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बाढ़ के मद्देनजर रद् हुईं छुट्टियां
लखीमपुर खीरी।
Updated Mon, 06 Jul 2015 07:27 PM IST
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जिले की पांच तहसीलों में बाढ़ की समस्या को देखते हुए डीएम किंजल सिंह ने पशुपालन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी है। साथ ही पशुओं को गलाघोटू, तेज बुखार और गले में सूजन की बीमारी से बचाने के लिए टीकाकरण का द्वितीय चरण में तेजी लाने का निर्देश दिया है। बाढ़ राहत चौकियों पर डाक्टरों और विभागीय कर्मचारियों की ड्यूटी लगा दी गई है।
गौरतलब है कि पलिया, निघासन, धौरहरा, गोला और लखीमपुर तहसील में नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ की समस्या बढ़ती जा रही है। इन क्षेत्रों में बाढ़ प्रभावित आबादी के साथ ही पशुओं को बीमारियों से बचाने की कोशिश शुरू कर दी गई है। चिकित्साधिकारियों के मुताबिक ऐसे समय में पशुओं के मुंह में लार आना, चारा खाना छोड़ देना, सांस लेते समय घर्र-घर्र की आवाज आना आदि लक्षण प्रकट होने लगते हैं और समय इलाज न होने पर पशुओं की मौत हो जाती है। इस बीमारी से बचाव के लिए चार माह से छोटे पशु और लगभग सात माह से अधिक गर्भित पशुओं को छोड़कर टीकाकरण किया जाता है।
द्वितीय चरण में छूटे हुए पशुओं की प्राथमिकता के आधार पर टीकाकरण करने और अन्य बीमारियों से बचाव के लिए अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियां रद् कर उन्हें बाढ़ राहत चौकियों पर तैनात कर दिया गया है। पशुओं के इलाज के लिए उन्हें समुचित दवाएं भी उपलब्ध करा दी गई हैं।
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पशु चिकित्सालय सदर में कंट्रोल रूम स्थापित
पशुपालन विभाग ने पशुपालकों की समस्या को देखते हुए पशु चिकित्सालय सदर में कंट्रोल रूम की स्थापना की है। जिसका दूरभाष नंबर 05872-255258 है। इस नंबर पर हर समय समस्याएं सुनी जाएंगी।
ये करें बचाव
- पशुओं को ऊंचे और सुरक्षित जगहों पर पहुंचा दें
- पशुओं को गंदा पानी और सड़ा चारा न दें
- बाढ़ के बाद गड्ढों में भरा हुआ पानी न पिलाएं
- जलभराव वाले क्षेत्रों का चारा न खिलाएं
- बांधने वाले स्थान पर चूने का छिड़काव करें
भूसे का इंतजाम नहीं
बाढ़ के समय पशुओं को चारा उपलब्ध कराने का काम पशुपालन विभाग करता है, लेकिन इस बार विभाग को शासन से भूसे या अन्य चारे के लिए कोई बजट नहीं मिला है। विभाग को चारे का बजट बाढ़ राहत के ही बजट से मिलता है।
टीकाकरण के प्रथम चरण में दो लाख से अधिक पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है। द्वितीय चरण भी तेजी से चल रहा है। बाढ़ के मद्देनजर अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर उन्हें बाढ़ राहत चौकियों पर तैनात किया गया है।
- डॉ. एसपी सिंह, मुख्य पशुचिकित्साधिकारी
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गौरतलब है कि पलिया, निघासन, धौरहरा, गोला और लखीमपुर तहसील में नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ की समस्या बढ़ती जा रही है। इन क्षेत्रों में बाढ़ प्रभावित आबादी के साथ ही पशुओं को बीमारियों से बचाने की कोशिश शुरू कर दी गई है। चिकित्साधिकारियों के मुताबिक ऐसे समय में पशुओं के मुंह में लार आना, चारा खाना छोड़ देना, सांस लेते समय घर्र-घर्र की आवाज आना आदि लक्षण प्रकट होने लगते हैं और समय इलाज न होने पर पशुओं की मौत हो जाती है। इस बीमारी से बचाव के लिए चार माह से छोटे पशु और लगभग सात माह से अधिक गर्भित पशुओं को छोड़कर टीकाकरण किया जाता है।
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द्वितीय चरण में छूटे हुए पशुओं की प्राथमिकता के आधार पर टीकाकरण करने और अन्य बीमारियों से बचाव के लिए अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियां रद् कर उन्हें बाढ़ राहत चौकियों पर तैनात कर दिया गया है। पशुओं के इलाज के लिए उन्हें समुचित दवाएं भी उपलब्ध करा दी गई हैं।
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पशु चिकित्सालय सदर में कंट्रोल रूम स्थापित
पशुपालन विभाग ने पशुपालकों की समस्या को देखते हुए पशु चिकित्सालय सदर में कंट्रोल रूम की स्थापना की है। जिसका दूरभाष नंबर 05872-255258 है। इस नंबर पर हर समय समस्याएं सुनी जाएंगी।
ये करें बचाव
- पशुओं को ऊंचे और सुरक्षित जगहों पर पहुंचा दें
- पशुओं को गंदा पानी और सड़ा चारा न दें
- बाढ़ के बाद गड्ढों में भरा हुआ पानी न पिलाएं
- जलभराव वाले क्षेत्रों का चारा न खिलाएं
- बांधने वाले स्थान पर चूने का छिड़काव करें
भूसे का इंतजाम नहीं
बाढ़ के समय पशुओं को चारा उपलब्ध कराने का काम पशुपालन विभाग करता है, लेकिन इस बार विभाग को शासन से भूसे या अन्य चारे के लिए कोई बजट नहीं मिला है। विभाग को चारे का बजट बाढ़ राहत के ही बजट से मिलता है।
टीकाकरण के प्रथम चरण में दो लाख से अधिक पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है। द्वितीय चरण भी तेजी से चल रहा है। बाढ़ के मद्देनजर अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर उन्हें बाढ़ राहत चौकियों पर तैनात किया गया है।
- डॉ. एसपी सिंह, मुख्य पशुचिकित्साधिकारी