सराहना हुई। उनकी इस मुहिम के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पहल पर कृष्ण कुमार मिश्र को ई उत्तरा पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया। गौरैया संरक्षण की इस मुहिम में बांबे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी, रॉयल सोसाइटी फॉर बर्ड प्रोटेक्शन, इंटरनेशनल, जैसी तमाम संस्थाओं के सहयोग से यह मुहिम और विस्तृत हो सकी।
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बीस मार्च को मनाया जाता है गौरैया दिवस
गौरैया के संरक्षण के लिए 20 मार्च को गौरैया दिवस मनाया जाता है। गौरैया दिवस की शुरूआत 2010 में हुई। गांव और शहरों में खड़े होते कंक्रीट के जंगल, हरे भरे पेड़ों के कम होने से इनके प्राकृतिक आवास का क्षरण हुआ, साथ ही खेती का पैटर्न बदलने, अंधाधुंध कीटनाशकों के इस्तेमाल से गौरैया के लिए भोजन का संकट भी पैदा हुआ है। इसके चलते लुप्त होती गौरैयों के संरक्षण की जरूरत राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर महसूस की गई।
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गोष्ठियों के जरिये गौरैया संरक्षण को करेंगे जागरूक
दुधवा लाइव सामुदायिक संगठन स्कूली बच्चों और नागरिकों को गौरैयों के लिए विशेष रूप से बनाए गए घोंसलों का वितरण करने के साथ गोष्ठियां कर लोगों को गौरैयों बचाने, उनके लिए घोंसले बनाने और दाना पानी आदि के इंतजाम के बारे में विस्तार से बताया जाएगा। दुधवा लाइव की ओर से यह अभियान पूरे मार्च माह में चलेगा।
स्कूलों में वितरित किए जाएंगे गौरैया के घोंसला
गोला गोकरननाथ। लुप्त हो रही गौरैया को संरक्षण देने के लिए कई विद्यालयों में घोंसले वन विभाग बांटेगा।
क्षेत्रीय वनाधिकारी उमेशचंद्र राय ने बताया कि लुप्त हो रही गौरैया को संरक्षण देने के लिए वन विभाग द्वारा लकड़ी के कई घोंसले बनवाए गए हैं। बनवाए गए घोंसलों को विद्यालयों में वितरित किया जाएगा। कार्यक्रम में गौरैया को संरक्षण देने, पर्यावरण आदि के बारे में भी जानकारी दी जाएगी।
दून स्कूल में गौरैया संरक्षण कार्यक्रम हुआ
मोहम्मदी। स्थानीय दून पब्लिक स्कूल में गौरैया बचाओ अभियान के तहत क्षेत्रीय वन अधिकारी एचएस यादव ने स्कूल के बच्चों को हस्त निर्मित पिंजड़े एवं घोंसले देकर उन्हें गौरैया संरक्षण के बारे में जानकारी दी। उन्होंने स्कूल में गौरैया बसाने के लिए घोंसले रखे। वन दरोगा ओमप्रकाश वर्मा और रमेश कुमार मिश्रा ने भी बच्चों को संबोधित किया। वनाधिकारियों और कर्मचारियों ने लकड़ियों के घोंसले प्रबंधक डॉ. गुरमेजर सिंह को सौंपे। आवासीय निर्देशिका सुरिंदर कौर ने सभी बच्चों से अपील की आज से सभी बच्चे सुबह प्रतिदिन गौरैया को दाना चुगाए एवं पानी के लिए एक बर्तन रखे। कार्यक्रम में वार्डन विमल अवस्थी, सरफराज खान, शिवओम दीक्षित, संजय सक्सेना, अवधेश वर्मा, मनोज कुशवाहा, अंकुर सक्सेना, फरहीन खान, ईशा गुप्ता, हरीशंकर शुक्ला आदि स्टाफ मौजूद रहा।