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मिलावट की चुनौती से निपटने के लिए खुद रहें तैयार

Sun, 23 Oct 2016 11:18 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी। Updated Sun, 23 Oct 2016 11:18 PM IST
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Keep yourself ready for the challenge of sophistication
डेमो - फोटो : demo pic
- दिवाली पर जमकर होता है मिलावट का खेल 
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- कुछ उपाय से पकड़ी जा सकती है पदार्थों में मिलावट

दिवाली नजदीक है, जिससे अधिक मुनाफा कमाने के लिए मिलावटखोर सक्रिय भूमिका के लिए तैयार हैं। इस चुनौती का सामना करने के लिए आप खुद भी तैयार रहें, क्योंकि मिलावटी पदार्थ आपकी और परिवार की सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए कुछ सावधानी बरतते हुए मिलावट को चेक कर सकते हैं। परीक्षण के लिए कुछ सामग्री घर पर उपलब्ध हो सकती है, तो कुछ के लिए साधारण केमिकल बाजार से जुटाने होंगे। 
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम समय-समय पर अभियान चलाकर खाद्य पदार्थों की सैंपलिंग करती है। सैंपल फेल होने पर संबंधित व्यापारी के खिलाफ जुर्माना वसूलने तक ही कार्रवाई सिमटकर रह जाती है। इससे मिलावटखोरों पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पा रहा है। अफसर भी संसाधनों की कमी होने का हवाला देकर खुद को क्लीनचिट दे रहे हैं। ऐसे में आम नागरिक, जो उपभोक्ता भी है उसे स्वयं ही गंभीर होना पड़ेगा। तभी मिलावट के दंश से खुद को और परिवार की सेहत को सुरक्षित करने का प्रयास कर सकते हैं। प्रतिदिन उपभोग की जाने वाली वस्तुएं जैसे दूध, मक्खन, घी, सरसों तेल, चाय पत्ती, गुड़, मिठाई, नमक, मसाले, दाल में मिलावट की जाती है। मिठाई में मिलावट की जांच बिना लैब के आसान नहीं है। लिहाजा विश्वसनीय दुकान से ही मिठाई खरीदें। खासकर ज्यादा रंगीन और खोवे से बनी मिठाइयों से परहेज करें। 
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दूध में मिलावट की ऐसे करें जांच
दूध में सोडा की जांच के लिए एल्कोहल और रोजेलिक एसिड की जरूरत होगी, जिसे समान मात्रा में परखनली में मिलाने पर 30 सेकेंड में गहरा लाल रंग आएगा। जबकि यूरिया की जांच के लिए पैराडाइमिथाइल एमिनो बैंजाल्डिहाइड की आवश्यकता पड़ेगी। डिटर्जेंट की जांच के लिए बोतल में दूध को हिलाकर झाग बनने पर पहचान सकते हैं। पानी की मिलावट होने पर लैक्टोमीटर से फैट की मात्रा माप सकते हैं। 
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गुलाबी परत बने तो वनस्पति की मिलावट
देशी घी में वनस्पति घी की मिलावट की जाती है, जिसके लिए परखनली में पांच मिली पिघला घी लेकर पांच मिली तनु हाइड्रोक्लोराइड डालें। फिर दो-तीन बूंद परफ्यूरल या चीनी के दानें डालकर हिलाएं और पांच मिनट बाद गुलाबी रंग की परत आना मिलावट की पहचान है। 
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खोवे से बनी मिठाई में मैदा और मेटानिल पीला रंग मिलाने की आशंका रहती है। मेटानिल की पहचान के लिए परखनली में पांच ग्राम मिठाई डालने के बाद एल्कोहल डालें, यदि गुलाबी रंग आए तो मिलावट पक्की है। मैदे की जांच के लिए परखनली में आयोडीन या टिंचर आयोडीन का घोल डालें, यदि नीला या बैंगनी रंग आए तो मिलावट स्पष्ट है। 
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नमक में पत्थर का चूरा
नमक के बगैर स्वादिष्ट खाने की कल्पना नहीं की जा सकती, लेकिन इसमें भी सफेद पत्थर का चूना मिलाया जा रहा है। शीशे के गिलास में नमक घोलें। शुद्ध नमक पानी में घुल जाता है, लेकिन पत्थर का चूरा पानी में नीचे बैठ जाता है। 

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चाय पत्ती में कृत्रिम रंग 
एक गीले कागज पर चाय पत्ती डालें, तो कृत्रिम रंग कागज पर आ जाएगा। 
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मिलावटखोरी पर अंकुश लगाने के लिए त्योहारों से पहले अभियान चलाया जाता है। इस बार भी दुकानों से सैंपलिंग के लिए टीमें लगाई गई हैं। दिवाली पर मिठाई की डिमांड कई गुना बढ़ जाने से मिलावटखोर सक्रिय हो जाते हैं। इसलिए ग्राहकों को भी विश्वसनीय दुकान से मिठाई खरीदनी चाहिए। गहरे रंग और चमकीले वर्क लगी मिठाइयां न खरीदें। क्योंकि छोटे दुकानदार चांदी वर्क के बजाय एल्यूमीनियम वर्क का इस्तेमाल कर लेते हैं। मिठाई संदिग्ध प्रतीत होने पर तहसील स्तरीय अधिकारियों से शिकायत की जा सकती है। 
- डॉ. अमर सिंह वर्मा, अभिहित अधिकारी, एफएसडीए
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