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जिले में दोगुने हो गए अति कुपोषित बच्चे
लखीमपुर खीरी
Updated Fri, 10 Jul 2015 07:01 PM IST
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जिले में अति कुपोषित बच्चों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। प्रशासन के आंकड़ों पर गौर करें तो सर्वे में महज चार माह के अंदर ही अति कुपोषित बच्चों की संख्या दोगुनी हो गई है। दिसंबर 2014 में जिले में ऐसे बच्चों की संख्या 3428 थी, लेकिन जून तक यह आंकड़ा 7,500 के करीब पहुंच गया है।
आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों का वजन कर उन्हें पोषाहार देने की व्यवस्था है, लेकिन यह भी प्रयास बच्चों की सेहत में खास सुधार नहीं कर पा रहा है। जून में इससे महज 400 बच्चों को ही अति कुपोषित की श्रेणी से कुपोषित की श्रेणी में लाया जा सका है। अन्य बच्चों की सेहत में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ है। बता दें कि आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों की जांच के लिए तीन श्रेणियां तय हैं। जिसमें अति कुपोषित को लाल, कुपोषित को पीली श्रेणी और स्वस्थ बच्चों को सामान्य श्रेणी में रखा गया है। अप्रैल में हुए सर्वे में अति कुपोषित बच्चों की संख्या 7700 के करीब पहुंच गई थी, लेकिन जून में यह आंकड़ा घटकर 7500 तक आया है। अधिकारियों का कहना है कि केंद्रों पर बच्चों की सेहत सुधारने के लिए किए जा रहे प्रयास के कारण ही अति कुपोषित बच्चों की संख्या में कमी आ रही है। अभी और प्रयास करने की जरूरत है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी अखिलेंद्र दुबे ने बताया कि राज्य पोषण मिशन के तहत जिले से कुपोषण को जड़ से खत्म करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों का शारीरिक परीक्षण कर उन्हें पोषाहार और उससे बने व्यंजन दिए जा रहे हैं और टीकाकरण भी किया जा रहा है। अभिभावकों को जागरूक कर नियमित भोजन के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इस प्रयास से जिले में करीब 400 बच्चे अति कुपोषित की श्रेणी से कुपोषित की श्रेणी में आए हैं।
पोषाहार से सेहत सुधारने का दावा
बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए प्रशासन ने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों, एएनएम और आशा कार्यकत्रियों को जिम्मेदारी सौंपी है। इन्हें जिले के 3503 आंगनबाड़ी केंद्रों पर हर बुधवार और शनिवार को बच्चों और गर्भवती महिलाओं की जांच कर उन्हें पोषाहार और पोषाहार से बने व्यंजन दिए जा रहे हैं। दावा है कि इससे बच्चों का कुपोषण दूर किया जाएगा।
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केंद्रों पर खराब पड़ी हैं वजन वाली मशीनें
आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों का वजन कर उनके कुपोषित या स्वस्थ होने का पता लगाया जाता है। सूत्रों की मानें तो ज्यादातर आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों के वजन के लिए रखी गईं मशीनें ठीक से काम नहीं कर रही हैं। इस कारण अभी भी अति कुपोषित और कुपोषित बच्चों का सही आंकड़ा नहीं आ पा रहा है अगर केंद्रों की सभी मशीनें सही हों तो अति कुपोषित बच्चों की संख्या और भी बढ़ सकता है।
अगस्त तक दूर करना है कुपोषण
पलिया क्षेत्र के थारू बाहुल्य 37 गांवों में अगस्त माह तक कुपोषण को जड़ से मिटाना है। गौरतलब है कि इन गांवों में 53 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। डीएम किंजल सिंह ने इन गांवों को गोद लिया है। अधिकारियों के मुताबिक इन गांवों में कुल 4,576 बच्चे हैं, जिनमें 1583 कुपोषित और 247 अति कुपोषित हैं। ऐसे बच्चों को चिंह्ति कर लिया गया है। थारू बाहुल्य गांवों से कुपोषण को दूर करने के लिए चंदन चौकी में मिनी पुनर्वास केंद्र भी बनाया है।
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आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों का वजन कर उन्हें पोषाहार देने की व्यवस्था है, लेकिन यह भी प्रयास बच्चों की सेहत में खास सुधार नहीं कर पा रहा है। जून में इससे महज 400 बच्चों को ही अति कुपोषित की श्रेणी से कुपोषित की श्रेणी में लाया जा सका है। अन्य बच्चों की सेहत में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ है। बता दें कि आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों की जांच के लिए तीन श्रेणियां तय हैं। जिसमें अति कुपोषित को लाल, कुपोषित को पीली श्रेणी और स्वस्थ बच्चों को सामान्य श्रेणी में रखा गया है। अप्रैल में हुए सर्वे में अति कुपोषित बच्चों की संख्या 7700 के करीब पहुंच गई थी, लेकिन जून में यह आंकड़ा घटकर 7500 तक आया है। अधिकारियों का कहना है कि केंद्रों पर बच्चों की सेहत सुधारने के लिए किए जा रहे प्रयास के कारण ही अति कुपोषित बच्चों की संख्या में कमी आ रही है। अभी और प्रयास करने की जरूरत है।
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जिला कार्यक्रम अधिकारी अखिलेंद्र दुबे ने बताया कि राज्य पोषण मिशन के तहत जिले से कुपोषण को जड़ से खत्म करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों का शारीरिक परीक्षण कर उन्हें पोषाहार और उससे बने व्यंजन दिए जा रहे हैं और टीकाकरण भी किया जा रहा है। अभिभावकों को जागरूक कर नियमित भोजन के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इस प्रयास से जिले में करीब 400 बच्चे अति कुपोषित की श्रेणी से कुपोषित की श्रेणी में आए हैं।
पोषाहार से सेहत सुधारने का दावा
बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए प्रशासन ने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों, एएनएम और आशा कार्यकत्रियों को जिम्मेदारी सौंपी है। इन्हें जिले के 3503 आंगनबाड़ी केंद्रों पर हर बुधवार और शनिवार को बच्चों और गर्भवती महिलाओं की जांच कर उन्हें पोषाहार और पोषाहार से बने व्यंजन दिए जा रहे हैं। दावा है कि इससे बच्चों का कुपोषण दूर किया जाएगा।
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केंद्रों पर खराब पड़ी हैं वजन वाली मशीनें
आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों का वजन कर उनके कुपोषित या स्वस्थ होने का पता लगाया जाता है। सूत्रों की मानें तो ज्यादातर आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों के वजन के लिए रखी गईं मशीनें ठीक से काम नहीं कर रही हैं। इस कारण अभी भी अति कुपोषित और कुपोषित बच्चों का सही आंकड़ा नहीं आ पा रहा है अगर केंद्रों की सभी मशीनें सही हों तो अति कुपोषित बच्चों की संख्या और भी बढ़ सकता है।
अगस्त तक दूर करना है कुपोषण
पलिया क्षेत्र के थारू बाहुल्य 37 गांवों में अगस्त माह तक कुपोषण को जड़ से मिटाना है। गौरतलब है कि इन गांवों में 53 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। डीएम किंजल सिंह ने इन गांवों को गोद लिया है। अधिकारियों के मुताबिक इन गांवों में कुल 4,576 बच्चे हैं, जिनमें 1583 कुपोषित और 247 अति कुपोषित हैं। ऐसे बच्चों को चिंह्ति कर लिया गया है। थारू बाहुल्य गांवों से कुपोषण को दूर करने के लिए चंदन चौकी में मिनी पुनर्वास केंद्र भी बनाया है।