फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lakhimpur Kheri News ›   jungal

गैंडा परिवार से जल्द ही मिल सकती है खुशखबरी

Tue, 17 Sep 2019 02:14 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 17 Sep 2019 02:14 AM IST
विज्ञापन
jungal
बांकेगंज। दुधवा के गैंडा परिवार से एक और खुशखबरी आने वाली है। पिछले वर्ष शुरू की गई गैंडा पुनर्वासन योजना फेज टू के बाड़ में पल रहे गैंडा परिवार की सदस्य कल्पना जल्दी ही मां बनने वाली है। उसके गर्भवती होने की सूचना मिलने पर दुधवा प्रशासन ने सुरक्षा और निगरानी बढ़ा दी है।
विज्ञापन

पिछले साल दुधवा टाइगर रिजर्व की बेलरायां रेंज के छंगा नाला क्षेत्र में गैंडा पुनर्वासन फेज टू योजना शुरू की गई थी। इसमें बांकेताल में चल रही फेज वन वाली बाड़ से तीन मांदा श्रीदेवी, कल्पना और समा के अलावा एक नर नेपोलियन को रखा गया। जिस समय कल्पना को फेज टू वाली बाड़ में लाया गया था तभी यह गर्भवती थी। अब दुधवा प्रशासन ने इसकी अधिकारिक पुष्टि कर दी है। अगर सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो कुछ ही दिनों में गैंडा परिवार में एक नए सदस्य की बढ़ोत्तरी हो सकती है। दुधवा प्रशासन के अधिकारी और कर्मचारी इसे लेकर काफी उत्साहित और खुश हैं।
विज्ञापन

1984 में शुरू हुई थी गैंडा पुनर्वास योजना
गैंडों को उनके पुरखों की धरती पर फिर से बसाने के लिए वर्ष 1984 में गैंडे लाकर गैंडा पुनर्वास योजना दुधवा नेशनल पार्क के बांकेताल में शुरू की गई थी। पहले चरण में आसाम के काजीरंगा नेशनल पार्क से दो नर और तीन मांदा गैंडों को लाकर करीब 34 किलोमीटर क्षेत्र में ऊर्जा चालित तारों से घेरकर बाड़ में रखा गया था। अगले साल 1985 में नेपाल से 16 हाथियों के बदले चार मादा गैंडा लाकर बांकेताल में छोड़ी गई थीं। इनसे इस परिवार में लगातार बढ़ोत्तरी होकर इनके परिवार का आंकड़ा 38 तक पहुंच गया। इस बात की पुष्टि भारतीय वन्यजीव संस्थान (देहरादून) के वैज्ञानिकों की टीम द्वारा दुधवा के गैंडों के डीएनए टेस्ट में हुई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

..तो इसलिए फेज टू की पड़ी जरूरत...
दुधवा नेशनल पार्क में गैंडा पुनर्वासन योजना की सफलता और गैंडों की बढ़ती संख्या के चलते बांकेताल एरिया में बनाया गया गैंडों का घर छोटा पड़ने लगा था। इसके अलावा इनब्रीडिंग की समस्या से गैंडों की नस्ल बिगड़ने का खतरा भी बढ़ रहा था। इसे देखते हुए दुधवा पार्क प्रशासन ने गैंडा पुनर्वासन योजना फेज टू शुरू करने का निर्णय लिया। इसके तहत बेलरायां रेंज के छंगा नाला में करीब 14 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल की नई बाड़ तैयार की। पहले इसमें चार गैंडे रखे गए हैं। अब इस परिवार में एक नए शिशु के जन्म की उम्मीद से दुधवा टाइगर रिजर्व के वनाधिकारी और कर्मचारी काफी खुश हैं।
बढ़ाई गई सुरक्षा और निगरानी..
मादा गैंडा की गर्भवती होने की सूचना के साथ ही दुधवा रिजर्व प्रशासन ने गैंडा पुनर्वास योजना फेज टू में सुरक्षा और निगरानी बढ़ा दी है। हाथियों से लगातार मादा गैंडा कल्पना पर नजर रखी जा रही है।
16 माह का होता है गर्भकाल..
वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ वीपी सिंह ने बताया कि मादा गैंडे का गर्भकाल 16 माह होता है। जन्म के समय शिशु का वजन 10 से 15 क्विंटल और ऊंचाई 105 सेंटीमीटर होती है।

दुधवा टाइगर रिजर्व में शुरू की गई गैंडा पुनर्वासन योजना फेज टू में एक मादा गैंडा कल्पना के गर्भवती होने की सूचना मिली है। एहितायतन उसकी सुरक्षा और निगरानी बढ़ा दी गई हैं। - संजय पाठक फील्ड डाइरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed