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किशनपुर से निकले बाघ ने पिपरिया भूड़ के पास खेतों में डेरा जमाया
बिजुआ।
Updated Tue, 05 Jan 2016 04:36 PM IST
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किशनपुर सेंक्चुरी से निकले बाघ ने पिपरिया भूड़ के पास गन्ने के खेतों में अपना डेरा जमा लिया है। इससे जहां ग्रामीणों में दहशत है वहीं बाघ और इंसानों के बीच टकराव की नौबत पैदा हो रही है। किशनपुर सेंक्चुरी क्षेत्र के बाहर निकलकर आए एक बाघ को ग्रामीणों ने गन्ने के खेत में घेर लिया। बाघ को घेरने की खबर पाकर मौके पर पहुंचे फॉरेस्टर व वन्यजीव विशेषज्ञों के दखल के बाद उसे गन्ने से बाहर जाने का रास्ता मिल सका।
हुआ यूं कि पिपरिया भूड़ गांव के अमरजीत सिंह और प्रधान जसवंत सिंह काले के गन्ने के खेत में एक बाघ घुस गया। बाघ की मौजूदगी की खबर सुनकर सैकड़ों ग्रामीणों का मजमा मौके पर पहुंच गया। इस दौरान ग्रामीणों ने अपनी सुरक्षा के लिए हाथों में लाठी डंडे लेकर खेत को घेर लिया। बताते हैं कि गन्ने का खेत जंगल से कुछ दूरी पर है, वह भीरा रेंज में आता है।
बाघ की मौजूदगी की खबर सुनकर वन दरोगा नागेंद्र पांडेय प्रधान जसवंत सिंह काले और डॉ. वीपी सिंह मौके पर पहुंचे। इन लोगों ने मौके की नजाकत देखकर लोगों को गन्ने के खेत से बाघ को सुरक्षित निकलने का रास्ता देने को कहा। इस तरह बाघ एक खेत से दूसरे खेत चला गया। इस बात की पुष्टि नही हो सकी कि बाघ जंगल गया या नही लेकिन मौके पर बाघ व मानव संघर्ष टल गया।
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हुआ यूं कि पिपरिया भूड़ गांव के अमरजीत सिंह और प्रधान जसवंत सिंह काले के गन्ने के खेत में एक बाघ घुस गया। बाघ की मौजूदगी की खबर सुनकर सैकड़ों ग्रामीणों का मजमा मौके पर पहुंच गया। इस दौरान ग्रामीणों ने अपनी सुरक्षा के लिए हाथों में लाठी डंडे लेकर खेत को घेर लिया। बताते हैं कि गन्ने का खेत जंगल से कुछ दूरी पर है, वह भीरा रेंज में आता है।
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बाघ की मौजूदगी की खबर सुनकर वन दरोगा नागेंद्र पांडेय प्रधान जसवंत सिंह काले और डॉ. वीपी सिंह मौके पर पहुंचे। इन लोगों ने मौके की नजाकत देखकर लोगों को गन्ने के खेत से बाघ को सुरक्षित निकलने का रास्ता देने को कहा। इस तरह बाघ एक खेत से दूसरे खेत चला गया। इस बात की पुष्टि नही हो सकी कि बाघ जंगल गया या नही लेकिन मौके पर बाघ व मानव संघर्ष टल गया।
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