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खीरीः महात्मा गांधी के संघर्ष की साक्षी है दत्ता कोठी

Sat, 02 Oct 2021 01:05 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 02 Oct 2021 01:05 AM IST
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Kheri: Datta Kothi is a witness to the struggle of Mahatma Gandhi
मोहल्ला नौरंगाबाद स्थित दत्ता कोठी।

स्वाधीनता आंदोलन को धार देने के लिए 1929 में लखीमपुर आए थे महात्मा गांधी
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92 साल पहले लखीमपुर पुलिस लाइन में हुई थी गांधीजी की विशाल जनसभा

लखीमपुर खीरी। मोहल्ला नौरंगाबाद स्थित दत्ता कोठी महात्मा गांधी के संघर्ष की साक्षी है तो पुलिस लाइन का मैदान उनकी विशाल जनसभा का गवाह है। स्वाधीनता आंदोलन के दौरान आज से करीब 92 साल पहले वर्ष 1929 में महात्मा गांधी की पुलिस लाइन के मैदान में विशाल सभा हुई थी। इतिहास के जानकारों का कहना है कि गांधी जी की सभा में इतनी भीड़ जुटी थी कि पुलिस लाइन का विशाल मैदान भी छोटा पड़ गया।
खीरी जिले के स्वतंत्रता संग्राम पर शोध करने वाले डॉ. रामपाल सिंह बताते हैं कि स्वाधीनता आंदोलन के दौरान 12-11-1929 लखीमपुर-खीरी जिले के लिए ऐतिहासिक तारीख थी, जब महात्मा गांधी स्वतंत्रता संग्राम को धार देने और हरिजन उत्थान के लिए धन संग्रह करने के उद्देश्य से लखीमपुर आए थे। उनके साथ कस्तूरबा गांधी, मीरा बेन, आचार्य कृपलानी, विद्यावती और प्यारे लाल समेत कई बड़े कांग्रेसी नेता थे। यह सभी लोग शहर के नौरंगाबाद मोहल्ला स्थित सीता राम दत्ता के आवास पर ठहरे थे। यह आवास दत्ता साहब की कोठी के नाम से प्रसिद्ध है और आज भी अच्छी स्थिति में।
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डॉ. रामपाल सिंह बताते हैं कि उस दौरान गांधी जी और अन्य कांग्रेसी नेताओं की एक सभा पुलिस लाइन के विशाल मैदान में हुई थी। सभा में भीड़ का यह आलम था कि मैदान में तिल रखने तक की जगह नहीं थी। गांधी जी ने अपने भाषण में अहिंसा को आंदोलन का सबसे मजबूत हथियार बताते हुए स्वदेशी वस्तुएं अपनाने और छुआछूत आदि कुरीतियों को त्यागने पर बल दिया। (संवाद)
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गांधीजी को भेंट की गई 3146 रुपये पांच आने तीन पैसे की थैली

कस्तूरबा गांधी ने भी महिलाओं की एक सभा करके उनसे स्वाधीनता के लिए संघर्ष की अपील की। जिले की जनता ने उन्हें 3146 रुपये पांच आने और तीन पैसे की थैली भेंट की। उस समय के हिसाब से यह धनराशि काफी बड़ी थी। सभा के दौरान जिले की जनता ने गांधी जी को विश्वास दिलाया कि वह स्वाधीनता के हर आंदोलन और संघर्ष में गांधी जी के साथ है। महिलाओं ने भी कंधे से कंधा मिलाकर संघर्ष करने का संकल्प लिया था।

स्वाधीनता आंदोलन का केंद्र रही है दत्ता साहब की कोठी

सीताराम दत्ता अपने समय के नामी गिरामी वकील थे। आजादी के आंदोलन से जुड़े कांग्रेस के अग्रणी नेता थे। स्वाधीनता आंदोलन के सिलसिले में यहां आने वाले राष्ट्रीय नेता इसी कोठी में आकर ठहरते थे। कोठी के एक बड़े हाल में आंदोलन की रणनीति बनती थी। इस कोठी में महात्मा गांधी, कस्तूरबा गांधी के अलावा, मीरा बेन, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस, आचार्य जेबी कृपलानी, पं. जवाहर लाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री, सुचेता कृपलानी, लाला लाजपत राय, गोविंद बल्लभ पंत, मौलाना शौकत अली, सीबी गुप्ता आदि बड़े नेता आतिथ्य स्वीकार कर चुके हैं। कोठी की दीवार पर लगा एक शिला लेख इस बात की पुष्टि भी करता है।
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