फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lakhimpur Kheri News ›   Kheri by several Rnbankuron Blood shed for freedom

खीरी के कई रणबांकुरों ने बहाया आजादी के लिए लहू

Thu, 13 Aug 2015 07:26 PM IST
लखीमपुर खीरी
लखीमपुर खीरी Updated Thu, 13 Aug 2015 07:26 PM IST
विज्ञापन
Kheri by several Rnbankuron Blood shed for freedom
आजादी की लड़ाई में खीरी जिले ने भी प्रभावी भूमिका निभाई थी। 1857 में हुए प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में मितौली के राजा लोने सिंह ने तराई में क्रांति की अगुवाई की और अंग्रेजों से जूझते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी। असहयोग आंदोलन से लेकर भारत छोड़ो आंदोलन तक जिले के क्रांतिकारियों ने स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लिया। राजनरायन मिश्र समेत कई स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने प्राणों की आहुति दी। कई तो ऐसे गुमनाम शहीद हैं जिनको जिले में कोई स्मारक तक नसीब नहीं हो सका।
विज्ञापन

प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के नायक राजा लोने सिंह
खीरी जिले में प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1856 में ही शुरू हो गया था। तराई में मितौली के राजा लोने सिंह ने यहां पहली क्रांति का नेतृत्व किया। अंग्रेजों से लोहा लेते हुए राजा लोने सिंह ने जिले को आजाद करा लिया। फरवरी 1856 से नवंबर 1958 तक करीब 33 महीने जिला आजाद रहा। बाद में अंग्रेजों ने अपनी ताकत बटोर कर मितौली पर हमला किया। राजा लोने सिंह अंग्रेजों से लोहा लेते हुए वीरगति को प्राप्त हुए। उनके महल का खंडहर ही अब उनकी याद के रूप में यहां मौजूद है।
विज्ञापन

कलेक्टर को मारकर फांसी पर चढ़े नसीरुद्दीन
आंदोलन से प्रेरित होकर नसीरुद्दीन उर्फ  मौजी ने अपने दो साथियों वशीर अहमद और माशूक अली के साथ 26 अगस्त 1920 को जिलाधीश विलोबी पर तलवार से हमला किया। इससे विलोबी की मौत हो गई। नसीरुद्दीन उर्फ मौजी पकड़े गए और मुकदमा चला। उन्हें फांसी की सजा दे दी गई। विलोबी मेमोरियल हाल ही उनका एकमात्र अप्रत्यक्ष स्मारक है।
विज्ञापन
विज्ञापन

जेल में यातनाएं सहते शहीद हुए देवतादीन
असहयोग आंदोलन के दौरान वर्ष 1921 में करहुआं निवासी देवतादीन को दो वर्ष की कैद 100 रुपया जुर्माने की सजा मिली। सजा काटने के दौरान जेल में अंग्रेजों के जुल्म सहते हुए सजा के दौरान ही उनकी मौत हो गई।
सजा काटते हुए शहीद हुए नत्थू लाल
व्यक्तिगत सत्याग्रह आंदोलन के दौरान वर्ष 1940-41 में ग्राम भैठिया निवासी नत्थू लाल को पचास रुपया जुर्माना समेत एक साल की सजा मिली। जेल में सजा काटने के दौरान मिली यातनाओं से उनकी मौत हो गई।
सीने पर गोली खाकर वीरगति पाई रंपा तेली ने
भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान कुकुहापुर में रंपा तेली की अगुवाई में अंग्रेजों के खिलाफ क्रांतिकारी जोरदार प्रदर्शन कर रहे थे। अंग्रेजों की एक टुकड़ी ने इन क्रांतिकारियों को खदेड़ने की कोशिश की लेकिन क्रांतिकारी टस से मस नहीं हुए तो अंग्रेज सैनिकों ने गोली चला दी। गोली रंपा तेली के सीने में लगी और वह वहीं शहीद हो गए।

राजनरायन मिश्र ने स्वतंत्रता संग्राम में दी अंतिम आहुति
भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान भीखमपुर के राजनरायन मिश्र महमूदाबाद के जिलेदार की कोठार में बंदूक मांगने जा पहुंचे, जिलेदार ने उनपर ही बंदूक तान दी। इस पर राजनरायन ने जिलेदार को गोली मार दी और फरार हो गए। कई जगह वेश बदल कर रहे अंत में मेरठ में पकड़े गए। मुकदमा चला और फांसी की सजा सुनाई गई। नौ दिसंबर 1944 को उन्हें लखनऊ जेल में फांसी पर लटका दिया गया। राजनरायन मिश्र की फांसी भारतीय स्वतंतत्रता संग्राम की अंतिम फांसी थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed