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इंटरनेट ने पुस्तकालय से बढ़ाई लोगों की दूरी
अमर उजाला ब्यूरो/लखीमपुर खीरी।
Updated Fri, 19 Aug 2016 11:24 PM IST
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liabrary
- फोटो : amar ujala
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अब 30 से 50 लोग ही आते हैं प्रतिदिन, इससे पहले रोजाना आने वाले लोगों की संख्या थी सौ के करीब
इंटरनेट का बढ़ता चलन और भागमभाग जिंदगी के कारण लोगों का पुस्तकालय से मोहभंग हो गया है। पुस्तकालय जाने के बजाय अब लोग मोबाइल पर ही किताब पढ़ना ज्यादा आसान समझते हैं। वहीं बुजुर्ग भी पुस्तकालय न जाकर कंप्यूटर और एन्ड्रॉयड मोबाइल पर ही मनपसंद किताबेें पढ़कर पुस्तकालय जाने से बचने लगे हैं।
पिछले कुछ सालों से पुस्तकालय में बढ़ने वाली भीड़ अब छंटने लगी है। पुस्तकालय में रोजाना जाने वाले लोगों की संख्या घटकर 30 से 50 तक आ गई है। पुस्तकालय से हो रहे लोगों के मोहभंग के पीछे समाज में बढ़ती टीवी संस्कृति और भागमभाग जिंदगी में समय का अभाव होना माना जा रहा है। युवाओं के साथ साथ बुजुर्गों ने भी पुस्तकालय न जाकर मोबाइल और कंप्यूटर पर ही किताबें पढ़नी शुरू कर दी हैं।
पोष्ट ऑफिस कालोनी निवासी आलोक तिवारी ने बताया कि कंपटीशन की तैयारी करनी है। तैयारी से संबंधित किताबों का पुस्तकालय में मिलना मुश्किल हो जाता है। अब तो मोबाइल पर ही किताबों से संबंधित कई ऐप डाउनलोड कर लिए है। इसी पर पढ़ लेते हैं और जो जरूरी होता है उसे मोबाइल पर ही सेव कर लेते हैं। जो हमेशा साथ रहता है।
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रमियाबेहड़ ब्लाक के लखनपुरवा गांव निवासी प्रशांत वर्मा का कहना है कि अब तो समय मिलने पर ही पुस्तकालय आना होता है। अब तो मोबाइल पर ही किताबों से संबंधित कई ऐप मौजूद हैं। उसी में किताबों को पढ़ लेते हैं और जो जरूरी समझते हैं उसको कापी करके मोबाइल में सेव कर लेते हैं। जो हमेशा साथ रहता है।
मोहल्ला हांथीपुर निवासी नीरज शुक्ला का कहना है शुरुआत से ही किताबें पढ़ने का शौक रहा है लेकिन अब किताबों की बढ़ती कीमतों के कारण इन्हेें खरीदना कठिन है। अब तो किताबों से लेकर अखबार तक मोबाइल पर ही पढ़े जा सकते हैं।
अजुर्नपुरवा निवासी अंबुज मिश्रा का कहना है कि पहले किताबों के लिए पुस्तकालय जाना पड़ता था लेकिन अब मोबाइल पर ही कई ऐसे ऐप उपलब्ध है जिसमें कोर्स से लेकर कंपटीशन तक की किताबें पढ़ी जा सकती हैं। अब न तो किताबें खरीदने की जरूरत है और न ही पुस्तकालय तक दौड़ ही लगाने की।
पिछले दिनों की अपेक्षा वर्तमान में पुस्तकालय आने वाले लोगों की संख्या में कमी हुई है। पहले जहां रोजाना सौ के आस पास लोग आते थे वहीं अब प्रतिदिन तीस से चालीस लोग ही आ रहे हैं।
-मनोज पांडे, पुस्तकालय सहायक
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इंटरनेट का बढ़ता चलन और भागमभाग जिंदगी के कारण लोगों का पुस्तकालय से मोहभंग हो गया है। पुस्तकालय जाने के बजाय अब लोग मोबाइल पर ही किताब पढ़ना ज्यादा आसान समझते हैं। वहीं बुजुर्ग भी पुस्तकालय न जाकर कंप्यूटर और एन्ड्रॉयड मोबाइल पर ही मनपसंद किताबेें पढ़कर पुस्तकालय जाने से बचने लगे हैं।
पिछले कुछ सालों से पुस्तकालय में बढ़ने वाली भीड़ अब छंटने लगी है। पुस्तकालय में रोजाना जाने वाले लोगों की संख्या घटकर 30 से 50 तक आ गई है। पुस्तकालय से हो रहे लोगों के मोहभंग के पीछे समाज में बढ़ती टीवी संस्कृति और भागमभाग जिंदगी में समय का अभाव होना माना जा रहा है। युवाओं के साथ साथ बुजुर्गों ने भी पुस्तकालय न जाकर मोबाइल और कंप्यूटर पर ही किताबें पढ़नी शुरू कर दी हैं।
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पोष्ट ऑफिस कालोनी निवासी आलोक तिवारी ने बताया कि कंपटीशन की तैयारी करनी है। तैयारी से संबंधित किताबों का पुस्तकालय में मिलना मुश्किल हो जाता है। अब तो मोबाइल पर ही किताबों से संबंधित कई ऐप डाउनलोड कर लिए है। इसी पर पढ़ लेते हैं और जो जरूरी होता है उसे मोबाइल पर ही सेव कर लेते हैं। जो हमेशा साथ रहता है।
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रमियाबेहड़ ब्लाक के लखनपुरवा गांव निवासी प्रशांत वर्मा का कहना है कि अब तो समय मिलने पर ही पुस्तकालय आना होता है। अब तो मोबाइल पर ही किताबों से संबंधित कई ऐप मौजूद हैं। उसी में किताबों को पढ़ लेते हैं और जो जरूरी समझते हैं उसको कापी करके मोबाइल में सेव कर लेते हैं। जो हमेशा साथ रहता है।
मोहल्ला हांथीपुर निवासी नीरज शुक्ला का कहना है शुरुआत से ही किताबें पढ़ने का शौक रहा है लेकिन अब किताबों की बढ़ती कीमतों के कारण इन्हेें खरीदना कठिन है। अब तो किताबों से लेकर अखबार तक मोबाइल पर ही पढ़े जा सकते हैं।
अजुर्नपुरवा निवासी अंबुज मिश्रा का कहना है कि पहले किताबों के लिए पुस्तकालय जाना पड़ता था लेकिन अब मोबाइल पर ही कई ऐसे ऐप उपलब्ध है जिसमें कोर्स से लेकर कंपटीशन तक की किताबें पढ़ी जा सकती हैं। अब न तो किताबें खरीदने की जरूरत है और न ही पुस्तकालय तक दौड़ ही लगाने की।
पिछले दिनों की अपेक्षा वर्तमान में पुस्तकालय आने वाले लोगों की संख्या में कमी हुई है। पहले जहां रोजाना सौ के आस पास लोग आते थे वहीं अब प्रतिदिन तीस से चालीस लोग ही आ रहे हैं।
-मनोज पांडे, पुस्तकालय सहायक