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गुड़ उत्पादन में आगे पर उसकी गुणवत्ता में पीछे

Tue, 19 Jan 2021 01:04 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 19 Jan 2021 01:04 AM IST
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Jaggery production leads but behind in its quality
लखीमपुर खीरी। प्रदेश सरकार द्वारा दो साल पहले एक जिला एक उत्पाद योजना में खीरी के गुड़ को शामिल किया गया था, जिससे यहां के गुड़ को देश-प्रदेश स्तर पर पहचान दिलाई जा सके और फायदा किसानों और गुड़ उत्पादकों को मिल सके। बावजूद इसके दो साल बीतने के बाद भी पुराने ढर्रे पर ही गुड़ का उत्पादन किया जा रहा है, जबकि अच्छी गुणवत्ता का गुड़ बनाने वाले कोल्हुओं की संख्या न के बराबर है। बाजार में लोग गुणवत्ता वाले गुड़ की मांग कर रहे हैं, जिसके चलते कुछ कोल्हू मालिक बिना केमिकल वाला और अदरक वाला गुड़ बना रहे हैं। हालांकि अभी इन उत्पादों की गुणवत्ता को प्रमाणिक बनाने के लिए कोई वैधानिक प्रमाण पत्र देने की व्यवस्था नहीं की गई है और न ही खाद्य सुरक्षा मानकों को लेकर कोई गाइड लाइन बनी है।
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खीरी के गुड़ को अब तक वो पहचान नहीं मिल पाई है, जिस उद्देश्य से एक जिला एक उत्पाद योजना में इसे शामिल किया गया था। जिले में गन्ने की बड़े पैमाने पर खेती किए जाने से चीनी के अलावा गुड़ व राब का भी काफी उत्पादन होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में कुटीर उद्योग के रूप में पहचान बना चुके कोल्हुओं की संख्या करीब 1500 तक पहुंच चुकी है, जिनमें ज्यादातर गुड़ के पंसेरा और राब का उत्पादन करते हैं। दोनों उत्पादों की सप्लाई वाराणसी समेत बिहार, पश्चिम बंगाल आदि राज्यों में होती है। चीनी के मुकाबले गुड़ के रेट बाजार में अधिक हैं, जिसमें बिना केमिकल वाला गुड़ 50 रुपये प्रति किग्रा है, जबकि अदरक वाला गुड़ 60 रुपये प्रति किग्रा की दर से बेचा जा रहा है। वहीं चीनी 35 रुपये प्रति किग्रा की दर से बिक रही है।
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गुड़ के औषधीय गुणों के चलते लोगों में इसके प्रति बढ़ते रुझान को देखते हुए गुड़ उद्योग को आने वाले समय में और अधिक फायदा मिल सकता है, जिससे किसानों की चीनी मिलों पर निर्भरता में कमी आएगी। जिला उद्योग केंद्र द्वारा गुड़ उद्योग स्थापित करने के लिए इच्छुक उद्यमियों को ऋण दिलाने के साथ ही अनुदान के रूप में सहायता उपलब्ध कराता है। हालांकि दूसरा पहलू यह भी है कि गुड़ उत्पादकों पर किसी विभाग का नियंत्रण नहीं है, जिसके चलते गुड़ उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर कोई विशेष प्रयास भी नहीं किए गए हैं। इससे बाजार में गुड़ का कोई अपना ब्रांड भी बन पाया है।
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पिछले वर्ष कोरोना के चलते राज्य गुड़ महोत्सव टल गया था, लेकिन इस वर्ष 13 और 14 फरवरी 2021 को लखनऊ में गुड़ महोत्सव का आयोजन किया जाना है। गुड़ महोत्सव के माध्यम से गुड़ व इसके सह उत्पादों और उनके औषधीय लाभों के प्रति लोगों में जागरूकता लाने के लिए प्रचार प्रसार किया जाएगा।
जिला गन्ना अधिकारी बृजेश कुमार पटेल ने बताया कि गुड़ महोत्सव को लेकर परामर्शदात्री समिति की बैठक अपर मुख्य सचिव चीनी उद्योग की अध्यक्षता में गन्ना आयुक्त कार्यालय के सभागार में हुई थी, जिसमें गुड़ महोत्सव के आयोजन के लिए विभिन्न समितियों को दायित्व सौंपे गए हैं। इस महोत्सव में जिले के गुड़ निर्माता/ कोल्हू स्वामी प्रतिभाग करके अपने उत्पादों की प्रदर्शनी लगा सकते हैं।
मंडी में कम हुई गुड़ की आवक
जिले में करीब 1500 गुड़ और राब बनाने के कोल्हु लगे हैं, लेकिन इस वर्ष मंडी शुल्क के चलते मंडी राजापुर में गुड़ की आवक पिछले वर्ष के मुकाबले आधे से भी कम रह गई है। इस सीजन में 15 जनवरी 2021 तक राजापुर मंडी में 45 हजार क्विंटल गुड़ की आवक हुई है, जबकि पिछले वर्ष 2020 में 1.10 लाख क्विंटल गुड़ की आवक हुई थी। मंडी सचिव सुधांशु कुमार बताते हैं कि मंडी के बाहर शुल्क नहीं लगता है, जिससे आढ़तिये मंडी के बजाय बाहर ही माल खरीद लेते हैं। इससे मंडी में गुड़ की आवक कम हुई है।

स्टॉल लगाने के लिए 81 वर्ग फुट मिलेगी जगह
13 और 14 फरवरी 2021 को लखनऊ में गुड़ महोत्सव होना है, जिसमें अच्छी गुणवत्ता वाला गुड़ बनाने वाले निर्माता हिस्सा ले सकते हैं। महोत्सव में अपने गुड़ उत्पादों का प्रदर्शन करने के लिए प्रतिभागी को 81 वर्ग फुट का स्टॉल दिया जाएगा। सरकारी सुविधाएं भी मिलेंगी। इच्छुक गुड़ निर्माता 7081202612 पर संपर्क करके आवेदन प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण करा लें।
- सीएम उपाध्याय, खांडसारी अधिकारी
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