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Lakhimpur Kheri News: पीआरवी में स्टाफ की कमी बनी रैंकिंग गिरने का कारण
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लखीमपुर खीरी। शहर में अधिकतम दस मिनट और ग्रामीण इलाकों में 15 मिनट में पीआरवी को रेस्पॉंस करते हुए मदद देने का आदेश है, लेकिन जिले में ऐसा नहीं हो पा रहा है। बीते कुछ महीनों से पीआरवी के पास स्टाफ की कमी है। लिहाजा अक्तूबर माह में हुई प्रदेश की रैंकिंग में जिले कोे 15वां स्थान मिला है। हालांकि अधिकारियों का दावा है कि जल्द ही रैंकिंग में सुधार के प्रयास किए जाएंगे।
किसी भी तरह की सहायता के लिए डायल-112 पीआरवी (पुलिस रेस्पॉंस व्हीकल) को समय पर पहुंचना होता है। जिले में कुल 73 पीआरवी वाहन हैं, जिसमें 51 चौपहिया वाहन व 22 दुपहिया वाहन शामिल हैं।
बताया जाता है कि फोन पहुंचने के ठीक दस मिनट में पुलिस रेस्पॉंस करती है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचने के लिए 15 मिनट का समय निर्धारित है। लेकिन, देखा जा रहा है कि कई बार पुलिस समय से नहीं पहुंच रही है।
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इसको देखते हुए हर महीने पूरे प्रदेश में रैंकिंग कराई जाती है। अक्तूबर महीने में रैंकिंग 15वें पायदान पर पहुंच गई। पिछले सितंबर महीने में जिले को 10वां स्थान मिला था। रैंकिंग के पिछड़ने के पीछे कम स्टाफ होने की बात कही जा रही है।
देरी होने के पीछे कहीं न कहीं कोहरा भी परेशानी का एक बड़ा कारण है। एएसपी पूर्वी पवन गौतम ने बताया कि पुलिसकर्मियों की ड्यूटी दूसरे जिलों में लग जाती है। कभी कभार ट्रेनिंग में भी पुलिसकर्मी जाते हैं। इससे स्टाफ कम हो जाता है। रैंकिंग सुधारने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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किसी भी तरह की सहायता के लिए डायल-112 पीआरवी (पुलिस रेस्पॉंस व्हीकल) को समय पर पहुंचना होता है। जिले में कुल 73 पीआरवी वाहन हैं, जिसमें 51 चौपहिया वाहन व 22 दुपहिया वाहन शामिल हैं।
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बताया जाता है कि फोन पहुंचने के ठीक दस मिनट में पुलिस रेस्पॉंस करती है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचने के लिए 15 मिनट का समय निर्धारित है। लेकिन, देखा जा रहा है कि कई बार पुलिस समय से नहीं पहुंच रही है।
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इसको देखते हुए हर महीने पूरे प्रदेश में रैंकिंग कराई जाती है। अक्तूबर महीने में रैंकिंग 15वें पायदान पर पहुंच गई। पिछले सितंबर महीने में जिले को 10वां स्थान मिला था। रैंकिंग के पिछड़ने के पीछे कम स्टाफ होने की बात कही जा रही है।
देरी होने के पीछे कहीं न कहीं कोहरा भी परेशानी का एक बड़ा कारण है। एएसपी पूर्वी पवन गौतम ने बताया कि पुलिसकर्मियों की ड्यूटी दूसरे जिलों में लग जाती है। कभी कभार ट्रेनिंग में भी पुलिसकर्मी जाते हैं। इससे स्टाफ कम हो जाता है। रैंकिंग सुधारने के प्रयास किए जा रहे हैं।