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कसता जा रहा जेई का शिकंजा
लखीमपुर खीरी
Updated Tue, 08 Sep 2015 07:58 PM IST
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जिले में दिमागी बुखार (जेई) का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। जिले में अब तक 30 बच्चों में दिमागी बुखार के लक्षण मिले हैं इसमें नौ में पुष्टि भी हो चुकी है। इनमें चार बच्चों की मौत हो चुकी है। हालात की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने आईसीयू वार्ड शुरू कर दिया है।
जिले में पिछले माह शुरू हुआ जेई (जपानी इंसेफ्लाइटिस) और एईएस (एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम) का प्रकोप कम होने का नाम नहीं ले रहा है। अगस्त में एईएस के पांच केस मिलने के बाद ये सिलसिला बढ़ता ही जा रहा है। जिला अस्पताल में बुखार के कारण भर्ती कराए गए बच्चों में अब तक 30 में दिमागी बुखार के लक्षण मिले हैं। इन सभी बच्चों के रक्त के नमूने जांच के लिए पीजीआई लखनऊ भेजे गए थे। इधर, जेई और एईएस पीड़ित पांच बच्चों को गंभीर हालत के चलते लखनऊ रेफर किया गया जिसमें चार बच्चों की मौत हो चुकी है। जिसमें निघासन क्षेत्र के ग्राम बैलहा निवासी दुलारे की 10 वर्षीय पुत्री लल्ली देवी, थाना और ग्राम फूलबेहड़ निवासी प्रमोद की सात वर्षीय पुत्री नैंसी, रमियाबेंहड़ क्षेत्र के ग्राम भभरापुरवा निवासी संतोष की एक वर्ष की पुत्री शिवांशी और थाना निघासन क्षेत्र के ग्राम कबिरहा निवासी सियाराम के 12 वर्षीय पुत्र अन्नूलाल शामिल हैं। जेई की भयावहता को देख प्रशासन भी गंभीर हुआ है। प्रशासन के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने मंगलवार को जिला अस्पताल के आईसीयू वार्ड का उद्घाटन करा दिया। अब जेई से पीड़ित बच्चों को इसी वार्ड में भर्ती किया जाएगा। इस संबंध में सीएमओ डा.वीके साहू ने बताया कि एईएस और जेई प्रभावित चार बच्चों की मौत हुई है। कई बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार भी हुआ है। सभी प्रभावित गांवों में छिड़काव कराया गया है। दवाएं वितरित कराई जा रही हैं इसके अलावा आईसीयू वार्ड शुरू करा दिया गया है।
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जिले में पिछले माह शुरू हुआ जेई (जपानी इंसेफ्लाइटिस) और एईएस (एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम) का प्रकोप कम होने का नाम नहीं ले रहा है। अगस्त में एईएस के पांच केस मिलने के बाद ये सिलसिला बढ़ता ही जा रहा है। जिला अस्पताल में बुखार के कारण भर्ती कराए गए बच्चों में अब तक 30 में दिमागी बुखार के लक्षण मिले हैं। इन सभी बच्चों के रक्त के नमूने जांच के लिए पीजीआई लखनऊ भेजे गए थे। इधर, जेई और एईएस पीड़ित पांच बच्चों को गंभीर हालत के चलते लखनऊ रेफर किया गया जिसमें चार बच्चों की मौत हो चुकी है। जिसमें निघासन क्षेत्र के ग्राम बैलहा निवासी दुलारे की 10 वर्षीय पुत्री लल्ली देवी, थाना और ग्राम फूलबेहड़ निवासी प्रमोद की सात वर्षीय पुत्री नैंसी, रमियाबेंहड़ क्षेत्र के ग्राम भभरापुरवा निवासी संतोष की एक वर्ष की पुत्री शिवांशी और थाना निघासन क्षेत्र के ग्राम कबिरहा निवासी सियाराम के 12 वर्षीय पुत्र अन्नूलाल शामिल हैं। जेई की भयावहता को देख प्रशासन भी गंभीर हुआ है। प्रशासन के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने मंगलवार को जिला अस्पताल के आईसीयू वार्ड का उद्घाटन करा दिया। अब जेई से पीड़ित बच्चों को इसी वार्ड में भर्ती किया जाएगा। इस संबंध में सीएमओ डा.वीके साहू ने बताया कि एईएस और जेई प्रभावित चार बच्चों की मौत हुई है। कई बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार भी हुआ है। सभी प्रभावित गांवों में छिड़काव कराया गया है। दवाएं वितरित कराई जा रही हैं इसके अलावा आईसीयू वार्ड शुरू करा दिया गया है।
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