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ज्ञान पर भी जमती है धूल, पढ़कर अपडेट करते रहें : डीएम
Sat, 22 Aug 2026 12:59 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sat, 22 Aug 2026 12:59 AM IST
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छात्राओं को पढ़ाते हुए डीएम अंजनी कुमार सिंह। स्रोत: सूचना विभाग
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लखीमपुर खीरी। सनातन धर्म सरस्वती बालिका विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में शुक्रवार को डीएम अंजनी कुमार सिंह पहुंचे। उन्होंने डिजिटल बोर्ड पर न्यूटन के सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियम को समझाया और छात्राओं से कहा कि रटने की आदत छोड़कर विषय को समझने और उसे दिमाग में विजुअलाइज करने की आदत डालें।
डीएम ने कहा कि जो समझ में नहीं आता, उसे रट लेना आसान है, लेकिन यही आदत आगे चलकर विषय को कठिन बना देती है। जेईई-नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में केवल याददाश्त नहीं, बल्कि कॉन्सेप्ट की गहरी समझ जरूरी है। उन्होंने छात्राओं से पूछा कि साइकिल चलाते समय पहिए पर घर्षण बल किस दिशा में लगता है और क्यों। ऐसे सवालों का उद्देश्य केवल सही उत्तर जानना नहीं, बल्कि उसके पीछे छिपे तर्क को समझना है। उन्होंने हर विषय को रटने के बजाय उसके पीछे का ‘क्यों’ तलाशने की सीख दी।
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शिक्षकों से बोले- पढ़कर ही कक्षा में जाएं
डीएम ने शिक्षकों से कहा कि कक्षा में जाने से पहले शिक्षक खुद पढ़कर तैयारी करके आएं। यह कभी नहीं सोचना चाहिए कि विषय तो उन्हें आता ही है। वर्षों से पढ़ाई जा रही किताब को दोबारा पढ़ने पर भी नई बात और नई अंतर्दृष्टि मिल सकती है। उन्होंने कहा कि ज्ञान पर भी धूल जमती है, इसलिए उसे लगातार पढ़कर, रिवाइज और अपडेट करते रहना जरूरी है। कोई भी व्यक्ति पूर्ण नहीं होता, इसलिए सीखने की प्रक्रिया कभी खत्म नहीं होनी चाहिए।
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डीएम ने कहा कि जो समझ में नहीं आता, उसे रट लेना आसान है, लेकिन यही आदत आगे चलकर विषय को कठिन बना देती है। जेईई-नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में केवल याददाश्त नहीं, बल्कि कॉन्सेप्ट की गहरी समझ जरूरी है। उन्होंने छात्राओं से पूछा कि साइकिल चलाते समय पहिए पर घर्षण बल किस दिशा में लगता है और क्यों। ऐसे सवालों का उद्देश्य केवल सही उत्तर जानना नहीं, बल्कि उसके पीछे छिपे तर्क को समझना है। उन्होंने हर विषय को रटने के बजाय उसके पीछे का ‘क्यों’ तलाशने की सीख दी।
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शिक्षकों से बोले- पढ़कर ही कक्षा में जाएं
डीएम ने शिक्षकों से कहा कि कक्षा में जाने से पहले शिक्षक खुद पढ़कर तैयारी करके आएं। यह कभी नहीं सोचना चाहिए कि विषय तो उन्हें आता ही है। वर्षों से पढ़ाई जा रही किताब को दोबारा पढ़ने पर भी नई बात और नई अंतर्दृष्टि मिल सकती है। उन्होंने कहा कि ज्ञान पर भी धूल जमती है, इसलिए उसे लगातार पढ़कर, रिवाइज और अपडेट करते रहना जरूरी है। कोई भी व्यक्ति पूर्ण नहीं होता, इसलिए सीखने की प्रक्रिया कभी खत्म नहीं होनी चाहिए।
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