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दो महीने से भी कम वक्त बाकी, सत्तारुढ़ भाजपा के लिए किला बचाने की चुनौती

Sun, 09 Jan 2022 02:12 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 09 Jan 2022 02:12 AM IST
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Less than two months left, the challenge of saving the fort for the ruling BJP
लखीमपुर खीरी। जिले में विधान सभा चुनावों के लिए 23 फरवरी की तारीख का एलान हो गया है। ऐसे में सभी दलों ने अपनी अपनी कमर कस ली है। लेकिन इस बार सबसे बड़ी चुनौती सत्तारुढ़ दल भाजपा के लिए है। क्योंकि जिले की आठों विधान सभा सीटों पर भाजपा का कब्जा है। बीते साल साल राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर आपराधिक घटनाओं को लेकर खीरी सुर्खियों में रहा। इसमें भाजपा भी विवादों में रही। ऐसे में कांग्रेस और सपा भाजपा के गढ़ बने खीरी में सेंध लगाने की कोशिश में हैं।
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2017 के विधान सभा चुनाव में भाजपा को जैसी प्रचंड जीत मिली, ऐसा खीरी जिले में भाजपा का वर्चस्व अब तक के इतिहास में कभी नहीं रहा। 2012 के चुनाव में जो भाजपा कभी एक सीट पर चुनाव जीती थी। अगले पांच साल में प्रचंड मोदी लहर में जिले की आठों विधान सभा सीटों पर जबर्दस्त जीत हासिल कर इतिहास रच दिया था। जबकि, इससे पहले के लगातार तीन विधान सभा चुनावों में भाजपा को लगातार लगातार एक सीट से ही संतोष करना पड़ता रहा है। ऐसे में इस बार जब जिले की आठों विधान सभा सीटों पर भाजपा का कब्जा है तो भाजपा के लिए बिल्कुल करो या मरो की स्थिति है। क्योंकि 2007 और 2012 के विधान सभा चुनावों में भाजपा को सिर्फ एक ही सीट मिली थी। हालांकि, दो साल बाद वह भी सपा के खाते में चली गई। क्योंकि, 2014 में निघासन से जीते अजय मिश्र टेनी ने विधायकी छोड़कर लोकसभा चुनाव लड़ा था। 2014 में उपचुनाव हुआ और निघासन सीट भी उपचुनाव के बाद सपा के खाते में चली गई। जबकि 2002 में भाजपा को कोई सीट नहीं मिली थी। संवाद
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साल - भाजपा की जीत - प्रत्याशी
2002- शून्य - कोई नहीं
2007- एक- मोहम्मदी से कृष्णा राज जीतीं
2012- एक- निघासन से अजय मिश्र टेनी जीते
2014 - टेनी के लोक सभा लड़ने से उपचुनाव हुआ, जिसमें सपा के कृष्ण गोपाल पटेल जीते
पसगवां, तिकुनिया कांड भी बढ़ाएंगी मुश्किलें
जिले ने पहले पसगवां कांड, फिर तिकुनिया कांड और किसान आंदोलन को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं। खीरी को लेकर जिला, प्रदेश और देश की सियासत काफी समय तक गरम रही। इससे आठों सीटों पर जीत दोहराने के लिए भाजपा के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है। वहीं कांग्रेस और सपा भाजपा की सफलता में सेंध लगाने की कोशिश में हैं। क्योंकि, 2017 से पहले जिले में सपा और बसपा का लगभग बराबर की हिस्सेदारी रही है।
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भाजपा ने किया फिर किला फतेह का दावा
पसगवां, तिकुनिया और किसान आंदोलन के असर को खारिज करते हुए भाजपा जिलाध्यक्ष सुनील सिंह ने फिर दावा किया कि 10 मार्च 2022 को फिर से भाजपा की सरकार बनेगी। उन्होंने दावा किया कि संगठन ने बूथ स्तर तक मजबूती के साथ तैयारी की है, जिससे पार्टी फिर से जिले में इतिहास दोहराएगी।
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